IC814 Hijacking: पाकिस्तान की गई एक कॉल, टॉरगेट पर था "मातोश्री" भी, कैसे मुंबई पुलिस ने सुलझाया था ये केस
IC814 Hijack Case: आईसी814 कंधार हाईजैक पर नेटफ्लिस पर रिलीज हुई नई वेब सीरीज 'IC 814: The Kandahar Hijack' ने हाईजैकर्स के नामों को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। जिसके कारण केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा और अब फिल्म में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं।
मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच ने पाकिस्तान की गई फोन कॉल के जरिए कैसे आतंकियों और उनके खतरनाक मंसूबों को ट्रेक किया और कैसे इतनी बड़ी आतंकी साजिश को मुंबई पुलिस ने क्रेक किया था। आइए जानते हैं

क्या था IC 814 हाइजैक केस?
बता दें इंडियन एयरलाइंस फ्लाइट IC-814 हाईजैक 24 दिसंबर, 1999 को हुई थी। जब ये कमर्शियल फ्लाइट काठमांडू से नई दिल्ली जा रही थी। इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट को उड़ान भरने के 30 मिनट बाद फ्लाइट पर सवार हथियारों से लैस आतंकियों ने हाईजैक कर लिया गया था। जब ये हाईजैक हुई तब इसमें 176 यात्री और15 केबिन क्रू मेंबर सवार थे। आतंकी इसे हाईजैक कर लाहौर, दुबई और अंत में कंधार, अफगानिस्तान ले गए थे।
पाकिस्तान के नंबर पर गई थी एक कॉल
IC 814 फ्लाइट के हाइजैक होते ही मुंबई पुलिस को इसकी जानकारी दी गई और तुरंत हाई अलर्ट जारी कर दिया गया और अगले ही दिन रॉ के एक आईपीएस अधिकारी हेमंत करकरे मुंबई पुलिस हेड आफिस पहुंचे और उन्हें मुंबई में एक फोन नंबर के बारे में जानकारी दी जिससे पाकिस्तान के एक नंबर पर कॉल की गई थी । इसके बाद आगे की जांच के लिए टीमों का गठन किया गया।
पुलिस को मिला ये अहम सुराग
एक टीम ने कॉल करने वाले के बारे में जानकारी जुटाने के लिए एक मोबाइल प्रोवॉइडर से संपर्क किया। जिसके खुलासा हुआ कि ये कॉल करने वाला जुहू और मलाड के बीच में था, लेकिन यह जानकारी बहुत अस्पष्ट थी।
तीन दिन बाद पुलिस ने सुलझााई बड़ी गुत्थी
तीन दिनों की जांच के बाद, फोन नंबर की निगरानी करने वाली टीम को एक अलर्ट मिला कि फोन एक्टिव था। पुलिस ने कॉल रिकॉर्ड की और राज खुला कि यह पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के एक आतंकवादी का था, जो मुंबई में किसी को शालीमार होटल में पैसे इकट्ठा करने का निर्देश दे रहा था। इसके बाद पैसे इकट्ठा करने वाले व्यक्ति का पीछा करने के लिए छह पुलिस टीमें बनाई गईं। उन्होंने आखिरकार उसे जोगेश्वरी के बशीरबाग झुग्गियों में ट्रैक कर लिया।
टॉरगेट पर था ठाकरे का मातोश्री भी
पुलिस ने छापेमारी कर पांच आतंकवादियों को गिरफ्तार किया और हथियारों और गोला-बारूद का जखीरा बरामद किया। दिलचस्प बात यह है कि उन्हें शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के निवास मातोश्री का नक्शा भी मिला। मुंबई के मलाड में एक अन्य छापेमारी में एक नेपाली जोड़े के पास जिंदा हथगोले, ग्लॉक पिस्तौल और 10,000 अमेरिकी डॉलर नकद मिले।डॉलर की बरामदगी से अंतरराष्ट्रीय साजिश का संकेत मिला।
कौन था सरगना
आतंकवादियों ने अपहरण की साजिश में अपनी संलिप्तता कबूल की और अब्दुल पटेल को मुख्य साजिशकर्ता बताया। कुछ आतंकवादी पाकिस्तानी और नेपाली नागरिक थे, अन्य कश्मीर स्थित आतंकवादी समूह 'हरकत-उल-अंसूर' से जुड़े थे।
मुंबई में ऐसे रची गई थी हाईजैक की साजिश
पूछताछ में पता चला कि हाईजैकर्स जुलाई 1999 से ही मुंबई में अपहरण की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने जोगेश्वरी में एक फ्लैट किराए पर लिया और बुनियादी कौशल हासिल करने के लिए एक कंप्यूटर क्लास में शामिल हो गए। उन्होंने अपने पासपोर्ट के लिए सेवन स्पाइस ट्रैवल एजेंसी से संपर्क करके रिश्वत देकर नकली भारतीय पासपोर्ट हासिल किए।इसके बाद अपहरणकर्ता नेपाल गए और 24 दिसंबर, 1999 को अपनी योजना को अंजाम दिया। जम्मू-कश्मीर में तीन आतंकवादियों के बदले में उन्हें मुंबई पुलिस ने सीबीआई को सौंप दिया।
मुंबई पुलिस के जरिए हाईजैकर्स की हुई थी पहचान
सीबीआई ने अपहरण का मामला दर्ज किया जिसके बाद दोषियों को सजा मिली। यह मामला मुंबई पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुंबई पुलिस के अथक प्रयासों के कारण अपहर्ताओं की पहचान हो सकी, जिन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी, जिसके बाद भारतीय सरकारी अधिकारियों और अंतर्राष्ट्रीय प्राधिकारियों को भी इसके बारे में सूचित किया गया।












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