'हमें डर नहीं लग रहा, हमें तो गर्व है', कैप्टन शुभांशु शुक्ला के अंतरिक्ष में जाने के चयन पर क्या बोला परिवार
Group Capt Shubhanshu Shukla: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का चयन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में जाने के लिए हुआ है। शुभांशु शुक्ला जल्द ही इसरो और नासा मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जाएंगे। लखनऊ के रहने वाले शुभांशु शुक्ला का परिवार इस बात से खुश है।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का परिवार गौरवान्वित है। उनके परिवार को मिशन के लिए चुने जाने पर बधाई मिल रही है। उनके पिता शंभू दयाल शुक्ला, जो एक रिटायर सरकारी अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि, उन्हें अपने बेटे की इस उपलब्धि पर बहुत गर्व है। उनकी मां आशा शुक्ला ने कहा कि, उनका बेटा बहुत ही शांत दिमाग वाला है और परिस्थितियों को शांति से संभालने में माहिर है।

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इसरो ने बताया है कि ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और प्रशांत बालकृष्णन नायर को आईएसएस मिशन के लिए चुना गया है। शुभांशु को प्राइम अंतरिक्ष यात्री के तौर पर चुना गया है। जबकि नायर उनके बैकअप होंगे। इसरो सूत्रों के मुताबिक यह चयन नासा द्वारा मान्यता प्राप्त सेवा प्रदाता एक्सिओम स्पेस इंक की सिफारिशों के आधार पर किया गया है।
शुभांशु शुक्ला के पिता बोले- नियति को कुछ और ही मंजूर था
लखनऊ के त्रिवेणी नगर इलाके में शुक्ला परिवार के घर में इस घोषणा के बाद जश्न का माहौल है। शुभांशु शुक्ला के पिता शंभू दयाल शुक्ला ने कहा, "हम बहुत खुश हैं और उनकी उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर रहे हैं। हम ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि मिशन सफल हो, जिसका हमें पूरा भरोसा है। देश के लोग भी अपना आशीर्वाद दे रहे हैं।" उन्होंने बताया कि शुक्रवार को जब उन्हें शुभांशु के चयन के बारे में पता चला तो उन्होंने शुभांशु से बात की थी।
शंभू दयाल ने बताया कि बचपन में शुभांशु का अंतरिक्ष में कोई झुकाव नहीं था। उन्हें उम्मीद थी कि उनका बेटा सिविल सेवा या मेडिकल में अपना करियर बनाएगा, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि नियति को कुछ और ही मंजूर था। उन्होंने कहा, "मेरा बेटा हर कदम पर सफल रहा है। उसका चयन वायुसेना, फिर इसरो और अब अंतरिक्ष मिशन के लिए हुआ है।"
शुभांशु शुक्ला के परिवार ने कहा- हमें बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा, ना ही हम घबराए हुए हैं
शुभांशु चार भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनके पिता ने कहा कि न तो वह और न ही परिवार में कोई भी इस मिशन को लेकर घबराया हुआ है। हमें बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा है। उन्होंने कहा, "हम नकारात्मक विचारों में नहीं पड़ते हैं, हम प्रार्थना करते हैं और बाकी सब भगवान पर छोड़ देते हैं।"
शुभांशु की मां आशा ने कहा कि ऐसे मिशनों के बारे में कभी-कभार नकारात्मक खबरों के बावजूद उन्हें भगवान पर पूरा भरोसा है। आशा ने अपने बेटे के बचपन को याद करते हुए कहा कि, ''वह आम बच्चों की तरह ही था, लेकिन पढ़ाई में बहुत अच्छा था। हमें पहले से ही अंदाजा था कि वह जीवन में कुछ बड़ा करेगा। वह बहुत शांत स्वभाव का है और चाहे कोई भी परिस्थिति हो, वह कभी भी अपना आपा नहीं खोता।''
शुभांशु शुक्ला की बहन ने क्या कहा?
शुभांशु की बहन सुचि शुक्ला ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा, "मेरे भाई ने हमें गर्व महसूस करने का एक और अवसर दिया है। यह बहुत अच्छा लगता है कि वह आने वाले कुछ दिनों में सचमुच नई ऊंचाइयों को छुएंगे।"
शुभांशु के चयन की खबर आने के बाद से ही उनके परिवार के शुभचिंतक लगातार फोन कर रहे हैं। सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सीएमएस) अलीगंज कैंपस I में भी जश्न मनाया गया, जहां शुभांशु ने 3 से 18 साल की उम्र तक पढ़ाई की और फिर नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) और बाद में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए।












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