हर साल 5 लाख बच्चों को मौत देने वाले वायरस से जीत नहीं पा रहा भारत
बैंगलुरू। विश्व में सबसे ज्यादा जिस रोग सें बच्चों की मौत होती है उस लिस्ट में डायरिया दूसरे नंबर पर है। यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल 8 लाख बच्चे इस रोग के शिकार होते हैं, यह रोग रोटावाइरस के जरिये बच्चों के अंदर पहुंचता है।
पांच साल तक के बच्चों में रोटावायरस यानि डायरिया का खतरा
- यह वाइरस 5 साल के नीचे के बच्चों को अपना शिकार बनाता है।
- यह एक ऐसा संक्रमण है जो कि अगर एक बच्चे को हो जाय तो उसके संपर्क में रहने से दूसरे बच्चे को भी हो सकता है।
- यह दूषित पानी के कारण बच्चों को होता है।
- इस इन्फेक्शन के होते ही बच्चे को दस्त और उल्टियां होने लगती हैं।
- बच्चा डिहाईड्रेशन का शिकार हो जाता है और इलाज अगर सही ना हो तो बच्चा मौत की चपेट में भी आ जाता है।
- जनवरी में खबर आयी थी कि भारत ने बड़ी ही कम कीमत पर इस वाइरस के लिए वैक्सीन तैयार की है जो कि सरकारी अस्पतालों में गरीब बच्चों के लिए फ्री होगी।
लेकिन क्या वो वैक्सीन देश के सारे बच्चों को लग पा रही है इसको जानने के लिए नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये...

सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन है ही नहीं
सरकार ने आदेश तो दे दिया कि रोटा वाइरस का टीका गरीब बच्चों को सरकारी अस्पतालों में लगेगा लेकिन देश के ऐसे बहुत सारे सरकारी अस्पताल हैं, जहां पर वैक्सीन कभी भी उपलब्द्ध होते ही नहीं है।

पानी और शौचालयों पर रूपये खर्च करे
अगर सरकार देश के पानी और शौचालयों पर रूपये खर्च करे और उसे साफ-सुथरा बनाये तो देश में डायरिया के केस कम हो सकते हैं। भारत के अर्बन एरिया में 63 प्रतिशत और रूलर एरिया में 72 प्रतिशत जगहों पर शौचालय नहीं हैं।

पीने के पानी को शुद्ध किया जाये
पीने के पानी को शुद्ध किया जाये और रिहायशी इलाकों को साफ किया जाये तो भारत में 40 प्रतिशत तक डायरिया से बच्चों को बचाया जा सकता है।यही नहीं घरों में लोग अपने बच्चों और परिवार को हाथ धोने की आदत डालें तो वाकई में इस रोग से ग्रसित होने वाले रोगियों में कमी आयेगी, यूनिसेफ का तो कहना है कि 30 प्रतिशत समस्या तो ऐसे ही खत्म हो जायेगी।

450,000 बच्चे रोटा वाइरस के शिकार
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल विश्व में 450,000 बच्चे रोटा वाइरस के शिकार होते हैं जिनमें से 98,000 बच्चे भारतीय होते हैं जो कि एक दुखद आंकड़ा है।

जानकारी ही बचाव
कुछ उपाय अपनाकर इस खतरे से कुछ हद तक बच्चे को बचाया जा सकता है क्योंकि सरकार के फैसले को अमली जामा पहनने में काफी वक्त लग सकता है इसलिए इंसान को जानकारी ही बचाव के तहत काम करना पड़ेगा।












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