40 लाख 60 हजार वर्ग किलोमीटर को खंगाल रही इंडियन नेवी

क्या आपको मालूम है कि अंडमान के समुद्र का 35,000 किमी तक का दायरा भारत में ही है और यह मैनहैट्टन के कुल आकार से 400 गुना ज्यादा है। तो फिर कैसे नेवी और कोस्ट गार्ड इस ऑपरेशन को आगे बढ़ा रहे?
इंडियन नेवी के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि अंडमान स्थित समुद्र और मलेका के 4.6 मिलियन स्क्वॉयर किलोमीटर के इलाके में उसके जवान मलेशियन फ्लाइट के बोइंग777 की तलाश जारी रखे हैं।
मलेशिया की इस गायब हुई फ्लाइट की तलाश के लिए भारत सबसे करीबी जगह को ध्यान में रखकर रेस्क्यू एंड सर्च ऑपरेशन को आगे बढा रहा है और उससे जुड़े फैसले ले रहा है।
भारतीय महाद्वीप के 40 लाख 60 हजार वर्ग किलोमीटर का दायरा भारत के कब्जे में आता है। यह बात इस मैप से साफ जाहिर हो रही है। इस इलाके को इंडियन नेवी ने तीन हिस्सों में बांटा है और इन तीनों हिस्सों पर अलग-अलग पोर्ट के जरिए नजर रखी जा रही है।
इंडियन कोस्ट गार्ड किसी भी रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व करती है। मैप से साफ है कि किस तरह से देश के आसपास मौजूद समुद्र को सर्च एंड रेस्क्यू जोन के लिहाज से भारत और बाकी दक्षिण एशिया के बीच बांटा गया है।
35,000 किमी का यह दायरा मैनहैट्टन के आकार से 400 गुना ज्यादा है
नई दिल्ली स्थित मैरीटाइम थिंक टैंक नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के निदेशक प्रदीप कौशिव की ओर से एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के महासागरों को यूके स्थित इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन की ओर से सर्च एंड रेस्क्यू एरिया में बांटा जाता है।
लेकिन मलेशियन फ्लाइट के जैसी कोई तबाही होती है तो फिर जिस देश का जहाज उस देश की सीमा के करीब होता है, संकटग्रस्त देश की मदद करना उस देश की जिम्मेदारी है।
पश्चिमी अरब सागर के पानी को मुंबई स्थित कोस्टल अथॉरिटीज नियंत्रित करते हैं जबकि देश के पश्चिमी हिस्से के पानी को चेन्नई स्थित अथॉरिटीज की ओर से नियंत्रित किया जाता है। एमएच370 की खोज भारत के अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में की जा रही है।
यहां पर इस समय कम से कम छह जहाज, दो डॉर्नियर एयरक्राफ्ट्स और एक हेलीकॉप्टर को सर्च ऑपरेशन में तैनात किया गया है।
इंडियन नेवी की जानकारी के मुताबिक मलेशिया ने समुद्र के 35,000 किमी हिस्से की तलाश करने का अनुरोध भारत से किया था। 35,000 किमी का यह दायरा मैनहैट्टन के आकार से 400 गुना ज्यादा और न्यूयॉर्क शहर के आकार से 28 गुना ज्यादा है।
इंडियन नेवी के एक वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो मलेशियन फ्लाइट को इतने बड़े हिस्से में तलाशन फूस के ढेर में सूईं को तलाशने जैसा ही है।












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