India Pakistan Nuclear War Risk: क्या ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत पाकिस्तान में बढ़ सकता परमाणु हमले का खतरा?
India Pakistan Nuclear War Risk: भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में 7 मई को भारत ने ऑपरेशन 'सिंदूर' के तहत पाकिस्तान व पीओके में घुसकर आतंकियों के ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की। 8 मई को पाकिस्तान की ओर से भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की नाकाम कोशिश भी की गई, जिसका मुंहतोड़ जवाब देते हुए भारतीय सेना ने लाहौर के पास पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम तबाह कर दिया। इन घटनाओं ने क्षेत्र में गहरी चिंता पैदा कर दी है, खासकर तब जब दोनों देश परमाणु हथियारों से लैस हैं।
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विशेषज्ञों की मानें तो भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की तत्काल संभावना कम है, लेकिन तनाव जितना लंबा खिंचेगा, जोखिम उतना ही बढ़ता जाएगा। भारत की "No First Use" नीति यानी "पहले परमाणु हमला नहीं" की रणनीति अभी भी प्रभावी है, लेकिन पाकिस्तान ने कभी यह स्पष्ट नीति अपनाई नहीं है। ऐसे में यदि पाकिस्तान को अपने अस्तित्व पर खतरा महसूस हुआ तो वह परमाणु विकल्प की ओर रुख कर सकता है।

परमाणु हमले के खतरे पर क्या कहते हैं रक्षा विशेषज्ञ?
पाकिस्तान परमाणु हमले की धमकी अक्सर देता रहता है। न्यूज एजेंसी एएनआई को पूर्व में दिए एक साक्षात्कार में रक्षा विशेषज्ञ व भारतीय सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी मेजर जनरल जीडी बख्शी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि 'परमाणु हमले की धमकी दे देना बहुत आसान है। करना बहुत मुश्किल है। यह कोई ऐसी बात नहीं है कि सिर्फ पाकिस्तान के पास ही परमाणु हथियार हैं और भारत के पास नहीं है। जैसे जापान के पास कुछ नहीं था तो अमेरिका ने दो परमाणु बम दाग दिए थे। अब कोई इनका इस्तेमाल करेगा तो परिणाम भुगतेगा।'
भारत की परमाणु नीति क्या है?
भारत ने स्पष्ट रूप से घोषित किया है कि "भारत कभी भी परमाणु हथियारों का पहला प्रयोग नहीं करेगा, लेकिन अगर उस पर परमाणु हमला होता है तो वह पूरा जवाब देगा - निर्णायक और भारी प्रतिक्रिया के साथ।" यह नीति भारत ने 1998 में परमाणु परीक्षणों (पोखरण-II) के बाद घोषित की थी। कुछ सैन्य विश्लेषक और राजनेता समय-समय पर कहते रहे हैं कि भारत को "पहले हमला न करने" की नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए, खासकर पाकिस्तान या चीन के संदर्भ में। लेकिन आधिकारिक तौर पर, भारत आज भी NFU नीति पर कायम है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2019 में कहा था कि "No First Use नीति भारत की अब तक की नीति रही है, लेकिन भविष्य में क्या होगा, यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।" यानी थोड़ी लचीलापन की संभावना हो सकती है, लेकिन फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है।
परमाणु हमला क्या होता है?
दरअसल, परमाणु हमला (Nuclear Attack) एक ऐसा सैन्य हमला होता है, जिसमें परमाणु हथियार (nuclear weapons) का इस्तेमाल किया जाता है। यह हमला अत्यंत विनाशकारी होता है, क्योंकि परमाणु बम में इतनी ताकत होती है कि वह कुछ ही पलों में एक पूरे शहर को तबाह कर सकता है। एक तरह से परमाणु हमला वह स्थिति होती है जब एक देश या संगठन, दुश्मन देश या क्षेत्र पर परमाणु बम (atomic bomb/hydrogen bomb) गिराता है। इसका उद्देश्य आमतौर पर दुश्मन के सैन्य, औद्योगिक या नागरिक ठिकानों को पूरी तरह से नष्ट करना होता है।
परमाणु बम का निर्माण: परमाणु बम यूरेनियम-235 या प्लूटोनियम-239 जैसे रेडियोधर्मी तत्वों से बनाए जाते हैं। इनमें नाभिकीय विखंडन (nuclear fission) या संलयन (fusion) की प्रक्रिया होती है, जिससे अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है।
प्रक्षेपण (Launch): बम को मिसाइल, बमवर्षक विमान, पनडुब्बी या हथियारबंद ड्रोन से दागा जा सकता है। कुछ मिसाइलें अंतरमहाद्वीपीय (ICBM) होती हैं, जो हजारों किलोमीटर दूर तक निशाना साध सकती हैं।
विस्फोट (Explosion): परमाणु बम विस्फोट के दौरान, कुछ ही क्षणों में भयंकर गर्मी उत्पन्न होती है (सूर्य के केंद्र जितनी यानी 10 लाख डिग्री सेल्सियस तक)। झटकों की लहरें (blast waves) सबकुछ नष्ट कर देती हैं। घातक विकिरण (radiation) फैलती है, जिससे लोग गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। विस्फोट के बाद वातावरण में रेडियोधर्मी तत्व फैल जाते हैं। ये हफ्तों या महीनों तक ज़मीन और हवा को जहरीला बना सकते हैं। इससे कैंसर, आनुवंशिक रोग, और पर्यावरणीय तबाही होती है।
परमाणु इतिहास में कब-कहां हमले हुए?
द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण में अमेरिका चाहता था कि जापान बिना शर्त आत्मसमर्पण करे। जापान जिद पर अड़ा था और आत्मसमर्पण के संकेत नहीं दे रहा था। अमेरिका ने सोचा कि परमाणु बम का प्रयोग जापान को तेजी से युद्ध समाप्त करने के लिए मजबूर कर देगा। साथ ही, अमेरिका सोवियत संघ को अपनी सैन्य ताकत दिखाना चाहता था क्योंकि शीत युद्ध की पृष्ठभूमि बनने लगी थी।
अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर 6 अगस्त 1945 और नागासाकी पर 9 अगस्त 1945 को परमाणु बम गिरा दिए थे। हिरोशिमा में करीब 70,000 से 80,000 लोग तुरंत मारे गए थे, और यह संख्या बढ़कर साल के अंत तक लगभग 1,40,000 तक पहुंच गई। नागासाकी में करीब 40,000 लोग तुरंत मारे गए थे और साल के अंत तक यह आंकड़ा 74,000 तक पहुंच गया। लाखों लोग घायल हुए और दीर्घकालिक बीमारियों के शिकार बने।
परमाणु हमले के दुष्परिणाम क्या होते हैं?
हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु हमलों में न केवल लोग तत्काल बेमौत मारे गए बल्कि कई लोग कैंसर, ल्यूकीमिया, और अन्य गंभीर रोगों से पीड़ित भी हो गए। गर्भवती महिलाओं के बच्चों में जन्म दोष और मानसिक विकलांगता देखी गई। इसके अलावा शहर पूरी तरह से तबाह हो गए, पेड़-पौधे, जीव-जंतु सब नष्ट हो गए। रेडियोधर्मी विकिरण ने भूमि को लंबे समय तक विषैला बना दिया। इन बम धमाकों ने दुनिया को पहली बार परमाणु हथियारों की भयावहता दिखाई।
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