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IndiGo Crisis: इंडिगो में गड़बड़ी पहले से थी फिर समस्या क्यों छुपाई गई? एयरलाइन पर सरकार ने उठाया बड़ा सवाल

IndiGo Crisis Update: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo द्वारा बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन किए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने संसद में अहम जानकारी दी है। सोमवार, 8 दिसंबर को सरकार ने राज्यसभा में बताया कि 1 दिसंबर को हुई बैठक में IndiGo ने किसी भी संभावित समस्या या ऑपरेशनल दिक्कत का कोई संकेत नहीं दिया था।

जबकि अगले ही दिन एयरलाइन ने अचानक हजारों फ्लाइटें रद्द करनी शुरू कर दीं। विस्तार से जानिए केंद्र सरकार ने इंडिगो एयरलाइन के इस क्राइसिस पर क्या कहा...

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केंद्र सरकार ने क्या कहा?

राज्यसभा में सांसद प्रमोद तिवारी के सवाल का जवाब देते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि IndiGo द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर कैंसिलेशन का कारण उसके क्रू रोस्टरिंग और आंतरिक प्लानिंग सिस्टम की खामियां थीं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नवंबर में लागू हुए Flight Duty Time Limitations (FDTL) नए नियमों को लेकर बार-बार उठाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं, क्योंकि बाकी एयरलाइंस ने इन्हें बिना किसी बड़े व्यवधान के लागू कर लिया।

सुरक्षा पर किसी भी तरह का समझौता नहीं - मंत्री नायडू

राज्यसभा में चर्चा के दौरान मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा है। उन्होंने कहा-सुरक्षा पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। देरी और कैंसिलेशन की स्थिति में यात्रियों के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त CAR नियम लागू हैं, और एयरलाइनों को हर हाल में इनका पालन करना अनिवार्य है।

मंत्री ने बताया कि तकनीकी मुद्दों की जांच की जा रही है और एविएशन सेक्टर में निरंतर टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन होता रहता है। उड्डयन मंत्री ने कहा-अगर कोई भी ऑपरेटर नियमों का पालन नहीं करता है, तो सरकार कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार एयरलाइन सेक्टर में अधिक खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना चाहती है, ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े और यात्रियों को बेहतर विकल्प मिलें।

4,500 से ज्यादा उड़ानें रद्द, लाखों यात्री हुए प्रभावित

पिछले हफ्ते मंगलवार दोपहर से शुरू हुआ IndiGo का संकट सोमवार तक सातवें दिन भी जारी रहा। इस दौरान एयरलाइन ने 4,500 से ज्यादा उड़ानें रद्द कीं। IndiGo देश के घरेलू हवाई बाजार में 60% हिस्सेदारी रखती है, ऐसे में अचानक हुए इस बड़े संकट ने यात्रियों की यात्रा योजनाओं को बुरी तरह प्रभावित किया। कई यात्री घंटों तक हवाईअड्डों पर फंसे रहे, जबकि कई लोग बिना जानकारी के इधर-उधर भटकते दिखे।

सरकार बोली-"एविएशन सेक्टर में और प्लेयर्स की जरूरत"

राज्यसभा में IndiGo की बाजार हिस्सेदारी पर चिंता जताए जाने पर मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा, मैं चाहता हूं कि इस उद्योग में और खिलाड़ी आएं। आज हमारे पास सिर्फ पांच बड़ी एयरलाइंस हैं। मंत्रालय लगातार और एयरलाइंस को प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रहा है। सरकार के इस बयान से साफ है कि भविष्य में एविएशन सेक्टर में नए खिलाड़ियों के प्रवेश को लेकर नीतियां और उदार हो सकती हैं।

फ्लाइट कैंसिलेशन को लेकर रिफंड के मुद्दे पर भी सरकार ने आंकड़े पेश किए। नायडू ने बताया कि इस दौरान 5,86,705 यात्रियों की बुकिंग रद्द हुई, जिनमें से यात्रियों और एयरलाइन-दोनों द्वारा किए गए कैंसिलेशन शामिल हैं। इन सभी के लिए अब तक ₹569 करोड़ का रिफंड जारी किया जा चुका है।

DGCA की सख्ती और IndiGo को नोटिस

IndiGo को पिछले हफ्ते DGCA की ओर से शो-कॉज नोटिस जारी किया गया था। हालांकि एयरलाइन के अनुरोध के बाद नियामक ने जवाब देने के लिए 24 घंटे का अतिरिक्त समय दे दिया है। उधर, एयरलाइन का दावा है कि उसकी सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं, लेकिन सोमवार सुबह भी 400 से अधिक नई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

नागरिक उड्डयन मंत्री ने पहले भी कहा था कि नए FDTL नियम लागू होने के बाद अन्य एयरलाइंस में कोई बड़ा व्यवधान नहीं हुआ, केवल IndiGo ही अपने आंतरिक प्रबंधन की कमजोरियों के कारण ऐसी स्थिति में पहुंचा। उन्होंने बताया कि यात्रियों की परेशानी को देखते हुए सरकार को एयरलाइन को कुछ FDTL नियमों से अस्थायी राहत देनी पड़ी, ताकि संचालन सामान्य किया जा सके।

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