भारत में महिला पुलिस बल सिर्फ 10.5 फीसदी, कई राज्यों में 5% भी महिला अधिकारी नहीं: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 08 जुलाई। देश में कानून व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से पुलिसबल पर होती है। पिछले 10 साल की बात करें तो देश की पुलिस पहले की तुलना में काफी सशक्त हुई है, तकरीबन 32 फीसदी पुलिसकर्मियों की पिछले 10 साल (2010-2020) में बढ़ोत्तरी भी हुई है। लेकिन इन सब के बीच कई ऐसे आंकड़े सामने आए हैं जो गंभीर सवाल खड़े करते हैं। दरअसल एक तरफ जहां पिछले 10 साल में तकरीबन 32 फीसदी पुलिसकर्मियों की बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन देशभर में कुल पुलिसकर्मियों में सिर्फ 10.5 फीसदी महिलाओं का ही प्रतिनिधित्व है। इसके साथ ही एक और बड़ी जानकारी यह सामने आई है कि देश में 3 में से सिर्फ एक पुलिस स्टेशन में ही सीसीटीवी कैमरा लगा है।

महिला हेल्प डेस्क तक नहीं
इंडिया जस्टिस रिपोर्ट की ओर से जो आंकड़े जारी किए गए हैं उसके अनुसार 41 फीसदी पुलिस थानों में महिलाओं की मदद के लिए एक भी हेल्प डेस्क नहीं है। बता दें कि इंडिया जस्टिस रिपोर्ट को कई संगठनों ने मिलकर तैयार किया है जोकि न्याय क्षेत्र में सुधार के लिए काम करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार त्रिपुरा इकलौता राज्य है जहां पर सभी पुलिस थानों में हेल्प डेस्क है, वहीं अरुणाचल प्रदेश में एक भी थाने पर हेल्प डेस्क नहीं है। वहीं 9 राज्य व केंद्र शासित प्रदेश की बात करें तो यहां 90 फीसदी पुलिस स्टेशन में महिलाओं के लिए हेल्प डेस्क नहीं है, जोकि महिलाओं को न्याय दिलाने के दावे पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।

कितनी होनी चाहिए भागीदारी
पुलिस अनुसंधान व विकास ब्यूरो ने 2021 में जो रिपोर्ट जारी की थी उसमे कहा गया था कि पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ 10.5 फीसदी है। 3.3 फीसदी से 10.5 फीसदी तक के लक्ष्य को हासिल करने में 15 साल का समय लगा है। देश के छह केंद्र शासित और 11 राज्यों की बात करें तो यहां महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण है। बिहार में 38 फीसदी, अरुणाचल, त्रिपुरा और मेघालय में महिलाओं को पुलिस बल में 10 फीसदी ही आरक्षण प्राप्त है। 7 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं को पुलिस बल में महिलाओं को कोई आरक्षण नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार 2020 कई राज्य अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सके हैं।

अलग-अलग राज्यों का हाल
गौर करने वाली बात है कि तीन राज्यों में पुलिस बल में सबसे अधिक भागीदारी है लेकिन ये राज्य भी अपने निर्धारित लक्ष्य से काफी दूर है। तमिलनाडु, बिहार, गुजरात में महिलाओं की पुलिस बल में भागीदारी 10.4, 17.4, 16 फीसदी है। इन राज्यों का लक्ष्य 30,38, 33 फीसदी था, जिसे ये हासिल नहीं कर सके हैं। चंडीगढ़ की बात करें तो यहां 22.1 फीसदी महिलाओं की पुलिस बल में भागीदारी है। सबसे कम महिलाओं की भागीदारी अरुणाचल प्रदेश में है, जहां सिर्फ 6.3 फीसदी महिलाएं ही पुलिस बल में हैं, जबकि झारखंड व मध्य प्रदेश में सिर्फ 6.6 फीसदी महिलाएं पुलिस बल में हैं।

राज्यों में घटी भागीदारी
बिहार में 2019 में महिलाओं की भागीदारी 25.3 फीसदी थी, जो घटकर 2020 में 17.4 फीसदी हो गई है। हिमाचल प्रदेश में 2019 में महिलाओं की भागीदारी 19.2 फीसदी थी जोकि 2020 में 13.5 फीसदी हो गई। आईजेआर ने अपने निष्कर्ष में कहा है कि पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी के 33 फीसदी के लक्ष्य को हासिल करने में अबी इस रफ्तार से 33 साल लग जाएंगे। वहीं ओडिशा में इस लक्ष्य को हासिल करने में 428 साल, बिहार में 8 साल, दिल्ली में 31 साल, मिजोरम में 585 साल लगेंगे।

अधिकारी के पद पर सबसे कम महिलाएं
महिलाओं की भागीदारी ना सिर्फ पुलिसबल में कम है बल्कि पुलिस अधिकारी के पद पर भी सिर्फ 8.2 फीसदी महिलाए हैं, जबकि 11 राज्यों में महिला पुलिस अधिकारियों का प्रतिशत 5 फीसदी से भी कम है। तमिलनाडु व मिजोरम में 20.2 फीसदी महिला अधिकारी पुलिस बल में हैं, जबकि सबसे कम जम्मू कश्मीर में हैं, यहां सिर्फ 2 फीसदी महिला पुलिस अधिकारी हैं, वहीं केरल में सिर्फ 3 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 4.2 फीसदी महिला पुलिस अधिकारी हैं। वहीं लक्षद्वीप में एक भी महिला पुलिस अधिकारी नहीं है।

थानों पर 3 में से एक पर सीसीटीवी कैमरा
रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि देश के 3 में से सिर्फ 1 पुलिस स्टेशन में ही सीसीटीवी कैमरा लगा है। गौर करने वाली बात है कि 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था। आईजेआर रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के 17233 पुलिस थानों में से 5396 में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है। ओडिशा, तेलंगाना, पुडुचेरी में हर पुलिस स्टेशन पर कम से कम एक सीसीटीवी कैमरा जरूर लगा है। मणिपुर, लद्दाख, लक्षद्वीप में किसी भी पुलिस स्टेशन में कैमरा नहीं लगा है। राजस्थान की बात करें तो यहां 894 थाने में से सिर्फ एक में सीसीटीवी कैमरा लगा है।

लाखों पद खाली पड़े
पुलिस बल में खाली पड़े पद की बात करें तो जनवरी 2021 तक 5.62 लाख पद खाली पड़े थे। 2010 से 2020 के बीच पुलिस बल में पदों में 32 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई और यह संख्या 15.6 फीसदी से बढ़कर 20.7 लाख तक पहुंच गई। लेकिन बड़ी संख्या में सिपाहियों और अधिकारियों के पद खाली पड़े हैं। बिहार में 41.8 फीसदी पद खाली पड़े हैं, महाराष्ट्र में 16.3 फीसदी पद खाली पड़े हैं। सिर्फ तीन ही राज्य ऐसे हैं जिन्होंने सिपाही और अधिकारी के पदों पर रिक्तियों को कम करने में सफलता हासिल की है, ये राज्य तेलंगाना, कर्नाटक और केरल हैं।












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