सेना प्रमुख जनरल नरवाणे बोले-हमें मालूम है किसके कहने पर नेपाल कर रहा है विरोध, बिना नाम लिए चीन पर साधा निशाना
नई दिल्ली। भारत ने पिछले दिनों कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए लिपुलेख पास को खोलने का फैसला किया है। इस फैसले पर नेपाल में भारत के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इंडियन आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे ने अब इस प्रदर्शन के लिए अप्रत्यक्ष तौर पर चीन को जिम्मेदार ठहराया है। जनरल नरवाणे ने कहा है कि इस बात की वजह है कि हाल ही में नेपाल ने किसी और के उकसाने पर भारत का विरोध किया है।

पहले कभी नहीं हुई ऐसी समस्या
नेपाल की राष्ट्रपति बिदिया देवी भंडारी ने इस बात पर जोर दिया है कि लिपुलेख, लिमपियाधुरा और कालापानी, नेपाल का हिस्सा हैं और इसे वापस लेने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। भंडारी ने यह बात उस समय कही थी जब वह संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित कर रही थीं। राष्ट्रपति ने उस समय सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों को सदन के सामने रखा। इसी समय भंडारी ने कहा कि जल्द ही देश का एक नया राजनीतिक नक्शा आएगा जिसमें इन इलाकों को नेपाल की सीमा में दिखाया जाएगा। मनोहर पार्रिकर इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस में आयोजित एक वेबीनार में जनरल नरवाणे ने कहा, 'हकीकत में नेपाल के राजदूत ने कहा है कि काली नदी के पूर्व का इलाका उनकी सीमा में आता है। उस पर कोई भी विवाद नहीं है। जिस सड़क का निर्माण हो रहा है वह नदी के पश्चिम में है।' उन्होंने आगे कहा, 'मुझे नहीं मालूम कि वो किस बारे में विरोध कर रहे हैं। इस तरह का विरोध या ऐसी समस्याएं कभी सामने नहीं आई हैं।' जनरल नरवाणे ने इसके बाद एक सवाल के जवाब में कहा, 'इस बात पर यकीन करना होगा कि उन्होंने किसी के कहने पर यह मुद्दा उठाया हो और इस बात की संभावना काफी ज्यादा है।'












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