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Impeachment: जस्टिस वर्मा की कुर्सी जाने का रास्ता साफ! सांसदों ने मिलाया हाथ, आगे क्या?

Impeachment: सरकार इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा को हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर इकट्ठे करने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू करेगी, क्योंकि आधे से ज्यादा राजनितिक दलों के नेताओं ने सैद्धांतिक रूप से प्रस्ताव का समर्थन करने की बात स्वीकार कर ली है। किरेन रिजिजू ने कहा की जल्द ही हस्ताक्षर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, जिससे एक बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें अब बढ़ने वाली हैं।

किरेन रिजिजू ने क्या क्या कहा?

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार (2 जुलाई, 2025) को कहा कि कई राजनितिक दलों के नेताओं ने महाभियोग के लिए अपनी सहमति दे दी है। अब हस्ताक्षर प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी। लेकिन अभी यह निर्णय लिया जाना बाकी है कि इस प्रस्ताव को पहले लोकसभा में पेश किया जाएगा या राज्यसभा में। ऐसे प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों की आवश्यकता होती है।

Impeachment

कब शुरू होगी महाभियोग की प्रक्रिया?

संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होगा और 21 अगस्त को समाप्त होगा। अंतिम समय में इसे 10 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिन में ही संशोधित कार्यक्रम को मंजूरी दे दी। किरेन रिजिजू ने कहा, "सरकार के पास करने के लिए पर्याप्त काम है।" हालांकि उन्होंने सत्र को 12 अगस्त की पूर्व निर्धारित अंतिम तिथि से आगे बढ़ाने के कारणों के बारे में विस्तार से नहीं बताया। हालाँकि अभी इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है की जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ प्रस्ताव इसी बीच में पास किया जाएगा।

क्या होगा प्रस्ताव पास होने के बाद?

अगर यह प्रस्ताव आगामी सत्र के दौरान पेश भी किया जाता है, तो भी उसी अवधि के भीतर इसके निष्कर्ष पर पहुंचने की संभावना नहीं है। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत, जब किसी न्यायाधीश को हटाने का प्रस्ताव किसी भी सदन में स्वीकार किया जाता है तो पीठासीन अधिकारी को प्रस्ताव के आधार पर आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन करना होता है। इस समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और एक जूरिस्ट शामिल होते हैं। इस समिति को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है, हालांकि आगे समय-सीमा बढ़ाई भी जा सकती है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीशों पर महाभियोग

महाभियोग की प्रक्रिया भारत के संविधान के अनुच्छेद 61, 124(4), 124(5), 217 और 218 में लिखी हुई है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(4) में न्यायाधीशों के महाभियोग की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को राष्ट्रपति के आदेश से उसके पद से हटाया जाना चाहिए। ऐसे आदेश के लिए संसद के दोनों सदनों की सहमति की आवश्यकता होती है। इसके लिए दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है।

क्या होते हैं महाभियोग के आधार?

महाभियोग का आधार उल्लंघन, दुर्व्यवहार, या अक्षमता के आरोपों पर आधारित होता है। लोकसभा और राज्यसभा के अध्यक्ष या सभापति को नोटिस देने के बाद इस पर आगे कार्रवाई की जाती है। इसके बाद समिति का गठन किया जाता है फिर वे संसद के दोनों सदनों के अगले सत्र में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।

यशवंत वर्मा पर लगे गंभीर आरोप

14 मार्च को जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित बंगले के एक हिस्से में आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंचे फायर टीम के लोगों को उनके घर से बड़ी मात्रा में कैश मिला था। बवाल मचा तो इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आंतरिक जांच का आदेश दिया और जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया। जांच के लिए देश के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने एक जांच पैनल बनाया।

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