भारतीय नौसेना में कलवारी क्लास सबमरीन INS वागीर होगी शामिल, 5 प्वाइंट में समझें इसकी खासियत
प्रोजेक्ट 75 के तहत कलवारी क्लास की 6 पनडुब्बी मुंबई के मझगांव शिपयार्ड में बनी है। इसमें से 4 पनडुब्बी पहली ही भारतीय नौसेना में शामिल हो चुकी है और पांचवीं आज शामिल होने वाली है।

Indian Navy Kalvari class submarine Vagir: भारतीय नौसेना आज सोमवार 23 जनवरी को कलवारी क्लास की पांचवीं पनडुब्बी वागीर के परिचालन की कमीशन (शुरुआत) करेगी। नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार मुख्य अतिथि के रूप में इस समारोह में हिस्सा लेंगे। प्रोजेक्ट-75 के तहत बनी पनडुब्बी को नौसेना की लड़ाकू क्षमता ऐसे समय में शामिल किया जा रहा है, जब चीन हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है। प्रोजेक्ट-75 के तहत छह सबमरीन को बनाया जा रहा है। एमडीएल, कलवारी, खंडेरी, करंज और वेला में चल रहे प्रोजेक्ट-75 स्कॉर्पीन कार्यक्रम की चार पनडुब्बियों को भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया है। पांचवीं पनडुब्बी वागीर को आज कमीशन होना है। जबकि छठी और आखिरी पनडुब्बी 'वागशीर' भी लॉन्चिंग के बाद समुद्री परीक्षण से गुजरेगी।
पांचवीं स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन वागीर के बारे में जानें 5 बड़ी बातें...
1. स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन की तरह के मिशनों को अंजाम दे सकती हैं, जैसे कि सतह-रोधी युद्ध, पनडुब्बी-रोधी युद्ध, खुफिया जानकारी जुटाना, खदान बिछाना, क्षेत्र की निगरानी आदि भी करनाष
2. पनडुब्बी को ऑपरेशन के सभी थिएटरों में संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो नौसेना टास्क फोर्स के साथ इंटरऑपरेबिलिटी का भी प्रदर्शन करती है। यह एक शक्तिशाली मंच है, जो पनडुब्बी संचालन में परिवर्तनकारी बदलाव करता है।
3. भारत में इन पनडुब्बियों का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) मुंबई द्वारा मैसर्स नेवल ग्रुप (फ्रांस) द्वारा किया जा रहा है। एमडीएल ने इस सबमरीन को नवंबर 2022 में नौसेना को सौंपा था।
4. स्कॉर्पीन पनडुब्बियां बेहद शक्तिशाली प्लेटफॉर्म हैं, उनके पास उन्नत स्टील्थ खासियत हैं और लंबी दूरी की गाइडेड टॉरपीडो के साथ-साथ एंटी-शिप मिसाइलों से भी लैस हैं। इन पनडुब्बियों में अत्याधुनिक सोनार और सेंसर सुइट हैं। जो परिचालन क्षमताओं को बढ़ाता है।
5. इससे पहले वागीर पनडुब्बी को इंडियन नेवी में सबसे पहले 1 नवंबर 1973 को कमीशन किया गया था, जिसने अपने 30 साल के पूरे कार्यकाल के दौरान कई ऑपरेशन में हिस्सा लिया। लगभग तीन दशकों तक देश की सेवा करने के बाद जनवरी 2001 में पनडुब्बी को सेवामुक्त कर दिया गया था।












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