कांग्रेस का बड़ा ऐलान, मणिपुर में सरकार बनी तो राज्य से हटा देंगे विवादित आफस्पा कानून
नई दिल्ली, 11 दिसंबर: नागालैंड के मोन जिले में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में आम नागरिकों के मारे जाने की घटना के बाद पूर्वोत्तर राज्यों में 'सशस्त्र बल (विशेष शक्ति) अधिनियम, 1958 (आफस्पा )' को वापस लेने की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी है। इस इस मामले में कांग्रेस ने बड़ा ऐलान किया है। कांग्रेस ने ऐलान किया कि अगर 2022 के मणिपुर विधानसभा चुनावों में वह सत्ता में वापसी करते हैं तो पूरे राज्य से "आफस्पा को तत्काल और पूर्ण रूप से हटाने" की कसम खाई है।

कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र पर कानून को तत्काल हटाने के लिए दबाव बनाने का आग्रह किया है। कांग्रेस ने मांग है कि, मणिपुर के मुख्यमंत्री और सरकार संसद के इस शीतकालीन सत्र में आफस्पा को निरस्त करने के लिए पीएम मोदी और भारत सरकार पर दबाव बनाए और राज्य से अधिनियम को तत्काल हटाने के लिए मणिपुर कैबिनेट से मांग करें।
कांग्रेस ने भाजपा को यह भी याद दिलाया कि आफस्पा को सात विधानसभा क्षेत्रों (राज्य की राजधानी इंफाल सहित) से तब हटा दिया गया था जब वह सत्ता में थी। कांग्रेस शासन ने सात विधानसभा क्षेत्रों से अफस्पा हटा दिया। पार्टी ने घोषणा कि, अगर कांग्रेस 2022 में सत्ता में वापस आती है, तो पहली कैबिनेट बैठक में पूरे राज्य से अफ्सपा को तत्काल और पूर्ण रूप से हटाने का फैसला होगा।
आफस्पा अशांत क्षेत्र निर्धारित किए इलाकों में सशस्त्र बलों को विशेष शक्तियां प्रदान करता है। अफ्सपा को साल 1958 में एक अध्यादेश के जरिए लाया गया, उसके तीन महीने बाद ही इसे संसद की स्वीकृति भी मिल गई जो 11 सितंबर, 1958 को लागू हुआ था। शुरू में यह पूर्वोत्तर और पंजाब के उन क्षेत्रों में लगाया गया था, जिनको 'अशांत क्षेत्र' घोषित कर दिया गया था। इनमें से ज्यादातर 'अशांत क्षेत्र' की सीमाएं पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश और म्यांमार से सटी थीं।












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