क्या भारत-चीन के रिश्तों में घुल रही मिठास? 5 साल बाद फिर उड़ान भरेगी 'दोस्ती', सीधी हवाई सेवा होगी बहाल
India China Direct Flights: भारत-चीन के रिश्तों में बरसों से जमी तल्खी अब धीरे-धीरे पिघलने लगी है। सीमा विवाद, कारोबारी तनातनी और राजनीतिक अविश्वास के बीच भी दोनों पड़ोसी देशों ने सीधी उड़ान सेवा को फिर से शुरू करने का ऐलान कर एक नई शुरुआत का संकेत दिया है। यह कदम महज़ भारत-चीन के यात्रियों की सुविधा भर नहीं, बल्कि कूटनीति के उस बदलते खेल का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी एक अहम किरदार बन चुके हैं।

नोबेल शांति पुरस्कार पाने की चाह और वैश्विक व्यापार पर टैरिफ के नाम पर अपनी 'दादागिरी' से ट्रंप ने न केवल कई देशों के समीकरण बदल दिए हैं बल्कि जहां पुराने दोस्त नए सवालों में घिर गए हैं वहीं कई पुराने प्रतिद्वंद्वी नई संभावनाओं पर बात करने लगे हैं। ऐसे में भारत और चीन की यह नज़दीकी सिर्फ दो देशों की कहानी नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति के नए दौर की झलक है।
पीएम मोदी का चीन का दौरा?
दरअसल, साल 2020 में कोविड महामारी और भारत-चीन सीमा पर गलवान घाटी में झड़प के बाद से भारत-चीन के बीच सीधी उड़ान सेवा निलंबित थी, जिसे अब बहाल किया जा रहा है और इसकी औपचारिक घोषणा 31 अगस्त 2025 को हो रहे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है।
शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि भारत सरकार की ओर से पीएम मोदी के शिखर सम्मेलन यात्रा की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वैसे मोदी का साल 2019 के बाद चीन का पहला दौरा होगा। चीन ने पीएम मोदी की संभावित यात्रा का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें भरोसा है कि यह शिखर सम्मेलन 'एकता, दोस्ती और अच्छे नतीजों का मंच' साबित होगा।
दूसरों देशों से होकर करते हैं हवाई सफर
मीडिया में सूत्रों के हवाले से खबरें आ रही हैं कि भारत सरकार ने विमान कंपनी एयर इंडिया और इंडिगो को अक्टूबर 2025 से शुरू होने वाले विंटर सीजन तक उड़ान के लिए तैयार रहने को कहा है। उन्हें कहा है कि शॉर्ट नोटिस पर भी उड़ान की तैयारी पूरी रखो। करीब पांच साल से भारत-चीन के विमान एक-दूसरे देश के लिए कोई सीधी उड़ान नहीं भरते। यात्रियों को सिंगापुर, हांगकांग या बैंकॉक जैसे शहरों से होकर जाना पड़ रहा है। भारत-चीन के बीच बंद सीधी उड़ान सेवा फिर से शुरू होने पर न केवल यात्रियों का समय बल्कि खर्च भी बचेगा।
टैरिफ वॉर से करीब आ रहे भारत-चीन
अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया और चीन को भी नहीं बख्शा। हालांकि चीन पर टैरिफ लगाने का फैसला फिलहाल 90 दिन के लिए टाल दिया गया है जबकि भारत पर 25 प्रतिशत बेस टैरिफ 7 अगस्त से प्रभावी हो गया और रूस से तेल खरीदने की वजह से 25 प्रतिशत पेनल्टी (टैरिफ) 27 अगस्त से लागू होगा।
अमेरिका के टैरिफ वॉर की वजह से भारत-चीन के बीच सहयोग की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। पहले कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और अब विमान सेवा बहाल करने की तैयारी। इन्हें दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
भारत-चीन सीमा: गलवान घाटी में क्या हुआ था?
भारत-चीन सीमा पर गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच जून 2020 में झड़प हुई थी और यह भारत-चीन रिश्तों के हालिया इतिहास की सबसे बड़ी व हिंसक घटनाओं में से एक मानी जाती है। हुआ यह था कि अप्रैल-मई 2020 से भारत और चीन के सैनिक सीमा पर आमने-सामने डटे थे। गलवान क्षेत्र में चीन ने LAC के भारतीय हिस्से में निर्माण कार्य और सैनिक जमावड़ा बढ़ा दिया था, जिसे लेकर तनाव था।
15 जून 2020 की रात को दोनों देशों के सैनिक एक "डी-एस्केलेशन" समझौते के तहत पीछे हटने की प्रक्रिया में थे, लेकिन पैट्रोलिंग पॉइंट 14 के पास विवाद हुआ। किसी तरह का हथियार (बंदूक) इस्तेमाल नहीं हुआ, क्योंकि 1996 और 2005 के समझौतों के तहत एलएसी पर फायरिंग प्रतिबंधित है। दोनों पक्षों ने पत्थर, लोहे की रॉड, कीलदार डंडे और मुक्कों का इस्तेमाल किया। यह झड़प कई घंटों तक चली, रात का समय और बेहद ऊंचाई वाला इलाका होने के कारण हालात और भी खतरनाक थे।
भारत के 20 सैनिक शहीद हुए, जिनमें कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू भी शामिल थे। चीन ने आधिकारिक तौर पर 4 सैनिकों की मौत स्वीकार की, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में संख्या इससे अधिक बताई गई। गलवान घाटी झड़प के बाद देशों के बीच सैन्य व राजनयिक वार्ताओं का लंबा दौर चला। भारत ने चीन के खिलाफ आर्थिक मोर्चे पर भी कदम उठाए। कई चीनी ऐप्स (जैसे TikTok, UC Browser) आदि पर प्रतिबंध लगाया और निवेश पर सख्ती बढ़ाई। तब से सीधी उड़ानें भी बंद हैं।












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