भारत में बनाई गई ये दवा कोरोना वायरस के प्रोटीन से हार्ट को होने वाले डैमेज को करती है ठीक:शोध

भारत में DRDO की बनाई दवा कोरोना वायरस के प्रोटीन से हार्ट को होने वाली क्षति को कर सकती है ठीक- शोध

Corona Virus: कोरोना वायरस मरीज के फेफड़े के अलावा दिल समेत अन्‍य अंगों को प्रभावित करते हैं। वहीं अब लेटेस्‍ट रिसर्च में ये बात सामने आई है भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलेपमेंट (DRDO)द्वारा विकसित की गई दवा कोरोना वायरस के एक प्रोटीन के कारण दिल को होने वाले डैमेज को ठीक कर सकती है।

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जानें कौन सी है ये दवा

सार्स-कोव-2 यानी कोरोना वायरस का एक विशिष्ट प्रोटीन हृदय के ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है। DRDO के सहयोग से डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज द्वारा बनाई गई 2DG नाम की ये ओरल दवा है। जो कोरोना वायरस के प्रोटीन से हृदय को होने वाली क्षति को ठीक कर सकती है।

कैसे करती है काम

दरअसल, कोरोना वायरस शरीर में ऊर्जा पाने के लिए ग्लाइकोलाइसिस या ग्लूकोज के टूटने पर निर्भर करता है और ये दवा ग्लाइकोलाइसिस की प्रक्रिया को धीमा कर देती है और कोरोना वायरस को फैलने से रोकती है।

मक्खियों और चूहों पर की गई ये स्‍टडी

इसके लिए फल मक्खियों और चूहों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि भारत के DRDO द्वारा विकसित एक दवा कोरोना वायरस में एक प्रोटीन के कारण होने वाले दिल की क्षति को उलट सकती है।

प्रोटीन के जहरीले प्रभाव को उलटने के लिए 2DG दवा है कारगर

मैरीलैंड विश्वविद्यालय, बाल्टीमोर, अमेरिका के वैज्ञानिकों ने अब वायरस के विषाक्त प्रभाव के पीछे तंत्र का पता लगाया है। दिल के ऊतकों को प्रभावित कर दिल का दौरा या हार्ट फेल होने का कारण बनता है। विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पहचाना कि कैसे कोरोना वायरल का एक विशिष्ट प्रोटीन हृदय के ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है। फिर उन्होंने हृदय पर उस प्रोटीन के जहरीले प्रभाव को उलटने के लिए 2DG नामक दवा का इस्तेमाल किया।

कोविड होने के एक साल तक होता है ये खतरा

इस अध्‍ययन में पाया गया कि COVID-19 से संक्रमित लोगों में संक्रमण के बाद कम से कम एक साल तक हृदय की मांसपेशियों में सूजन, असामान्य हृदय की धड़कने, रक्त के थक्के, स्ट्रोक, दिल के दौरे और हार्टफेल डेवलेप होने का काफी खतरा होता है। कोरोना वायरस प्रोटीन के विषाक्त प्रभाव को उलटने के लिए 2DG दवा का इस्तेमाल किया।

दुनिया भर में बनी अन्‍य कोई भी दवा नहीं करती ये काम

स्‍टडी में ये भी कहा गया कि दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने COVID-19 बीमारी की गंभीरता को कम करने के लिए तेजी से टीके और दवाएं विकसित कीं लेकिन अध्ययन में कहा गया है कि ये उपचार हृदय या अन्य अंगों को उस नुकसान से नहीं बचाते हैं जो एक हल्के संक्रमण से भी हो सकता है।

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