Indore Water Crisis: लैब रिपोर्ट ने उड़ाए सबके होश, नल के पानी में मिले जानलेवा बैक्टीरिया, क्या है वजह?
Indore Water Crisis: मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर, जो स्वच्छता के लिए देशभर में मिसाल पेश करता है, इस समय एक भीषण स्वास्थ्य संकट के दौर से गुजर रहा है। जिस पानी को लोगों की प्यास बुझाने के लिए सप्लाई किया गया, वही आज जानलेवा साबित हो रहा है। शहर के विभिन्न हिस्सों में दूषित जल की आपूर्ति के कारण अब तक 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1,400 लोग अस्पतालों में अपनी जान की जंग लड़ रहे हैं।
लैब की शुरुआती जांच ने स्वास्थ्य विभाग के होश उड़ा दिए हैं। पीने के पानी के सैंपल्स में ऐसे बैक्टीरिया पाए गए हैं जो आमतौर पर केवल सीवर और इंसानी गंदगी में मौजूद होते हैं। यह घटना शहरी बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है।

पानी में मिले 'ई. कोलाई' और 'क्लेब्सिएला' बैक्टीरिया
जल परीक्षण की शुरूआती रिपोर्ट के अनुसार, सप्लाई किए गए पानी में ई. कोलाई (E. coli) और क्लेब्सिएला (Klebsiella) नामक बैक्टीरिया की भारी मौजूदगी पाई गई है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि ये बैक्टीरिया मुख्य रूप से सीवर के पानी और इंसानी मल में पनपते हैं। इनका पेयजल आपूर्ति में मिलना इस बात का पुख्ता सबूत है कि शहर की मुख्य पाइपलाइन कहीं न कहीं सीवर लाइन के संपर्क में आ गई थी। यह इतना गंभीर था कि पानी पूरी तरह से विषैला हो गया और पीने के लायक नहीं रहा।
Indore Water Crisis: आंतों के मित्र, पानी में बने दुश्मन
डॉक्टरों के मुताबिक, ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया सामान्यतः मनुष्य की आंतों में मौजूद रहते हैं और वहां हानिकारक नहीं होते। हालांकि, जब ये बैक्टीरिया भोजन या पानी के जरिए शरीर के भीतर पहुंचते हैं, तो ये संक्रमण फैलाना शुरू कर देते हैं। इंदौर के मामले में यही हुआ। दूषित पानी के सेवन से बैक्टीरिया ने लोगों के पाचन तंत्र पर सीधा हमला किया, जिससे स्थिति तेजी से नियंत्रण से बाहर हो गई।
Indore Water Crisis: दस्त और डिहाइड्रेशन से बिगड़े हालात
दूषित जल के सेवन से प्रभावित मरीजों में पेट की गंभीर बीमारियों के लक्षण देखे गए हैं। सबसे आम लक्षणों में तेज उल्टी, दस्त और शरीर में पानी की भारी कमी (डिहाइड्रेशन) शामिल है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण उन पर इसका असर सबसे घातक पड़ा है। कई मरीजों में 'पेचिश' जैसे लक्षण सामने आए हैं, जहाँ दस्त के साथ खून आने की शिकायत दर्ज की गई है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर एंटीबायोटिक और तरल पदार्थ (IV Fluids) न दिए जाएं, तो शरीर के महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर सकते हैं, जो मृत्यु का मुख्य कारण बनता जा रहा है।
Indore Water Crisis: क्या यह हैजा या शिगेला है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ई. कोलाई ही नहीं, बल्कि अन्य खतरनाक बैक्टीरिया की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कहीं इसमें शिगेला (Shigella), साल्मोनेला (Salmonella) या हैजा फैलाने वाला विब्रियो कोलेरी तो शामिल नहीं है। विशेषज्ञों ने प्रशासन को सलाह दी है कि जब तक संक्रमण का स्रोत पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता, तब तक लोगों को पानी उबालकर ही पीना चाहिए।
Indore Water Crisis: प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
वर्तमान में इंदौर प्रशासन के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, प्रभावित 1,400 मरीजों को तत्काल और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना ताकि मृत्यु दर को रोका जा सके। दूसरी, शहर के दूषित जल नेटवर्क की पहचान करना और उन लीकेज को ठीक करना जहां से सीवर का पानी पेयजल पाइपलाइन में मिल रहा है। यह हादसा इस बात की याद दिलाता है कि स्वच्छता के केवल बाहरी मानकों के बजाय भूमिगत सीवर और वाटर सप्लाई सिस्टम की देखरेख कितनी अनिवार्य है।
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