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और खतरनाक होंगे इंडियन आर्मी के स्पेशल कमांडोज, मिलेंग नए ह‍थियार

सर्जिकल स्‍ट्राइक के बाद कमांडोज के लिए खतरनाक विदेशी हथियारों को खरीदने की प्रक्रिया शुरू करेगी सरकार। कमांडोज के लिए खरीदी जाएंगी स्‍नाइपर राइफल्‍स और हल्‍के रॉकेट लॉन्‍चर्स।

नई दिल्‍ली। इंडियन आर्मी के स्‍पेशल कमांडोज ने सितंबर 2016 में पीओके में हुई सर्जिकल स्‍ट्राइक में अपनी काबिलियत को साबित किया है। उनकी सफलता को देखने के बाद भारत सरकार अब उन्‍हें और खतरनाक बनाने की तैयारी में हैं। उनके लिए अब और ज्‍यादा खतरनाक हथियार खरीदे जाएंगे।

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कौन-कौन से हथियारों की खरीद

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक आर्मी की स्पेशल फोर्स के लिए रक्षा मंत्रालय चुनी हुई विदेशी कंपनियों को टेंडर जारी करेगी। इस टेंडर के तहत नई असॉल्‍ट राइफल, स्‍नाइपर राइफल्‍स, मशीन गन, हल्‍के रॉकेट लॉन्‍चर और शॉटगन, पिस्‍तौल और नाइट विजन डिवाइसेज खरीदने पर विचार हो रहा है। पिछले हफ्ते अमेरिकी, इजरायली, स्‍वीडिश और कुछ और विदेशी कंपनियों के लिए सात टेंडर्स जारी किए गए हैं। इनका मकसद तेजी से कमांडोज के लिए खास हथियार खरीदना है। यह टेंडर तब जारी किए गए हैं जब भारत ने आर्मी, नेवी और इंडियन एयरफोर्स के लिए करीब 20,000 करोड़ रुपए की ऐसी डील्‍स को मंजूरी दी है, जिसके तहत अचानक युद्ध होने की स्थिति में मदद करने वाले खास हथियारों को खरीदा जाएगा। ये वे हथियार होंगे जो सेनाओं को कम से कम 10 दिनों तक लड़ाई के लिए मजबूती प्रदान करेंगे।

पैरा स्‍पेशल कमांडोज की खासियतें

  • इंडियन आर्मी ने वर्ष 1966 में इसका गठन किया।
  • वर्ष 1965 में भारत -पाकिस्‍तान की जंग के समय उत्‍तर भारत से इंफेंट्री यूनिट्स के जवानों को गार्ड्स की ब्रिगेट के मेजर मेघ सिंह की अगुवाई में खास तौर पर भेजा गया।
  • इस ग्रुप की परफॉर्मेस को देखकर फैसला किया गया कि स्‍पेशल फोर्स का गठन अलग से किया जाएगा।
  • इसके बाद एक खास बटालियन का गठन हुआ लेकिन पैराट्रूपिंग को कमांडो रणनीति का आंतरिक हिस्‍सा रख गया।
  • इसके बाद इसे पैराशूट रेजीमेंट में ट्रांसफर कर दिया गया। जुलाई 1966 में पैराशूट रेजीमेट देश की पहली स्‍पेशल ऑपरेशन यूनिट बनी।
  • पैरा कमांडो को 30,000 फीट की ऊंचाई से छलांग लगाने से लेकर 15 दिन की कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है।
  • ट्रेनिंग का मकसद कमांडोज को शारीरिक और मानसिक तौर पर मजबूत बनाना होता है।
  • पैरा कमांडो के लिए उसका पैराशूट सबसे बड़ा हथियार होता है।
  • इसका वजन करीब 15 किलोग्राम होता और एक रिजर्व पैराशूट का वजन पांच किलोग्राम होता है।
  • इन पैराशूट की कीमत एक लाख से लेकर दो लाख तक होती है।
  • इन कमांडोज को रात में जागने की ट्रेनिंग से लेकर भूखे रहने तक की ट्रेनिंग दी जाती है।
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