VIDEO: तपन बोस का शर्मनाक बयान, कहा- भारत-पाक की सेना एक जैसी, अपने लोगों को मारती हैं

नई दिल्‍ली। नागरिकता संशोधन कानून (CAA), राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) और राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर (NPR) के विरोध में जंतर मंतर पर प्रदर्शन जारी है। दिल्‍ली पुलिस ने प्रदर्शन वाले इलाके के आसपास धारा 144 लगाया है। इसी दौरान समाजिक कार्यकर्ता तपन बोस ने इंडियन आर्मी को लेकर विवादित बयान दिया है। तपन बोस ने कहा है कि पाकिस्‍तान कोई दुश्‍मन देश नहीं है। शासक वर्ग चाहे भारत का हो या पाकिस्तान का, एक जैसा है। हमारी सेना भी पाकिस्तानी सेना जैसी है। पाकिस्तानी सेना भी अपने लोगों को मारती है और हमारी सेना भी हमारे लोगों को मारती है। दोनों में कोई अंतर नहीं है।

VIDEO: तपन बोस का शर्मनाक बयान, कहा- भारत-पाक की सेना एक जैसी, अपने लोगों को मारती हैं

तपन बोस के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हैरानी की बात ये है कि तपन के इस शर्मनाक बयान पर वहां मौजूद लोग तालियां बजाकर उनकी बातों को ताकत दे रहे थे। बता दें कि मुस्लिम महिलाओं समेत भारी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे हैं। यहां नागरिकता संशोधन अधिनियम, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं शाहीन बाग में भी पिछले 1 महीने से ज्‍यादा समय से प्रदर्शन जारी है। इस दौरान कई विवादित बयान सामने आ चुके हैं। इन्हीं में से एक शरजील इमाम को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पटना (बिहार) से गिरफ्तार किया है।

शरजील को बुधवार को दिल्‍ली लाया गया है, जहां कोर्ट के समक्ष पेश कर पुलिस उसके रिमांड के लिए मांग कर सकती है। शरजील कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में देशद्रोह का मामला दर्ज किये जाने के बाद से फरार था। सोशल मीडिया पर उसके भड़काऊ भाषण का वीडियो वायरल होने के बाद उस पर मामला दर्ज किया गया था। वीडियो में उसे असम और पूर्वोत्तर को शेष भारत से काटने की बात करते सुना गया था। उसे वीडियो में कहते सुना गया, "अगर पांच लाख लोग संगठित हो जाएं तो हम पूर्वोत्तर और भारत को स्थाई तौर पर काट सकते हैं। अगर ऐसा नहीं तो कम से कम एक महीने या आधे महीने के लिए ही सही। रेल पटरियों और सड़कों पर इतना मलबा डाल दो कि वायु सेना को इसे साफ करने में एक महीना लग जाए।" शरजील वीडियो में कह रहा है, "असम को (शेष भारत से) काटना हमारी जिम्मेदारी है, तभी वे (सरकार) हमारी बात सुनेंगे। हम असम में मुसलमानों की स्थिति जानते हैं। उन्हें डिटेंशन कैंपों में रखा जा रहा है।"

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