Shubhanshu Shukla: ISS पर बड़ा प्रयोग, अंतरिक्ष में क्या खाएगा इंसान? शुभांशु शुक्ला के मिशन से मिलेगा जवाब
Shubhanshu Shukla: भारत आसमान में सफलता की एक और बड़ी छलांग दी है। भारत के भारतीय अंतरिक्ष यात्री व IAF के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने आज 25 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरी है। शुक्ला आईएसएस पर विशेष फूड और न्यूट्रिशन से जुड़े वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देंगे। लखनऊ (उत्तर प्रदेश) निवासी शुभांशु शुक्ला Axiom Mission-4 का हिस्सा हैं और इस मिशन में वह मिशन पायलट की भूमिका निभाएंगे।
उड़ान भरने से पहले शुभांशु शुक्ला ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि After 41 years, India's flag will fly in space again. Jai Hind। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के माता-पिता और रिश्तेदार, अमेरिका के फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से #Axiom4Mission के उड़ान भरने पर जश्न मनाते नजर आए। मिशन का संचालन भारत के IAF ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला कर रहे हैं।
ISRO और DBT के संयुक्त प्रयासों से तैयार वैज्ञानिक प्रयोगों को NASA का भी सहयोग प्राप्त है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, ये प्रयोग अंतरिक्ष में जीवन, पोषण और स्थायित्व की संभावनाओं को दर्शाते हैं।

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अंतरिक्ष में होंगे दो प्रमुख प्रयोग
1. माइक्रोएल्गी पर प्रयोग: अंतरिक्ष में तेज़ी से बढ़ने वाले, प्रोटीन युक्त माइक्रोएल्गी को उगाकर यह परखा जाएगा कि ये ऑक्सीजन उत्पादन और कार्बन डाइऑक्साइड सोखने में कितने कारगर हैं। इससे खाद्य और ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
2. स्पाइरुलीना और सायनोबैक्टीरिया पर प्रयोग: इन सूक्ष्म जीवों को अंतरिक्ष में मानव अपशिष्ट (जैसे यूरिया और नाइट्रेट) का उपयोग कर उगाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि स्पाइरुलीना को क्या अंतरिक्ष में एक सस्टेनेबल सुपरफूड के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
Shubhanshu Shukla Biography, family and career: शुभांशु शुक्ला की जीवनी, परिवार व करियर
भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रहने वाले हैं। उनका जन्म 10 अक्टूबर 1985 को लखनऊ में हुआ। उनके पिता शंभूदयाल शुक्ला वर्ष 2013 में सचिवालय से सेवानिवृत्त हुए, जबकि मां आशा शुक्ला गृहिणी हैं। शुभांशु की दो बहनें हैं-निधि शुक्ला और सुचि शुक्ला। उनकी पत्नी कामना शुक्ला पेशे से एक डेंटिस्ट हैं।

शुभांशु शुक्ला ने वर्ष 2006 में फाइटर पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया। उन्हें Su-30 MKI, MiG-21, और MiG-29 जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों को उड़ाने का अनुभव है। वे अब तक 2000 घंटे से अधिक की उड़ान भर चुके हैं। मार्च 2024 में उन्हें ग्रुप कैप्टन के पद पर पदोन्नत किया गया।
वह 8 जून 2025 से शुरू हो रहे अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी Axiom Space के मिशन Axiom-4 में मिशन पायलट के रूप में भाग ले रहे हैं। वर्तमान में वे 24 मई से क्वारंटीन में हैं और अमेरिका के फ्लोरिडा में अंतिम प्रशिक्षण व चिकित्सा परीक्षण में व्यस्त हैं।

Ax-4 मिशन के अन्य सदस्य
पेग्गी व्हिटसन (अमेरिका) - कमांडर, पूर्व NASA अंतरिक्ष यात्री
स्वावोश उज़नांस्की-विस्निएव्स्की (पोलैंड) - मिशन स्पेशलिस्ट
टिबोर कापू (हंगरी) - मिशन स्पेशलिस्ट
शुभांशु शुक्ला - मिशन पायलट (भारत)
बैकअप पायलट - प्रशांत बालकृष्णन नायर

ISRO-DBT की संयुक्त पहल
ISRO और DBT ने एक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group - JWG) का गठन किया है, जो स्पेस बायोटेक्नोलॉजी और बायोमैन्युफैक्चरिंग पर केंद्रित है। नई दिल्ली स्थित ICGEB और बेंगलुरु स्थित BRIC-inStem संस्थान इन प्रयोगों पर काम कर रहे हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि "भारत अब सिर्फ रॉकेट लॉन्चिंग तक सीमित नहीं, बल्कि यह तय कर रहा है कि अंतरिक्ष में इंसान कैसे जिएंगे, क्या खाएंगे और टिकाऊ जीवन कैसे बिताएंगे।"












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