मोदी सरकार ने अमेरिका को दिया साफ जवाब, पाकिस्तान और कश्मीर पर कोई तीसरा मंजूर नहीं
भारत ने अमेरिका को दिया साफ-साफ जवाब, पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर सरकार की स्थिति नहीं बदली है। आतंक और हिंसा के माहौल में नहीं हो सकती पाकिस्तान से बात और अमेरिका के रोल को किया खारिज।
नई दिल्ली। भारत ने अमेरिका को दो टूक जवाब दे दिया है कि उसे पाकिस्तान के संबंधों और कश्मीर पर किसी भी तरह की मध्यस्थता मंजूर नहीं है। भारत की ओर से यह बयान संयुक्त राष्ट्रसंघ (यूएन) में अमेरिका की राजदूत निकी हेले की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया के लिए अमेरिका मध्यस्थता करने को तैयार है और साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रोल की बात भी कही थी।

नहीं बदली है भारत सरकार की नीति
मंगलवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने भारत के रुख को सबके सामने साफ कर दिया। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान के साथ सभी द्विपक्षीय मुद्दों पर सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत सरकार यह मानती है कि पाकिस्तान के साथ सभी विवादों का समाधान बिना किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के द्विपक्षीय बातचीत से होनी चाहिए।' यह पहला मौका नहीं है जब भारत ने कश्मीर समेत पाकिस्तान के साथ सभी विवादित मुद्दों पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इंकार किया है। इससे पहले भी भारत साफ कर चुका है कि उसे दोनों देशों के बीच किसी भी तीसरे पक्ष की संलिप्तता मंजूर नहीं है। अमेरिका हमेशा से ही दोनों देशों के बीच एक स्थिर कारक रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा मानते थे कि भारत-पाकिस्तान के बीच मित्रता अफगानिस्तान के लिए भी फायदेमंद रहेगी।
क्या सोचते थे ओबामा
ओबामा तो अफगानिस्तान-पाकिस्तान समेत भारत के लिए भी एक विशेष प्रतिनिधि तक पर विचार करने लगे थे। ओबामा ने राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद कहा था कि परमाणु हथियारों से लैस दोनों देशों के बीच तनाव करने के लिए खासतौर पर तब जब तनाव और बढ़ने की कगार पर है तो अमेरिका को भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए ही और तथ्यात्मक कूटनीति की जरूरत होगी। यह बात उन्होंने अपनी अफगानिस्तान-पाकिस्तान नीति के समय कही थी। निकी ने कहा था कि अमेरिका, भारत और पाकिस्तान के बीच किसी तरह की घटना का इंतजार नहीं करेगा। उनका कहना था कि अमेरिका दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर काफी चिंतित है और ऐसे में किसी भी विवाद को आगे बढ़ने से रोकने के लिए अमेरिका किसी भी तरह की भूमिका निभा सकता है। निकी के मुताबिक अमेरिका का मानना है कि उसे एक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ रहा है लेकिन अमेरिका यह देखेगा कि वह किस तरह से शांति प्रक्रिया का हिस्सा बन सकता है।












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