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यूपी का वो 'दानवीर कर्ण' जिसने गरीबों के नाम कर दी अपनी 600 करोड़ की कमाई, अपने लिए रखा सिर्फ एक घर

नई दिल्ली, 21 जुलाई। दुनिया में गरीबी को सबसे बड़ा अभिशाप माना जाता है। जिसे मिटाने में जिंदगी खप जाती है। लेकिन हमारे समाज में दानवीर कर्ण जैसे लोग आज भी मौजूद हैं जो गरीबों के लिए मसीहा से कम नहीं हैं। मुरादाबाद के डॉ. अरविंद कुमार गोयल उन दानवीरों में से एक हैं जिन्होंने गरीबों के लिए अपनी सारी कमाई दान कर दी और अपने रहने लिए सिर्फ एक घर अपने पास रखा।

कोरोना काल में 50 गावों को लिया था गोद

कोरोना काल में 50 गावों को लिया था गोद

यूपी के उद्योगपति डॉ. अरविंद कुमार गोयल ( Dr. Arvind Kumar Goel) वो दानवीर हैं जो गरीबों के लिए मसीहा बनकर उभरे हैं। उन्होंने उस वक्त 50 गावों को गोद लिया जब दुनिया भारी मुश्किल की दौर से गुजर रही थी। कोरोना काल में उन्होंने तमाम कठिनाईयों के बीच 50 गांवों के लोगों को मुफ्त भरपेट भोजन कराया और अब उन्होंने अपने 50 साल की कमाई गरीबों के उत्थान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को दान कर दी है।

50 साल की कमाई 600 करोड़

50 साल की कमाई 600 करोड़

डॉ. अरविंद कुमार गोयल इतनी संपत्ति कमाने के लिए अपना आधा जीवन लगा दिया। वर्तमान में कुल संपत्ति 600 करोड़ रुपए है। उन्हें इसे बनाने में 50 साल लग गए। जिसे अब वो अब यूपी सरकार को दान कर कर रहे हैं।

मुराबाद की कोठी रखी अपनी पास

मुराबाद की कोठी रखी अपनी पास

गोयल ने अपनी सपत्ति का दान राज्य सरकार के हाथों में दिया है। वे 100 से अधिक शिक्षण संस्थान, वृद्धा आश्रम और अस्पताल के वो ट्रस्टी हैं। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में ये संस्थान हैं। कोरोना महामारी के दौरान मुरादाबाद के 50 गांवों को उन्होंने गोद लिया था। जहां उन्होंने लोगों को मुफ्त खाना और दवा दिलवाई। गोयल ने अपनी सारी संपत्ति दान कर दी है। उन्होंने अपने पास सिर्फ मुरादाबाद सिविल लाइंस स्थित कोठी रखी है।

जीवन का भरोसा नहीं

जीवन का भरोसा नहीं

डॉ. गोयल ने अपनी सारी संपत्ति को दान करने का ऐलान 18 जुलाई यानी सोमवार को किया था। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा 'अब मैंने काफी तरक्की कर ली। लेकिन जीवन का कोई भरोसा नहीं। इसलिए जीवित रहते अपनी संपत्ति सही हाथों में सौंप दी।

ट्रेन की घटना के बाद हुई शुरुआत

ट्रेन की घटना के बाद हुई शुरुआत


डॉ. गोयल ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा 'दिसंबर का महीना था। ट्रेन में सवार हुआ तो कोच में सामने एक व्यक्ति को ठंड से ठिठुरते देखा। उसके पैरों ने चप्पल थी और ना ही उसके पास चादर। कड़ाके की ठंड में उसकी हालत देखी नहीं गई और मैंने उसे अपने जूते उतारकर दे दिए।' डॉ. गोयल बताते हैं कि उस दिन के बाद उन्होंने गरीबों और बेसहारा की सहायता करना का नेक कार्य शुरू कर दिया।

4 राष्ट्रपति सम्मानित कर चुके

4 राष्ट्रपति सम्मानित कर चुके

गरीबों की मदद के लिए डॉ. गोयल चार पर राष्ट्रपति से सम्मित हो चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बाद चौथे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी उनको सम्मानित कर चुके हैं।

माता-पिता स्वतंत्रता सेनानी

माता-पिता स्वतंत्रता सेनानी

डॉ. गोयल का जन्म मुरादाबाद में हुआ था। उनके पिता प्रमोद कुमार और मां शकुंतला देवी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वे पहले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के चेयरमैन भी रह चुके हैं।

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