Coronavirus: टॉप साइंटिस्ट का दावा, भारत में अभी तक Community Transmission नहीं
नई दिल्ली। गुरुवार को भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 160 के पार हो गई है। देश में कोरोना के बढ़ते केसेज के बीच ही इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के एक टॉप वैज्ञानिक ने कहा है कि भारत में अभी तक इस बात के सुबूत नहीं मिले है कि वायरस, कम्यूनिटी ट्रांसमिशन यानी समुदायों के बीच फैल रहा हो। साइंटिस्ट ने एक चैनल के साथ बातचीत में यह दावा किया है।

826 सैंपल्स के टेस्ट निगेटिव
आईसीएमआर के टॉप साइंटिस्ट डॉक्टर रमन गंगाखेदकर ने बताया है कि 826 सैंपल्स, जो इंफ्लुएंजा और सांस की गंभीर बीमारी से जुड़े थे, उनकी टेस्टिंग से यह बात सामने आई है कि अभी तक कम्यूनिटी ट्रांसमिशन के केस देश में सामने नहीं आए हैं। उन्होंने बताया है कि इन सैंपल्स को इसी तथ्य की पुष्टि के लिए टेस्ट किया गया था। ये टेस्ट निगेटिव आए हैं। उन्होंने बताया कि अगर कम्यूनिटी ट्रांसमिशन है और भारत कोविड-19 के तीसरे चरण में पहुंच गया है, तो फिर टेस्टिंग की रणनीति को तुरंत बदला जाएगा। उन्होंने कहा, 'रणनीति होगी कि इस बात के लिए और ज्यादा लोगों को टेस्ट किया जाएगा। हमें टेस्टिंग को बढ़ाना होगा और इसे हर किसी की पहुंच के लिए लायक बनाना होगा।'

कुछ दिनों पहले लिए गए थे सैंपल
कुछ ही दिनों पहले खबर आई थी कि आईसीएमआर ने कुछ अनियमित सैंपल्स को टेस्टिंग के लिए लिया है। ये सैंपल्स उन लोगों के थे जिन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सांस की हल्की या फिर गंभीर बीमारी के चलते भर्ती कराया गया था। इन अनियमित सैंपल्स को आईसीएमआर के तहत आने वाली वायरस रिसर्च एंड डायग्नॉस्टिक लैबोरेट्रीज (वीआरडीएल्स) के तहत टेस्टिंग के लिए भेजा जाता है। इनकी टेस्टिंग के जरिए पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं भारत में कोरोना वायरस कम्यूनिटी के जरिए तो नहीं फैल रहा है।

क्या होता है कम्युनिटी ट्रांसमिशन
कम्यूनिटी ट्रांसमिशन का मतलब होता है कि ऐसे लोगों के बीच भी वायरस का फैलना जो कहीं बाहर की यात्रा करके नहीं आए हैं और ऐसे में यह पता लगाना काफी मुश्किल हो जाता है कि वायरस आखिर उनमें कैसे ट्रांसमिट हुआ है। आईसीएमआर ने शुरुआत में 150 सैंपल्स की टेस्टिंग अपनी 13 लैबोरेट्रीज में की थी। इन टेस्टिंग को एक मार्च से 15 मार्च के बीच अंजाम दिया गया था। 51 लैब्स से टेस्टिंग के लिए इसके बाद 1010 सैंपल्स और लिए गए थे। 1010 सैंपल्स में से 826 सैंपल्स के टेस्ट निगेटिव आए हैं। इसके अलावा 194 सैंपल्स के रिजल्ट्स अभी तक अटके हुए हैं। गंगाखेदकर के मुताबिक अभी यह टेस्टिंग जारी रहेगी और आने वाले समय में उन लैब्स की संख्या बढ़ाई जाएगी जहां से सैंपल्स लिए जाने हैं।

भारत में अब तक 166 केस
उनसे यह पूछा गया कि क्या टेस्टिंग के लिए कितने स्वस्थ लोगों के सैंपल्स भी लिए गए थे? इस पर उन्होंने कहा कि सैंपल्स को उन अस्पतालों से लिया गया जहां पर लोगों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। इनका साइज, आईसीयू में मौजूद बिस्तरों के अनुपात में हैं। डॉक्टर गंगाखेदकर उन्होंने कहा कि अभी वह ऐसे लोगों को टेस्ट नहीं कर सकते हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं है। वह सिर्फ ऐसे लोगों पर ध्यान लगा रहे हैं जो अस्तपाल में भर्ती हुए हैं। गुरुवार तक भारत में कोरोना वायरस के केसेज की संख्या 166 पहुंच गई है। अब तक वायरस की वजह से तीन लोगों की मौत हो गई है।












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