हुर्रियत नेता को न्योता देने पर भारत का OIC को दो टूक, कहा- भारत विरोधी ताकतों को न दें बढ़ावा
विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को कहा कि भारत को इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) से आतंकवाद में लिप्त नेताओं और संगठनों को प्रोत्साहित करने की उम्मीद नहीं है।
नई दिल्ली, 20 मार्च। विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को कहा कि भारत को इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) से आतंकवाद में लिप्त नेताओं और संगठनों को प्रोत्साहित करने की उम्मीद नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष को ओआईसी द्वारा अपनी एक बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिए जाने के एक सवाल के जवाब में यह बयान दिया। दरअसल ओआईसी ने ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष को 22 मार्च और 23 मार्च को इस्लामाबाद में अपने विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।

गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत सरकार ऐसी कार्रवाइयों को बहुत गंभीरता से लेती है, जिसका उद्देश्य सीधे तौर पर भारत की एकता को खत्म करना और हमारी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करना है। बागची ने कहा, 'हम ओआईसी से आतंकवाद और भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों और संगठनों को प्रोत्साहित करने की उम्मीद नहीं करते हैं।'
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पाकिस्तान का नाम लिए बगैर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ओआईसी अन्य महत्वपूर्ण विकास गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय एकल सदस्य के राजनीतिक एजेंडे द्वारा निर्देशित है। उन्होंने कहा कि हमने बार-बार ओआईसी से भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणियों के लिए निहित स्वार्थों को इस मंच का फायदा उठाने की अनुमति देने से परहेज करने का आह्वान किया है।
गौरतलब है कि सर्वदलीय हुर्रियत सम्मेलन (APHC) का गठन 1992 में किया गया था और मीरवाइज उमर फारूक इसके पहले अध्यक्ष थे। इसका संविधान हुर्रियत को कश्मीर विवाद के समाधान के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष करने के लिए जम्मू-कश्मीर-आधारित पार्टियों के एक संघ के रूप में वर्णित करता है।












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