भारतीय वैज्ञानिकों ने खोज ली कोरोना वायरस को रोकने की तकनीक, एंट्री पर ही लगा देगी लगाम
नई दिल्ली, 13 जुलाई: भारतीय वैज्ञानिकों ने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए एक नई तकनीक विकसित की है। अगर सबकुछ सही रहा तो यह एंटी-वायरल दवा की तरह काम कर सकती है। शोधकर्ताओं के रिसर्च का परिणाम काफी उत्साहजनक बताया जा रहा है। इस तकनीक के जरिए कोरोना वायरस की कोशिकाओं में एंट्री ही रोकी जा सकती है, जिससे वह संक्रमण करने लायक ही नहीं बचेगा। इस तकनीक पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने देश की बाकी बड़ी संस्थाओं के साथ मिलकर काम किया है।

भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजी कोरोना को रोकने की तकनीक
भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो कोशिकाओं में कोरोना वायरस के प्रवेश को ही नहीं रोकेगा, बल्कि वारयस के कणों को गुच्छे में तब्दील कर देगा, जिससे जीवित कोशिकाओं को संक्रमित करने की उसकी क्षमता कम हो जाएगी। वैज्ञानिकों ने नई श्रेणी की सिंथेटिक पेप्टाइड विकसित करके यह कामयाबी हासिल की है। इससी वजह से SARS-CoV-2 जैसे वायरस को निष्क्रिय करने का एक विकल्प मिल गया है, जो एंटीवायरल की तरह कारगर साबित हो सकती है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने सीएसआईआर और इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबायल टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर इन पेप्टाइड की डिजाइन पर काम किया है। इसकी जानकारी बुधवार को विज्ञान और प्रॉद्योगिकी मंत्रालय की ओर से दी गई है।

स्पाइक प्रोटीन को बांधने में सक्षम- शोध
दरअसल, कोरोना वायरस के जिस तरह से नए वेरिएंट पैदा हो रहे हैं, उसने वैक्सीन के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं और इसी वजह से वायरस से संक्रमण को रोकने के लिए नए दृष्टिकोणों पर काम करने की जरूरत बढ़ गई है। मंत्रालय के मुताबिक वैज्ञानिकों ने पेप्टाइड डिजाइन करने के लिए जिस दृष्टिकोण पर काम किया है, वह स्पाइक प्रोटीन को कोरोना वायरस की सतह पर ही बांध और रोक सकता है। इस शोध को कोविड-19 IRPHA सेल के तहत विज्ञान और प्रॉद्योगिकी विभाग की वैधानिक संस्था साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड के समर्थन हासिल था।

एंटीवायरल की तरह किया प्रदर्शन- शोध
यह शोध नेचर केमिकल बायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने पेप्टाइड का प्रयोगशाला में स्तनधारी कोशिकाओं में विषाक्तता को जांचने के लिए परीक्षण किया और इसे सुरक्षित पाया। जब हैम्स्टर को पेप्टाइड की डोज देकर SARS-CoV-2 की हाई डोज के संपर्क में लाया गया तो सीधे वायरस के संपर्क में आने वाले हैम्स्टर की तुलना में उसमें वायरल लोड में तो कमी आई ही, फेफड़े की कोशिकाओं का भी बहुत कम नुकसान हुआ। इस तरह से इस क्लास के पेप्टाइड ने एंटीवायरल के रूप में काम करने की क्षमता का प्रदर्शन किया।

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अच्छी खबर
शोधकर्ताओं का मानना है कि कुछ और मामूली संशोधनों और पेप्टाइड इंजीनियरिंग से प्रयोगशाला में निर्मित मिनी प्रोटीन दूसरे प्रोटीन से प्रोटीन को साथ में आने से भी रोक सकता है। यह कोविड के खिलाफ लड़ाई में बहुत ही उम्मीद भरी खबर है। क्योंकि, देश में कोविड नियंत्रण में तो जरूर है, लेकिन इससे अभी पार माना दूर की कौड़ी है। पिछले 24 घंटों में ही देश में कोरोना के 16,906 नए मामले सामने आए हैं और 45 लोगों की मौतें हुई हैं। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक रिकवरी रेट अब 98.50 फीसदी है।

75 दिनों तक चलेगा फ्री प्रिकौशन डोज का अभियान
इस बीच कोरोना के खिलाफ लड़ाई में और जोर लगाने के लिए सरकार ने बुधवार को 18 से 59 साल के आयु वर्ग के लोगों के लिए फ्री कोविड वैक्सीन की बूस्टर डोज दिए जाने की घोषणा की है। यह अभियान शुक्रवार, 15 जुलाई से शुरू होगा। यह अभियान अगले 75 दिनों तक चलेगा। सरकार ने अभियान इसलिए चलाया है,क्योंकि प्रिकॉशन डोज के प्रति लोगों में जागरूकता का अभाव देखा जा रहा था। सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह अभियान आजादी के अमृत महोत्सव के जश्न के रूप में शुरू किया जा रहा है। क्योंकि, देश आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। (इनपुट-एएनआई)












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