गर्मी से पहले लगेगा पाकिस्तान को झटका! भारत बंद करेगा रावी नदी का ‘वॉटर टैप’, क्या बदलने वाला है पूरा खेल?
India Ravi River Pakistan: भारत और पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर नया मोड़ सामने आया है। इस बार मामला सिर्फ बयानबाजी का नहीं, बल्कि जमीन पर तैयार हो रहे एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का है।
मार्च के अंत तक शाहपुर कंडी बैराज पूरा होते ही रावी नदी का वह अतिरिक्त पानी, जो अब तक पाकिस्तान पहुंच जाता था, भारत रोक लेगा। ऐसे समय में जब पाकिस्तान पहले से ही सिंधु जल संधि के निलंबन से परेशान है, यह कदम उसके लिए और मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

क्या है रावी का पानी रोकने की योजना? (Ravi River Water Block Plan)
जम्मू कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राणा ने साफ कहा है कि अब अतिरिक्त पानी पाकिस्तान नहीं जाएगा। उनका कहना है कि यह पानी सूखा प्रभावित कठुआ और सांबा जिलों की सिंचाई के लिए इस्तेमाल होगा। अब तक भारत के पास पर्याप्त स्टोरेज व्यवस्था नहीं होने से रावी का अतिरिक्त पानी माधोपुर के रास्ते पाकिस्तान चला जाता था। शाहपुर कंडी बैराज के पूरा होते ही यह स्थिति बदल जाएगी।
शाहपुर कंडी बैराज आखिर है क्या? (Shahpur Kandi Barrage Project)
यह परियोजना करीब 46 साल पुरानी है। इसकी परिकल्पना 1979 में की गई थी। 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसकी आधारशिला रखी थी और 1988 तक पूरा करने का लक्ष्य था। रणजीत सागर डैम 2001 में बन गया, लेकिन नीचे की ओर बनने वाला शाहपुर कंडी बैराज पंजाब और जम्मू कश्मीर के बीच विवाद के कारण अटका रहा।
2008 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया। 2013 में काम शुरू हुआ, फिर विवाद से रुक गया। दिसंबर 2018 में नरेंद्र मोदी सरकार के हस्तक्षेप और 485 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के बाद काम ने रफ्तार पकड़ी। अब 31 मार्च 2026 तक इसके पूरा होने की उम्मीद है।
भारत को क्या फायदा होगा?
अप्रैल से यह परियोजना 32 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन की सिंचाई में मदद करेगी। पंजाब में भी 5 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को लाभ मिलेगा। सूखा प्रभावित इलाकों के लिए यह बड़ी राहत मानी जा रही है। साथ ही पानी का बेहतर प्रबंधन और भंडारण संभव होगा।
क्या यह सिंधु जल संधि के दायरे में आता है? (Indus Waters Treaty Impact)
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि के तहत भारत को पूर्वी नदियों सुतलज, ब्यास और रावी के पानी पर पूरा अधिकार दिया गया था, जबकि पश्चिमी नदियां सिंधु, झेलम और चिनाब पाकिस्तान के हिस्से में गईं। शाहपुर कंडी बैराज रावी पर है, इसलिए यह संधि के उल्लंघन की श्रेणी में नहीं आता।
हालांकि, पिछले सालों में पूर्वी नदियों का अतिरिक्त पानी भी पाकिस्तान तक पहुंचता रहा था। अब भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपने हिस्से का पूरा उपयोग करेगा।
पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा? (Impact on Pakistan Agriculture)
पाकिस्तान की करीब 80 प्रतिशत कृषि भूमि सिंधु नदी तंत्र पर निर्भर है। कृषि उसके जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा है। ऐसे में पानी के प्रवाह में कमी फसल उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर असर डाल सकती है। लाहौर और मुल्तान जैसे बड़े शहर भी इसी नदी प्रणाली से पानी लेते हैं। ऐसे में गर्मियों से पहले पानी का कम होना उसके लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
भारत चिनाब नदी को लेकर भी कर रहा बड़ा प्लान!
भारत ने चिनाब नदी पर कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी तेज कर दिया है, जो 2027-28 तक पूरी होने की संभावना है। इसके अलावा झेलम पर वुलर बैराज का काम भी फिर शुरू करने की तैयारी है, जो 2012 में आतंकी हमले के बाद रुक गया था।
पाकिस्तान ने इस मसले को हेग स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन तक ले जाने की कोशिश की है और 'पानी के हथियारकरण' का आरोप लगाया है, लेकिन भारत ने इन कार्यवाहियों को मान्यता देने से इनकार कर दिया है।
पहलागाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था और अब नदी जल प्रबंधन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार का संदेश साफ है कि अपने हिस्से का पानी अब किसी भी हाल में बेकार नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।
शाहपुर कंडी बैराज का पूरा होना सिर्फ एक बांध का निर्माण नहीं, बल्कि जल नीति में बड़े बदलाव का संकेत है। इससे भारत को अपने जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का मौका मिलेगा, जबकि पाकिस्तान के लिए यह चुनौतीपूर्ण दौर की शुरुआत हो सकती है। आने वाले महीनों में यह मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों में नई बहस और नई दिशा तय कर सकता है।












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