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IMD Rain Alert: उत्तर भारत को जल्द मिलेगी बारिश से राहत, मौसम विभाग ने बता दिया कब लौटेगा मानसून?

IMD Rain Alert: इस वक्त पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से लेकर सुदूर कोंकण तक भारी बारिश की वजह से मुश्किल हालात बने हुए हैं। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजधानी दिल्ली का निचला इलाका समेत देश का बड़ा हिस्सा भारी बारिश की वजह से बाढ़ से जूझ रहा है। हालांकि, आने वाले दिनों में लोगों को भारी बारिश से राहत मिल सकती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 6 सितंबर के बाद से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में बारिश की रफ्तार कम होने लगेगी। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान समेत उत्तर भारत के राज्यों में आने वाले सप्ताह में भारी बारिश से राहत मिलने लगेगी।

पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली का एक हिस्सा इस वक्त बाढ़ की त्रासदी झेल रहा है। इन राज्यों के लिए बारिश का थमना राहत की खबर साबित हो सकती है। बरसात की वजह से नदियां उफान पर हैं और लोगों को अपना घर छोड़कर अस्थायी राहत कैंप में शरण लेनी पड़ रही है।

IMD Rain Alert

IMD Rain Alert: अगले सप्ताह से बारिश की रफ्तार में आएगी कमी

मौसम विभाग ने बताया कि इस बार मानसून की वापसी सामान्य से थोड़ी देरी से हो रही है। हालांकि, 7 से 10 सितंबर के बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। वहीं, पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन का अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद से बारिश की रफ्तार में कमी आने लगेगी और लोगों को राहत मिलेगी। अगले तीन दिन कोंकण क्षेत्र में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा, पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी आने वाले सप्ताह में हल्की से तेज बारिश का अलर्ट है।

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Monsoon इस बार देरी से क्यों लौट रहा है?

इस बार मानसून के देरी से लौटने के पीछे मौसम वैज्ञानिकों ने कई कारण बताए हैं। IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय मोहपात्रा ने पुष्टि की है कि 2025 में मानसून की वापसी 17 सितंबर के बाद से होगी और अक्टूबर के पहले सप्ताह तक यह पूरी तरह से लौट सकता है। मानसून के देरी से लौटने के पीछे कई कारण हैं:

⦁ एक अध्ययन के अनुसार, पिछले 50 वर्षों में मानसून का समय लगभग प्रत्येक दशक में 1.6 दिनों की दर से बढ़ा है, जिसका सीधा असर मानसून की देर से वापसी पर पड़ा है। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन का असर भी मुख्य कारक है।

एल-नीनो प्रभाव: प्रशांत महासागर में एल-नीनो की स्थिति मानसून की गतिविधियों को धीमा कर रही है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में असंतुलन बना है, जिसकी वजह से नमी और हवाओं का असमान वितरण बारिश को प्रभावित कर रहा है।

पश्चिमी विक्षोभ की कमी: उत्तरी भारत में मौसम बदलने वाला सिस्टम कम सक्रिय रहा। इसी वजह से इस बार जून-जुलाई से ज्यादा बारिश अगस्त में हुई और सितंबर में भी ज्यादा बारिश का अनुमान है।

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