कोरोना से लड़ाई में कितना कारगर है BCG टीका? ICMR ने शुरू किया ट्रायल
नई दिल्ली: पिछले साल दिसंबर के अंत में दुनिया को कोरोना वायरस के बारे में पता चला था। तब से वैज्ञानिक इस वायरस की प्रवृत्ति के बारे में पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ दिन पहले ये बात सामने आई थी कि जिन लोगों को बचपन में बीसीजी टीका लगा था, उन्हें कोरोना नुकसान नहीं पहुंचा पा रहा। अब आईसीएमआर ने इस तथ्य का पता लगाने के लिए देशभर में ट्रायल शुरू कर दिया है।

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आईसीएमआर के मुताबिक ये ट्रायल दिल्ली, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में किया जा रहा है। इसमें हॉटस्पॉट वाले इलाकों में रहने वाले 60 साल के ऊपर के 1000 बुजुर्गों को वॉलंटियर्स के रूप में शामिल किया गया है। इन वॉलंटियर्स की करीब 6 महीने तक ICMR की टीम निगरानी करेगी। इस ट्रायल का मकसद हॉटस्पॉट वाले इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों में कोरोना का खतरा कम करना है। ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन और तमिलनाडु में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग इस ट्रायल में आईसीएमआर की मदद कर रहा है।
क्या है बीसीजी?
बीसीजी का पूरा नाम बैसिलस कैलमेट गुएरिन है। ये एक तरह की वैक्सीन होती है, जो जन्म के बाद बच्चों को दी जाती है। आईसीएमआर के मुताबिक राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के तहत सरकार की ये कोशिश रहती है कि देश के हर बच्चे को ये टीका उपलब्ध हो जाए। ये टीका फेफड़ों के अलावा कई अन्य इंफेक्शन से इंसान की रक्षा करता है। पिछले 50 सालों से भारत में ये टीका बच्चों को दिया जाता रहा है। एक रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया था कि बीसीजी टीके की वजह से ही भारत में कोरोना की कहर और मृत्युदर अन्य देशों की तुलना कम है। हालांकि WHO ने कहा था कि इसके कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं। इस वजह से अब आईसीएमआर ने ये ट्रायल शुरू किया है।












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