India-China: गलवान नदी घाटी पर तैनात भारतीय सैनिकों को मिलेगी खास वॉटरप्रूफ यूनिफॉर्म

नई दिल्‍ली। गलवान नदी में लगातार पानी का स्‍तर बढ़ता जा रहा है और अब यहां पर तैनात सुरक्षाबलों को विशेष प्रकार के वॉटरप्रूफ कपड़ों की जरूरत महसूस होने लगी है। न्‍यूज एजेंसी एएनआई की तरफ से बताया गया है कि भारत सरकार जल्‍द ही यहां पर तैनात सैनिकों को चीन के साथ जारी टकराव के बीच ही खास प्रकार के कपड़े मुहैया करा सकती है। यह कपड़े सैनिकों को हाइपोथरमिया जैसी बीमारी से बचा सकेंगे। भारत और चीन के बीच जारी टकराव के जल्‍द ही दो माह पूरे होने वाले हैं। पांच मई से ही लद्दाख में दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं।

पूरी तैयारी के साथ आई चीनी सेना

पूरी तैयारी के साथ आई चीनी सेना

माना जा रहा है कि चीन की सेना जवानों की तैनाती के लिए पूरी तरह से तैयार है। पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के जो जवान गलवान नदी घाटी में तैनात हैं उनके पास वॉटरप्रूफ कपड़े हैं। इन कपड़ों की वजह से वो बर्फ जैसे गलवान नदी के पानी में भी आसानी से उतर जाते हैं। सूत्रों की ओर से बताया गया है कि जो भारतीय जवान गलवान नदी के पास तैनात हैं, उनके लिए खास कपड़ों की जरूरत है। पानी बहुत ठंडा है और अब तापमान बढ़ने के साथ इसके स्‍तर में खासा इजाफा हो रहा है। चीनी सेना ने गलवान नदी के किनारे अपने कैंप्‍स भी लगा लिए हैं और ये कैंप्‍स भारतीय सीमा में स्थित पेट्रोलिंग प्‍वाइंट्स (पीपी) 14 तक मौजूद हैं।

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    काश! 15 जून को भी होती ऐसी ही यूनिफॉर्म

    काश! 15 जून को भी होती ऐसी ही यूनिफॉर्म

    इन सभी चीनी जवानों के पास जो कॉम्‍बेट यूनिफॉर्म है, वह पूरी तरह से वॉटर प्रूफ है। ऐसे में चीनी जवान गलवान नदी के पानी में भी आसानी से उतर जाते हैं। गलवान नदी अक्‍साई चिन से निकलती है और लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) से गुजरती हुई पीपी 14 के पास श्‍योक नदी में मिल जाती है। इस इलाके में गश्‍त करते समय यानी केएम-120 पोस्‍ट से पीपी 14 तक गश्‍त करते हुए भारतीय जवानों को नदी में उतरना पड़ता है। इसकी वजह से उनके जूते गीले हो जाते हैं। सूत्रों की ओर से बताया गया है कि अगर 15 जून को चीनी जवानों की ही तरह भारतीय जवानों के पास भी वॉटर प्रूफ कॉम्‍बेट यूनिफॉर्म होती तो शायद कई सैनिकों की मृत्‍यु हाइपोथरमिया की वजह से नहीं होती है।

    लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक आक्रामक चीनी

    लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक आक्रामक चीनी

    हाइपोथरमिया में फेफड़ों में पानी भर जाता है। भारत भी अब चीन के साथ लंबे समय तक संघर्ष के लिए तैयार हो रहा है। एलएसी यानी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक चीनी सेना ने भारी तैनाती कर रखी है। अभी तक चीन की तरफ से ऐसा कोई इशारा नहीं मिला है जिससे लगे कि आक्रामकता में कमी आ रही हो। कई दौर की बातचीत के बाद भी चीन के रूख में कोई नरमी नहीं आ रही है।

    टकराव को होने वाले हैं दो माह

    टकराव को होने वाले हैं दो माह

    चीन और भारत के बीच पूर्वी लद्दाख में पांच मई से टकराव जारी है। चीनी सेना एलएसी के कई बिंदुओकं जैसे फिंगर एरिया, गलवान घाटी, दौलत बेग ओल्‍डी सेक्‍टर (डीबीओ) पीपी 15, हॉट स्प्रिंग्‍स एरिया और घोघरा पोस्‍ट पर जमी हुई है। चीनी सेना लगातार अपनी स्थिति के मजबूत कर रही है। साथ ही जवानों की संख्‍या में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। मंगलवार को भी भारत और चीन के बीच टकराव को टालने के लिए लेह के चुशुल में कोर कमांडर स्‍तर की वार्ता हुई है।

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