फंड की कमी से जूझती सेना के ऑफिसर्स के टीए और डीए रुके, रक्षा मंत्रालय का दावा जल्द सुलझेगा मसला
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नई दिल्ली। इंडियन आर्मी इस समय फंड की कमी से जूझ रही है। आर्थिक तंगी की शिकार सेना ने आफिसर्स को दिए जाने वाले जरूरी भत्तों को कुछ समय के लिए रोक दिया है। सोमवार को सेना के अकाउंट डिविजन की वेबसाइट पर इस बात से जुड़ा एक नोटिस पब्लिश किया गया है। ये वे भत्ते हैं जो ऑफिसर्स को उस समय दिए जाते हैं वे टूर और ट्रेनिंग के लिए सफर करते हैं। हालांकि सेना की तरफ से इस नोटिस को कुछ ही समय बाद वापस ले लिया गया लेकिन इस पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ ऑफिसर्स ने अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा है कि इस तरह के नोटिस की कोई जरूरत ही नहीं थी और ऐसा करके सेना की एक खराब तस्वीर सामने लाने की कोशिश की गई है।

वेबसाइट पर लगा नोटिस
पुणे स्थित प्रिंसिपल कंपट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट्स (पीसीडीए) पर ऑफिसर्स की सैलरी और बाकी भत्तों के वितरण का जिम्मा है। पीसीडीए की वेबसाइट पर सोमवार को एक नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस में कहा गया था, 'अपर्याप्त फंड के चलते आर्मी ऑफिसर्स को दिए जाने वाले टीए यानी टेम्पोरेरी ड्यूटी और परमानेंट ड्यूटी के तहत दिए जाने वाले टीए और डीए की प्रक्रिया रोक दी गई है। लेकिन लीव ट्रैवेल कंसेसशन यानी एलटीसी जारी रहेगा।' माना जा रहा है कि सैंकड़ों ऑफिसर्स पर इसका असर पड़ेगा।

अक्सर सफर करते हैं ऑफिसर्स
सेना में इस समय 40,000 ऑफिसर्स हैं। कम से कम 1,000 ऑफिसर्स ऐसे हैं कोर्स, प्लानिंग कॉन्फ्रेंसेज, कोर्ट ऑफ इनक्वॉयरीज, एक्सरसाइज या फिर दूसरे जरूरी मसलों की वजह से अक्सर टेम्पोरेरी ड्यूटी या फिर टीए पर रहते हैं। हाल ही में पेश हुए अंतरिम बजट के बाद रक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि उसे अब तक का सबसे बड़ा आवंटन मिला है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष करीब सात प्रतिशत के करीब इजाफे के साथ उसे इस वर्ष आवंटन दिया गया है। इस खबर के आने के बाद रक्षा मंत्रालय की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई है।

एलटीसी पर कोई रोक नहीं
मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अगर एलटीसी में किसी ऑफिसर को कोई परेशानी होती है तो वह अपनी शिकायत साओ आफिसर के पास दर्ज करा सकते हैं। आर्मी ऑफिसर्स में अब इस कदम को लेकर खासा गुस्सा है। एक ऑफिसर की ओर से कहा गया है कि कई संवेदनशील मुद्दे जैस ऑपरेशनल प्लान और डेप्लॉयमेंट्स के बारे में फोन पर चर्चा नहीं की जा सकती है। ऑफिसर्स को हेडक्वार्टर्स पर बुलाया जाता है। ऐसे में ऑफिसर्स को हर पल मूवमेंट पर रहना पड़ता है। सेना के ऑफिसर्स को सैलरी और भत्तों में हर वर्ष 4,000 करोड़ रुपए की रकम खर्च होती है।

अब तक खर्च हुए 3200 करोड़ रुपए
एक सीनियर ऑफिसर की ओर से कहा गया है कि इस वर्ष करीब 3200 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इसके बाद 800 करोड़ रुपए का आवंटन होना बाकी है। वहीं रक्षा मंत्रालय की ओर से इस मुद्दे पर ज्यादा बात करने से इनकार कर दिया गया। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता की ओर से हिन्दुस्तान टाइम्स को जानकारी दी गई है कि कभी-कभी फंड की कमी हो जाती है। यह कमी कुछ ही समय के लिए होती है और इसका समाधान भी जल्द कर लिया जाता है।












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