श्रीदेवी अगर आज ज़िंदा होतीं तो...

बीते 15 सालों में सिर्फ दो फ़िल्में करने के बाद भी श्रीदेवी के चाहने वालों की आज भी कम नहीं है. वो ज़िंदा होती तो आज वो 55 साल की हो जाती

श्रीदेवी उन ख़ास अदाकारों में थीं जिन्होंने जेंडर और भाषा की सीमाएँ लांघी और हिंदी, तमिल, तेलूगू समेत कई भाषाओं में सुपरस्टार बनकर राज किया.

इस साल फरवरी में दुबई में उनकी मौत हो गई जिसे लेकर काफ़ी विवाद भी हुआ. अब जब वो नहीं हैं तो मैंने उन्हें उन पोस्ट के ज़रिए जानने की और समझने की कोशिश की जो वो सोशल मीडिया पर डालती थीं.

सोशल मीडिया पर कैसी थीं श्रीदेवी

एक एक्टर होने के परे, उनके कई और चेहरे थे. ट्विटर पर अकसर वो एक माँ के तौर पर नज़र आतीं जो दुलार भरी ऐसी फ़ोटो डालती जिसमें उनकी बेटियाँ साथ में हैं.

उस तस्वीर में एक प्रेमिका नज़र आती हैं जहाँ बोनी कपूर के साथ आइसक्रीम खाते हुए फ़ोटो डाली है और कैप्शन दिया है- लव इज़ हैविंग चॉकोबार्स टूगेदर.

https://twitter.com/SrideviBKapoor/status/241893900497854465

कभी वो अपने पिता को शिद्दत से याद करती बेटी के तौर पर नज़र आती हैं

कभी एक फ़ैशन आइकन और कभी एक पेंटर. वो पेंटिंग भी करती हैं, उनके बारे में ये बात कम ही लोगों को पता है.

https://twitter.com/SrideviBKapoor/status/876374245265297410

जून 2013 की एक ट्विटर पोस्ट में, "श्रीदेवी ने अपनी बनाई एक पेंटिंग की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है- ये मेरी शुरुआती पेंटिंग्स में से एक है, थॉट्स."

एक और पोस्ट में वो एक नई पेंटिंग शेयर करते हुए ट्वीट करती हैं, ये एक श्रद्धांजलि है जो मैंने जान्हवी के लिए बनाई है- माइकल जैक्सन की.

https://twitter.com/SrideviBKapoor/status/343238165643001858

श्रीदेवी की फ़िल्मों की ओर लौंटे तो वो उन चंद लोगों में थीं जिन्होंने बाल कलाकार शोहरात पाने के बाद बतौर अभिनेत्री भी ज़बरदस्त कामयाबी हासिल की.

वरना ऐसे कई मिसालें हैं जहाँ बचपन में ख़ूब शोहरत कमाने के बाद कई कलाकार ग़ुमनाम होकर रह जाते हैं.

श्रीदेवी का जादुई स्पर्श

उनके फ़िल्मी सफ़र को समझने की कोशिश में मैंने उनकी शुरुआती तमिल फ़िल्म देखी जो एक पौराणिक कथा पर आधारित थी और 4-5 साल की श्रीदेवी ने भगवान मुरुगन का रोल किया था जो अपने जादुई स्पर्श से एक बीमार बच्चे को ठीक देते हैं.

ये सीन मुझे हमेशा याद रहता है. क्या श्रीदेवी ने अपनी फ़िल्मों में यही नहीं किया- एक जादुई स्पर्श और एहसास से फ़िल्म में अपने इर्द गिर्द सब कुछ बहुत सुंदर बना देती थी वो- चाहे वो सदमा हो, चांदनी हो, इंग्लिश विंग्लिश हो या लम्हे.

मई 1985 में फ़िल्मफ़ेयर के कवर पर श्रीदेवी की फ़ोटो छपी और उन्हें एम्प्रैस यानी महारानी कहा गया. हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में आए तब उन्हें कुछ ही साल हुए थे.

श्रीदेवी
Reuters
श्रीदेवी

ये उनकी लोकप्रियता का ही कमाल था कि उन दिनों एक ही फ़िल्म कई भाषाओं में बनती थी जिसमें हीरो बदल जाते थे पर हीरोइन श्रीदेवी ही रहती थी.

1983 में फ़िल्म मवाली में जितेंद्र, जयाप्रदा और श्रीदेवी थे जो तेलूगू में श्रीदेवी के साथ बनी थी और तमिल में श्रीदेवी और रजनीकांत के साथ.

इसी तरह सदमा भी पहले तमिल में कमल हासन के साथ बनी और हिंदी में भी श्रीदेवी को ही रखा गया वरना आमतौर पर हीरोइन बदल दी जाती थी.

एक श्रीदेवी किरदार अनेक

ये श्रीदेवी ही थी जो फ़ुँकारती नागिन बन सकती थी, सफ़ेद चांदनी में धुली एक खुद्ददार लड़की, लम्हे में प्यार की परिभाषा को चुनौती देने वाली पूजा थी.

श्रीदेवी
Getty Images
श्रीदेवी

या मिस्टर इंडिया की खोजी पत्रकार जो ज़रूरत पड़ने पर कैबरे भी कर सकती थी, चालबाज़ में ज़बरदस्त कॉमेडी या फिर इंग्लिश-विंग्लिश की एक माँ और पत्नी जो कुछ ठिठके और हिचकते हुए कदमों से घर की दहलीज़ से निकलकर कुछ कर गुज़रने वाली गृहणी

या दिल को झकझोर देने वाली सदमा की वो लड़की ...

इस साल श्रीदेवी सदमा की 35वीं सालगिराह मना रही होतीं, रजनीकांत के साथ तमिल-कन्नड फ़िल्म प्रिया के 40 साल, अपनी शादी की 22वीं वर्षगाँठ मना रही होती...

और अपनी बेटी जान्हवी की पहली फ़िल्म धड़क देखती.

अगर श्रीदेवी ज़िंदा होती तो...

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