ISIS जैसे संगठनों से नफरत करते हैं भारतीय मुसलमान
नई दिल्ली। खुद को मुसलमानों का हितैशी बताने वाले आतंकी संगठन आईएसआईएस ने जिस तरह से मासूमों के सिर कलम किये और अब 90 ईसाईयों को बंधक बना लिया है, उसकी निंदा पूरी दुनिया कर रही है। जिस तरीके से यह संगठन काम कर रहा है, वह भारतीय मुसलमानों को कतई पसंद नहीं है। यह बात भारत सरकार ने अंतर्रार्ष्टीय मंच पर एक प्रेजेंटेशन में हाल ही में कही।
अमेरिका में हुई एक बैठक में आईएसआईएस पर चर्चा हुई, जिसमें भारत ने कहा कि भारतीय मुसलमान असल में आईएसआईएस जैसे संगठनों से घृणा करते हैं। और तो और भारत के मुसलमान ऐसे संगठनों को ज्वाइन करने की लालसा जरा भी नहीं रखते हैं। यह बात इसी से सिद्ध होती है कि देश में 18 करोड़ मुसलमान हैं। यानी कुल आबादी की 14.88 प्रतिशत। इसके बावजूद यहां से इस्लामिक संगठन को ज्वाइन करने के मामले नहीं आ रहे हैं।
यह प्रेजेंटेशन भारत की ओर से ज्वाइंट इंटेलीजेंस कमेटी के चीफ आर एन रवि ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आतंकी संगठन देश के बाहर से लोगों को अपने साथ जोड़ने की फिराक में रहते हैं।
आईएसआईएस पर भारत का रुख
कईयों ने यह आरोप लगा कि भारत सरकार आईएसआईएस के प्रति कड़ा रुख नहीं अपना रहा है। जबकि सच तो यह है कि आतंकी संगठन से जुड़ने की फिराक में रहने वाले लोगों की धरपकड़ करने में इंटेलीजेंस ब्यूरो हमेशा तत्पर रहता है।
घर में पलता जिहाद
घर में जिहाद की पढ़ाई की शुरुआत पाकिस्तान से हुई। वहीं से इंडियन मुजाहिदीन और स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया जैसे संगठनों को खड़ा किया गया। उनका मकसद था भारत के युवाओं को बरगला कर अपने साथ जोड़कर भारत पर ही हमला बोलने का। हालांकि अब ये दोनों संगठन भारत के लिये बड़ी समस्या बन गये हैं।
जिहाद का पाठ पढ़ाकर जिस तरह से भारतीयों को इन संगठनों ने अपने साथ जोड़ा है, उससे इंटेलीजेंस एजेंसियों के लिये मुसीबतें बढ़ गई हैं। मुसीबतें इसलिये क्योंकि बिना सोचे समझे किसी पर ऐसे ही कार्रवाई नहीं कर सकते। सरकार बहुत ज्यादा ऐतियात बरतते हुए ही कार्रवाई करती है।
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