Indore Water Crisis: 15 मौतों का आरोप, CAG की 2019 रिपोर्ट ने पहले ही खोली थी गंदे पानी की पोल
Indore MP News: इंदौर में दूषित पानी से हो रही मौतों का मामला अब सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक बड़े सिस्टम फेल्योर और राजनीतिक टकराव का मुद्दा बनता जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इंदौर में गंदा पानी पीने से अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सरकार वास्तविक आंकड़े छिपाने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि यह त्रासदी अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके संकेत सालों पहले मिल चुके थे, जिन्हें नजरअंदाज किया गया।

CAG की रिपोर्ट: 6 साल पहले ही दी थी चेतावनी
उमंग सिंघार ने याद दिलाया कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने वर्ष 2019 में ही इंदौर और भोपाल की जल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया था कि दोनों शहरों में सप्लाई किया जा रहा पानी कई जगहों पर दूषित है और पाइपलाइन, ट्रीटमेंट प्लांट व मॉनिटरिंग सिस्टम में भारी खामियां हैं।
CAG ने न सिर्फ कमियां उजागर की थीं, बल्कि उन्हें सुधारने के लिए ठोस सुझाव भी दिए थे। इसके बावजूद सरकार और जिम्मेदार विभागों ने उन सिफारिशों को फाइलों में ही दफन कर दिया। उमंग सिंघार ने कहा,
"जब चेतावनी पहले ही मिल चुकी थी, तो फिर आज लोगों की मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा?"
ADB कर्ज़: अरबों रुपए खर्च, फिर भी साफ पानी नहीं
नेता प्रतिपक्ष ने एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से लिए गए कर्ज़ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि 2004 में मध्य प्रदेश सरकार ने ADB से 200 मिलियन डॉलर (तत्कालीन दरों पर करीब ₹906.4 करोड़) का कर्ज़ लिया था। यह कर्ज़ 25 साल के लिए था और इसका उद्देश्य था प्रदेश के चार बड़े शहरों-भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर-में जल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करना।
इस परियोजना के तहत हर नागरिक को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया था। पाइपलाइन नेटवर्क सुधारने, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट मजबूत करने और लीकेज रोकने जैसे काम इसमें शामिल थे।
लेकिन उमंग सिंघार ने सवाल उठाया, "जब सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च हो चुके, तो आज इंदौर और भोपाल में लोग गंदा पानी पीने को मजबूर क्यों हैं?"
15 साल बाद आई रिपोर्ट, फिर भी कार्रवाई शून्य
ADB कर्ज़ लेने के करीब 15 साल बाद, यानी 2019 में, CAG ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में बताया गया कि परियोजना का काम अपर्याप्त रहा, कई लक्ष्य अधूरे छोड़े गए और जल प्रबंधन में भ्रष्टाचार के संकेत भी मिले।
रिपोर्ट में कहा गया कि जिन सुधारों के लिए कर्ज़ लिया गया था, वे ज़मीन पर दिखाई नहीं देते। पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच नहीं हुई, सीवेज और पेयजल लाइनों का मिश्रण कई इलाकों में बना रहा और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं की गई।
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि रिपोर्ट आने के बाद भी सरकार ने न तो दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की और न ही सिस्टम सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाया।
"CAG की रिपोर्ट चेतावनी थी, लेकिन सरकार ने उसे अनसुना किया। आज उसी अनदेखी की कीमत आम जनता अपनी जान देकर चुका रही है।"
सरकार पर सीधा हमला, जवाबदेही की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से मांग की कि इंदौर जल त्रासदी की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, CAG रिपोर्ट में जिन अधिकारियों और एजेंसियों की भूमिका संदिग्ध बताई गई थी, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई हो। साथ ही, मृतकों के परिजनों को उचित मुआवज़ा और पीड़ित इलाकों में सुरक्षित पेयजल की आपात व्यवस्था की जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस मामले को दबाने की कोशिश की, तो कांग्रेस इसे सड़क से सदन तक उठाएगी। "यह राजनीति का नहीं, लोगों की जिंदगी का सवाल है। गंदा पानी और सरकारी लापरवाही अब जानलेवा बन चुकी है।"
इंदौर की जल त्रासदी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या रिपोर्टें सिर्फ कागजों के लिए बनती हैं, और क्या चेतावनियों को नजरअंदाज करने की कीमत हमेशा आम जनता को ही चुकानी पड़ेगी?












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