Indian Railways: त्योहारी मौसम में ट्रेन में यह गलती पड़ सकती है भारी, जाना पड़ सकता है जेल
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर: अगर आप दिवाली और छठ पूजा के लिए ट्रेन से सफर करने की तैयारी कर रहे हैं तो थोड़ा संभल जाइए। भारतीय रेलवे आपकी यात्रा को सुखद और सुरक्षित बनाने के लिए कई सारे कदम उठा रहा है। लेकिन, इसके लिए उसे कुछ सख्त कदम भी उठाने पड़ रहे हैं, जिसमें कोविड-19 के अनुकूल व्यवहार का पालन करवाना तो है ही, साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि यात्रीगण अपने साथ कुछ ऐसा सामान लेकर ना चलें, जिससे बाकी रेल यात्री, रेल कर्मचारी या इनसे जुड़ी संपत्तियों को किसी तरह का खतरा हो। मसलन, ट्रेन में स्मोकिंग करने वालों या ज्वलनशील पदार्थों के साथ सफर करके दूसरों की जान खतरे में डालने वाले यात्रियों को जेल तक जाना पड़ सकता है।

रेलवे ने यात्रियों के लिए जारी की चेतावनी
दिवाली-छठ पूजा के मद्देनजर ट्रेनों में भीड़ बढ़नी शुरू हो गई है। रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए करीब 668 स्पेशल ट्रेन भी चला रहा है। लेकिन, इस दौरान भारतीय रेलवे एक बात के लिए बहुत ही सतर्क है कि रेल यात्री कोई ऐसी गलती ना कर बैठें, जिससे दूसरे यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों या आम लोगों की जान-माल खतरे में पड़ जाए। इस दौरान यात्री यदि ज्वलनशील पदार्थ या विस्फोटक सामग्री लेकर सफर करते हुए पकड़े गए तो तीन साल तक जेल की सजा काटनी पड़ सकती है। रेलवे के अलग-अलग जोन इस संबंध में यात्रियों के लिए सोशल मीडिया पर हिदायतें जारी कर रहे हैं।

11 नवंबर तक विशेष सतर्कता अभियान चलाएगा रेलवे
नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे ने ट्विटर के जरिए रेल यात्रियों को साफ आगाह किया है कि "कृपया रेल यात्रा के दौरान विस्फोटक एवं ज्वलनशील पदार्थ लेकर यात्रा न करें। यह पूरी तरह वर्जित है, ऐसा करना दंडनीय अपराध है।" इसके लिए रेलवे ने सतर्कता बढ़ा दी है और 11 नवंबर तक रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में विशेष चेकिंग अभियान चलाने का फैसला किया है। इसी तरह की चेतावनी वेस्ट सेंट्रल रेलवे ने भी जारी किया है, जिसका पालन नहीं करने वाले यात्रियों को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है और या जुर्माने के साथ जेल भी जाना पड़ सकता है।

किन चीजों के साथ रेल सफर पर है पाबंदी ?
जिन ज्वलनशील पदार्थों के साथ रेल यात्रा पर पाबंदी है, उनमें स्टोव, पेट्रोलियम पदार्थ, गैस सिलेंडर, पटाखे, सिगरेट, सूखी घास, मिट्टी का तेल, माचिस या आग फैलाने वाली कोई भी ज्वलनशील चीज। गौरतलब है कि यात्री ट्रेनों में आग लगने की घटनाओं के बाद इसी साल 22 मार्च से भारतीय रेलवे ने आग से कोताही बरतने वाले यात्रियों के खिलाफ एक विशेष जागरुकता अभियान चलाया था, जिस दौरान स्टेशनों और ट्रेनों में सघन तलाशी ली गई थी। यह अभियान मुख्य तौर पर ट्रेनों में स्मोकिंग करने वालों के खिलाफ लॉन्च किया गया था और रेलवे के बड़े अधिकारियों को इसके खिलाफ आरपीएफ के एएसआई रैंक के अफसरों के साथ तैनाती की गई थी।

रेल परिसरों में स्मोकिंग पर है पाबंदी
दरअसल, ट्रेनों और रेलवे स्टेशन परिसर और प्लटेफॉर्म में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए स्मोकिंग करने पर पूरी तरह से पाबंदी लगी हुई है। इसलिए इन जगहों पर बीड़ी-सिगरेट पीना दंडनीय अपराध है और ट्रेनों और स्टेशन परिसरों में स्मोकिंग करने वालों के खिलाफ रेलवे ऐक्ट और टोबैको ऐक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है, जिसके तहत जुर्माने की भी व्यवस्था है।

इस साल की शुरुआत में हो चुकी है बड़ी दुर्घटनाएं
इस साल की शुरुआत में कोरोना लॉकडाउन से पहले देहरादून और लखनऊ शताब्दी जैसी नामी ट्रेनों में आग लगने की घटनाएं हुई थीं और तहकीकात में यह पता चला था कि देहरादून शताब्दी में किसी ने जलती हुई सिगरेट टॉयलेट में फेंकी थी उसी से आग ने कोच को अपनी चपेट में ले लिया था। लखनऊ शताब्दी के लगेज वैन में आग लगी थी, जिसे दिल्ली से सटे गाजियाबाद स्टेशन पर रोककर आग पर काबू पाया गया। सबसे बड़ी बात ये रही कि इतनी भयानक घटनाओं में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन इसके चलते यात्रियों और रेलवे को करोड़ों की संपत्ति का नुकसान झेलना पड़ा।












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