कांग्रेस का हो गया कांड! INDIA में कद घटा? हार पर सुनाने वालों की लंबी हो रही लिस्ट

तीन प्रमुख हिंदी भाषी राज्यों में करारी हार के बाद से कांग्रेस की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। इंडिया ब्लॉक के जो अन्य 27 दल उसे सबसे बड़ी पार्टी मानकर अब तक उसकी बातों को मान ले रहे थे, अब उन सबको सुनाने का मौका मिल गया है।

बड़े दिनों बाद इंडिया ब्लॉक की बुधवार यानि 6 दिसंबर को कांग्रेस की ओर से बैठक बुलाई गई थी, लेकिन इसमें कितनी पार्टियों और नेताओं की भागीदारी हो पाएगी, इन आशंकाओं के बीच बैठक रद्द करनी पड़ गई है।

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इंडिया ब्लॉक की बैठक से दूर रहते कई नेता
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले से सूचना नहीं होने और उत्तर बंगाल जाने का कार्यक्रम तय होने के नाम पर सबसे पहले कन्नी काट चुकी थीं।

उधर विपक्षी एकता के सूत्रधार माने जाने वाले बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बीमार होने की चर्चा है। लिहाजा उनके खुद की मौजूदगी की संभावना नहीं लग रही थी।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के सामने भी अभी चक्रवात 'मिचौंग' से निपटने की चुनौती है। इसलिए, लगता है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से बुलाई बैठक को रद्द कर दिया गया।

तीन राज्यों में हार के बाद कांग्रेस को खूब सुना रहे हैं सहयोगी
28 विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया की बैठक की चर्चा के बीच ही राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में कांग्रेस को बीजेपी के हाथों मिली बुरी हार को लेकर आईना दिखाने का सिलसिला भी नहीं रुक रहा है। जेडीयू, टीएमसी और समाजवादी पार्टी के बाद इस लिस्ट में अब नेशनल कांफ्रेंस भी शामिल हो गई है।

'सुप्रीम कोर्ट छोड़िए और पार्लियामेंट इलेक्शन की तैयारी कीजिए'
पार्टी नेता उमर अब्दुल्ला ने चुनाव नतीजों से कांग्रेस के संतुष्ट नहीं होने और सुप्रीम कोर्ट जाने जैसे सवालों पर कहा है, 'बहुत हो गया....चुनाव ऐसे नहीं होता...आप कुछ जीतते हैं और कुछ हार जाते हैं....आप उसी चुनाव से सिर्फ संतुष्ट नहीं हो सकते जो जीतते हैं....आपको हार स्वीकार करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए.....सुप्रीम कोर्ट जाने की जगह उन्हें हार के कारणों का विश्लेषण करना चाहिए.... '

उन्होंने कहा कि 'बीजेपी में मेरे एक दोस्त ने दो महीने पहले मुझसे कहा था कि बीजेपी छत्तीसगढ़ में जीत रही है....मैं उस वक्त हंसा...तो अगर उनको पता था तो कांग्रेस को क्यों नहीं? अब सुप्रीम कोर्ट छोड़िए और पार्लियामेंट इलेक्शन की तैयारी कीजिए...'

परिणाम आया तो अहंकार भी खत्म- अखिलेश
पिछले तीन दिनों में इंडिया ब्लॉक के ऐसे कई नेता सामने आए हैं, जो कांग्रेस को खरी-खोटी सुनाकर गए हैं। इससे पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वाराणसी में एक कार्यक्रम के दौरान बिना कांग्रेस का नाम लिए कह दिया, 'अब परिणाम आ चुका है तो अहंकार भी खत्म हो गया....'

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों के दौरान सीटों पर तालमेल को लेकर कांग्रेस और सपा के शीर्ष नेताओं के बीच खूब तू-तू-मैं-मैं भी हो चुकी है। इसके बाद यूपी में कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व राज्य में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी करने तक की बात कह चुका है।

'जनता जीती है, कांग्रेस हारी है'
वहीं ममता बनर्जी ने सोमवार को राज्य विधानसभा में कहा कि विधानसभा चुनावों में उन्होंने सुझाव दिया था कि 'इंडिया ब्लॉक को सीटों का तालमेल करके लड़ना चाहिए। लेकिन, सच्चाई है कि इंडिया के कुछ दलों ने वोट काटा और वोट बंटने की वजह से वे हार गए।' उन्होंने यह कहने में भी गुरेज नहीं किया कि 'जनता जीती है, कांग्रेस हारी है।'

जेडीयू भी कांग्रेस को सुनाने में पीछे नहीं
इससे पहले जेडीयू के सीनियर नेता केसी त्यागी कह चुके हैं कि कांग्रेस भाजपा को अपने दम पर हराने के दिन में सपने देख रही थी। उन्होंने खड़गे की ओर से बुलाई गई बैठक पर कहा था कि अगर एक महीने पहले यह बैठक बुलाते तो नतीजा और होता। उन्होंने भी कहा कि यह विपक्षी गठबंधन की नहीं कांग्रेस की हार है।

ममता-नीतीश को गठबंधन की अगुवाई देने की होने लगी मांग
जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार कुछ दिन पहले तक कांग्रेस से गुजारिश करते नजर आ रहे थे कि विधानसभा चुनावों से फुर्सत मिल जाए तो इंडिया ब्लॉक पर भी ध्यान दे दे।

उन्हीं के खास मंत्री और पार्टी नेता विजय चौधरी और अशोक चौधरी ने अब इंडिया ब्लॉक की कमान किसी 'विश्वसनीय चेहरे' को देने की वकालत शुरू कर दी है और इसके लिए नीतीश और ममता का नाम तक आगे बढ़ा दिया है।

इसी तरह की लाइन टीएमसी ने भी लेनी शुरू कर दी है और पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा है कि अगर विपक्ष को कामयाबी चाहिए तो वह सिर्फ ममता मॉडल से ही मिल सकती है।

कांग्रेस ने इस उम्मीद में इंडिया ब्लॉक की 27 पार्टियों को पिछले दिनों ज्यादा भाव नहीं दिया था, क्योंकि उसे लगा कि कम से कम मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तो उसकी जीत पक्की ही है।

कर्नाटक की शानदार सफलता के बाद से ही पार्टी नेता राहुल गांधी और दल में उनके सारे आजू-बाजू वाले नेताओं की चाल बदली हुई नजर आने लगी थी।

इनका विपक्षी गठबंधन में ऐसा जलवा था कि इंडिया ब्लॉक की भोपाल में घोषित हो चुकी पहली रैली तक कैंसिल कर दी गई और किसी ने आवाज उठाने की हिम्मद नहीं दिखाई।

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लेकिन, अब सुनने की बारी कांग्रेस की है और बाकी दलों ने सुनाने का सिलिसिला शुरू कर दिया है। यह स्थिति भाजपा और उसके नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टक्कर देने का मंसूबा देख रहे विपक्ष के लिए सही संकेत नहीं है।

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