पीओके में बांध बनाने पर भारत ने जताया कड़ा एतराज, कहा- इस क्षेत्र पर पाक का अवैध कब्जा
नई दिल्ली। भारत ने पीओके में पाकिस्तान के बांध बनाने के प्रोजक्ट पर कड़ा एतराज जताया है। एक तरफ भारत ने इसे पीओके में स्थिति को बदलने की कोशिश बताया है तो वहीं लद्दाख और कश्मीर में इससे बाढ़ का खतरा भी हो जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर पीओके में डायमर बाशा बांध बना रहा है। हम उसके इस कदम का कड़ा विरोध करते हैं। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र में ऐसी परियोजनाएं शुरू किया जाना ठीक नहीं है।

विदेश मंत्रालय प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, पाक ने भारत के हिस्से पर जबरन कब्जा किया हुआ है, ऐसे में वहां बदलाव करना बिल्कुल भी सही नहीं है। बांध के जरिए क्षेत्र में बदलाव किया जा रहा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में इस तरह के प्रोजेक्ट का भारत ने विरोध किया है। भारत का कहना है कि यह इलाका उसके राज्य जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है।
पाक और चीन मिलकर गिलगिट-बाल्टिस्तान इलाके में डायमर बाशा बांध का निर्माण शुरू किया है। बुधवार को ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस इलाके का दौरा किया। इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान के इतिहास का ये सबसे बड़ा बांध होगा। पाक पीएम ने कहा, बांध को बनाने का फैसला 50 साल पहले लिया गया था। बांध बनाने के लिए इससे बेहतर जगह नहीं हो सकती है। यह एक प्राकृतिक बांध है। इस बांध पर 40 से 50 साल पहले फैसला लिया गया था लेकिन काम आज शुरू हो रहा है। यह उन बड़े कारणों में से एक है जिसकी वजह से हमारा विकास नहीं हुआ।
बुधवार को ही पाकिस्तान की सरकार ने चीन की सरकारी कंपनी (चाइना पावर) और पाकिस्तानी सेना की बांध निर्माण से संबंधित कंपनी (फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाईजेशन-एफडबल्यूओ) के बीच 5.8 अरब डॉलर के करार पर हस्ताक्षर किए हैं। इस में बांध को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियांग ने कहा है कि कश्मीर मुद्दे पर चीन का रुख साफ है। चीन और पाकिस्तान आर्थिक विकास को बढ़ाने और स्थानीय आबादी को बेहतर बनाने के लिए आर्थिक सहयोग कर रहे हैं।












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