IIM-B में खुले इंडिया-जापान स्टडी सेंटर को जापानी राजदूत ने सराहा
भारत में जापान के राजदूत H.E. Kenji Hiramatsu और बंगलुरू में जापान के काउंस जनरल Takayuki Kitagawa ने IIM-B में हाल ही में खुल इंडिया-जापानी स्टडी सेंटर का दौरा किया।
बंगलुरू। भारत में जापान के राजदूत H.E. Kenji Hiramatsu और बंगलुरू में जापान के काउंस जनरल Takayuki Kitagawa ने इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, बंगलुरू (IIM-B) में हाल ही में खुल इंडिया-जापानी स्टडी सेंटर का दौरा किया। दोनों ने वहां की फैकल्टी से काफी देर बातचीत भी की। आईआईएम में 14 सितंबर को इंडिया-जापानी स्टडी सेंटर का उद्घाटन किया गया था। इस दिन जब दोनों देशों के पीएम अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की शिलान्यास रख रहे थे, तभी बंगलुरू में भी दोनों देशों के बीच शैक्षणिक रिश्ते मजबूत हो रहे थे।
इस सेंटर का उद्देश्य दोनों देशों के सहयोग से रिसर्च और शिक्षण को बढ़वा देना है। राजदूत Kenji Hiramatsu ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा, 'इस सेंटर को स्थापित करने का ये बहुत सही समय है, खासकर तब जब व्यापार और निवेश में दोनों देशों के रिश्ते इतिहास में सबसे अच्छे रूप में हों। इस स्टडी सेंटर को हमारा पूरा सपोर्ट है।' उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि फैकल्टी यहां जापानी भाषा भी सिखाए। 'आईआईएम के साथ आगे काम करना एक सौभाग्य होगा। ये एक ऐसी जगह है जहां बच्चों को ग्लोबल लेवल की सर्वश्रेष्ठ ट्रेनिंग मिलती है।'
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Kenji Hiramatsu ने आगे कहा कि बंगलुरू जापान के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां कई जापानी कंपनियां हैं। 'ये एक ग्लोबल स्टार्ट-अप और बौद्धिक शहर है। मैं चाहूंगा कि दिसंबर तक यहां और जापानी कंपनियां आएं। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि आईआईएम बंगलुरू जाापन के साथ काफी अच्छा काम कर रहा है और हमें आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा रिसर्च प्रोग्राम पर काम करना चाहिए।'
'जापान के सहयोग से मिलेगी मदद'
इंडिया-जापान स्टडी सेंटर के अध्यक्ष प्रोफेसर कृषणा सुंदर ने जापानी राजदूत को सेंटर और टीम के बारे में विस्तार से बताया। आईआईएम बंगलुरू ने जापान की शीर्ष छह यूनिवर्सिटीज के साथ पार्टनरशिप की है। प्रोफेसर ने बताया कि जापानी यूनिवर्सिटीज, सरकारी एजेंसी और इंडस्ट्री के सहयोग से निश्चित रूप से व्यापार और रिसर्च को बढ़ाने में मदद मिलेगी। यही आईआईएम-बी में इंडिया-जापान स्टडी सेंटर का उद्देश्य है।
जापानी प्रतिनिधिमंडल ने ट्रेनिंग प्रोग्राम और स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम के बारे में भी जानकारी ली। प्रोफेसर ने आगे बताया कि इंस्टीट्यूट में उन छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है जो कंट्री-स्पेसिफिक प्रोग्राम में जापान को चुनते हैं। पिछले दो सालों में एमबीए प्रोग्राम में ये संख्या 30 से 60 हो गई है। भाषा प्रशिक्षण के बारे में प्रोफेसर ने कहा कि इंस्टीट्यूट पिछले 15 सालों से जापानी भाषा को वैकल्पिक रूप में पेश कर रहा है, लेकिन स्टडी सेंटर के बाद इसे परमानेंट होने में मदद मिलेगी।












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