'ये खुशी अनोखी है', ट्रेन में 19 महीने का बच्चे का छूट गया था पसंदीदा खिलौना, रेलवे टीम ने गांव जाकर लौटाया
भारतीय रेलवे की एक टीम ने 19 महीने के बच्चे का खोया हुआ खिलौना उसको घर जाकर लौटाया है। बच्चा ट्रेन में माता-पिता के उतरने के बाद अपने खिलौने को छोड़ गया था।

Indian Railways returns child's favorite toy: कभी-कभी ऐसी खबरें सामने आती है, जिसको पढ़ने के बाद एक अच्छा एहसास होता है। ऐसा ही भारतीय रेलवे ने किया। रेलवे ने एक बच्चे को उसका पसंदीदा खिलौना लौटाया, जिसको वो अपने माता-पिता के साथ सफर के दौरान ट्रेन में छोड़ गया था। बच्चे को जब उसका खोया हुआ खिलौना मिला तो उसकी चाहत उसको देखकर ही नजर आ रही थी।

रेलवे हेल्पलाइन पर यात्री ने दर्ज कराई थी शिकायत
दरअसल, रेल कर्मचारी ने कुछ ऐसा प्यार कदम उठाया है, जिसको जानन के बाद हर कोई रेलवे की तारीफ करता नहीं थक रहा। ट्रेन में छूटे बच्चे के फेवरेट खिलौने को कर्मचारियों ने 20 किलोमीटर जाकर वापस लौटाया है। भारतीय रेलवे ने 19 महीने के बच्चे की खुशी तो उस वक्त दोगुना कर दिया, जब उसका पसंदीदा खोया हुआ खिलौना उसे वापस मिल गया। जानकारी के मुताबिक बुधवार को रेलवे की 139 हेल्पलाइन नंबर पर भुसीन पटनायक नाम के एक यात्री ने शिकायत दर्ज कराई थी।

सिकंदराबाद-अगरतला स्पेशल ट्रेन का वाक्या
पटनायक ने रेलवे को बताया कि वह सिकंदराबाद-अगरतला स्पेशल ट्रेन (07030) के B-2 कोच में यात्रा कर रहे थे। उनके साथ एक बच्चा और उसके माता-पिता भी सफर कर रहे थे, इस दौरान जिस खिलौने से वो बच्चा खेल रह था, उसे वो ट्रेन से उतरते वक्त भूल गए। पटनायक ने रेलवे अधिकारियों से आग्रह किया कि क्या वे उस खिलौने को बच्चे को लौटा सकते हैं, लेकिन पटनायक के पास उस परिवार का कोई संपर्क सूत्र नहीं था।

रिजर्वेशन काउंटर से खरीदा था टिकट, ऐसे किया पता
इसके बाद भारतीय रेलवे के अधिकारियों ने तब ट्रेन के लाइव लोकेशन का पता लगाया और कर्मचारी यात्री से खिलौना लेने के लिए न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पहुंचे। अधिकारियों ने कहा कि परिवार के कॉन्टैट डिटेल का पता लगाना एक मुश्किल काम था, क्योंकि टिकट सिकंदराबाद में आरक्षण काउंटर से खरीदा गया था। एक टीम को आरक्षण की पर्ची की पहचान करने का काम सौंपा गया था और गहन खोज के बाद पर्ची मिली और उससे परिवार की डिटेल इकट्ठा की गई।

गांव पहुंचकर बच्चे को लौटाया खिलौना
आरक्षण चार्ट के माध्यम से उनका नाम मोहित रजा और नसरीन बेगम के रूप में क्रॉस-चेक किए गए थे। परिवार पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के काजी गांव में रहता था, जो कि अलुआबारी रेलवे स्टेशन से लगभग 20 किलोमीटर दूर था। रेलवे अधिकारियों की एक टीम उनके घर पहुंची और बच्चे को खिलौना सौंप दिया। अपने बच्चे को खिलौना पाकर पिता काफी खुश थे। बच्चे के पिता ने इस तरह की पहल के लिए रेलवे का आभार भी जताया।

खिलौना मिलते ही खेलने लगा
बच्चे के पिता ने अधिकारियों को बताया कि खिलौना 'ट्रक' उनके बच्चे के दिल के बहुत करीब था, लेकिन वे इसे ट्रेन में भूल गए। बच्चे के पिता मोहित ने कहा, "मुझे लगा कि कोई भी सिर्फ एक खिलौने के लिए प्रयास नहीं करेगा। इसलिए मुझे अपने बच्चे के लिए बुरा लग रहा था, लेकिन मैंने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई।" इधर, जैसे ही बच्चे को उसका खिलौना मिला, वो खेलने लग गया।












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