कोविड-19: गरीबों की मदद के लिए भारत ने विश्व बैंक के साथ किया 400 मिलियन डॉलर का समझौता
नई दिल्ली: कोरोना वायरस संकट के बीच गरीब और कमजोर वर्ग की मदद के लिए भारत ने बुधवार को विश्व बैंक के साथ 400 मिलियन डॉलर का समझौता किया। ये समझौता दो पार्ट में हो रहा है। इसका पहला पार्ट मई में साइन किया गया था, जिसमें 750 मिलियन डॉलर की मदद की बात विश्वबैंक ने कही थी। अब 400 मिलियन डॉलर का क्रेडिट विश्व बैंक की रियायती ऋण शाखा इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (आईडीए) ने बढ़ाया है।

सरकार के मुताबिक ये समझौता भारत में राज्य और राष्ट्रीय क्षमता को मजबूत करेगा। साथ ही कोरोना महामारी से गरीब और कमजोर लोगों के लिए उत्पन्न समस्या का निस्तारण कर उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगा। इसके अलावा भारत भविष्य में प्रकृतिक आपदाओं के लिए तैयारियां मजबूत करेगा, ताकी प्रवासी और शहरी गरीबों के सामने आने वाले जोखिमों को कम किया जा सके। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर में शहरों में संवेदनशील समूहों की मदद करके भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों के कवरेज को और अधिक बढ़ना है।
इस समझौते के पहले भाग को घरेलू सर्वेक्षणों के माध्यम से भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली की शक्तियों और चुनौतियों का अध्ययन करके बनाया गया, जबकि दूसरा भाग गरीब परिवारों, शहरी प्रवासियों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। विश्व बैंक के साथ हुए इस समझौते में भारत सरकार ने स्वीकार किया कि कोविड-19 के मामलों का एक बड़ा हिस्सा शहरी और पेरी शहरी क्षेत्रों से उभरा है। इस कार्यक्रम में एशियाई विकास बैंक (एडीबी), एग्नेस फ्रांसेइस डी डेवेलपमेंट (एएफडी) और क्रिडेन्स्टाल्ट फर विडेरफ्यूबाऊ (केएफडब्ल्यू) की भी मदद ली गई है।












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