Income Tax Rules 2026: 1 अप्रैल से बदल जाएंगे टैक्स के ये बड़े नियम, आपकी सैलरी-इनवेस्टमेंट पर कितना होगा असर?
Income Tax Rules 2026: केंद्र सरकार ने आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 'इनकम टैक्स रूल्स, 2026' का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। हालांकि, सरकार ने टैक्स स्लैब या दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन सिस्टम की पारदर्शिता और कड़ाई बढ़ाने के लिए नियमों में बड़े फेरबदल किए गए हैं। इन बदलावों का सबसे सीधा असर नौकरीपेशा (Salaried) कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी और टैक्स प्लानिंग पर पड़ने वाला है।
नए नियमों में डिजिटल रिपोर्टिंग को अनिवार्य बनाया गया है ताकि टैक्स चोरी की गुंजाइश खत्म हो सके। इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को लेकर स्पष्टता दी गई है, वहीं हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के दायरे में कुछ नए शहरों को शामिल कर मध्यम वर्ग को राहत देने की कोशिश की गई है, लेकिन दिल्ली-NCR के कई इलाकों के हाथ अब भी खाली हैं।

इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर अब मिलेगी अधिक टैक्स छूट
सरकार ने पहली बार इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को परक्विजिट टैक्स (Perquisite Tax) के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल किया है। अब यदि कंपनी कर्मचारी को ईवी की सुविधा देती है और खर्च उठाती है, तो ₹5000 प्रति माह तक का फायदा मिलेगा। ड्राइवर के लिए ₹3000 अलग से जोड़े जाएंगे।
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यदि कर्मचारी खुद खर्च वहन करता है, तो उसे ₹2000 प्रति माह का लाभ और ड्राइवर के लिए ₹3000 की छूट मिलेगी। पहले यह नियम केवल इंजन क्षमता (cc) पर आधारित था, जिससे ईवी मालिकों को स्पष्ट लाभ नहीं मिल पा रहा था।
HRA नियमों में बदलाव, बेंगलुरु-पुणे को फायदा, NCR को निराशा
नए नियमों के तहत 50% HRA छूट वाली 'मेट्रो सिटी' कैटेगरी का विस्तार किया गया है। अब बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद के कर्मचारियों को भी मुंबई और दिल्ली की तरह 50% टैक्स छूट मिलेगी। हालांकि, नोएडा, गुरुग्राम और नवी मुंबई जैसे शहरों को अब भी 40% वाली श्रेणी में ही रखा गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन शहरों में किराया मेट्रो शहरों के बराबर है, ऐसे में यहाँ रहने वालों को कम टैक्स छूट के कारण आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
डिजिटल एसेट्स और क्रिप्टो पर सख्त निगरानी
इनकम टैक्स विभाग ने अब क्रिप्टो एसेट्स, डिजिटल करेंसी और ई-मनी को रिपोर्टिंग के दायरे में मजबूती से शामिल कर लिया है। 1 अप्रैल 2026 से टैक्सपेयर्स को अपने डिजिटल ट्रांजैक्शन और खातों की पूरी जानकारी देनी होगी। इसका उद्देश्य देश और विदेश में होने वाले डिजिटल लेन-देन पर कड़ी नजर रखना और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों को रोकना है।
कॉर्पोरेट और चैरिटेबल ट्रस्ट के लिए नए प्रावधान
डिजिटल रिपोर्टिंग: अब टैक्स जांच पूरी तरह डेटा-आधारित होगी। हाई-इनकम ग्रुप और बिजनेस मालिकों को अपने रिकॉर्ड्स पहले से ज्यादा पुख्ता रखने होंगे।
कंपनियां: डेटा सेंटर सेवाओं की परिभाषा बदल दी गई है। बड़ी कंपनियों को अब टैक्स आवेदनों के लिए सख्त समयसीमा का पालन करना होगा।
चैरिटेबल ट्रस्ट: इनके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आसान की गई है। अब अलग-अलग फॉर्म की जगह एक ही सेंट्रलाइज्ड फॉर्म होगा। साथ ही, रिकॉर्ड रखने की अवधि 10 साल से घटाकर 6 साल कर दी गई है, जिससे अनुपालन का बोझ कम होगा।
With AI Inputs
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