Air Force Aircraft Crash: 22 बार क्रैश हो चुका AN-32, फिर भी वायुसेना के लिए क्यों है 'लाइफलाइन'? कितनी कीमत
Indian Air Force AN 32 Aircraft Accident: भारतीय वायुसेना का एन-32 विमान एक बार फिर हादसे के बाद चर्चा में है। असम के जोरहाट एयरबेस पर हुए ताजा हादसे ने इस विमान के सुरक्षा रिकॉर्ड को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। 1986 से अब तक AN-32 करीब 22 दुर्घटनाओं का शिकार हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद यह विमान आज भी वायुसेना की रीढ़ बना हुआ है।
सवाल यह है कि जब इतने हादसे हो चुके हैं तो आखिर भारतीय वायुसेना इस विमान पर इतना भरोसा क्यों करती है? इसकी वजह सिर्फ इसकी क्षमता नहीं, बल्कि उन इलाकों में काम करने की योग्यता है जहां दूसरे विमान आसानी से नहीं पहुंच पाते। आइए समझते हैं कि AN-32 आखिर इतना खास क्यों है।

पहाड़ों और मुश्किल इलाकों का सबसे भरोसेमंद साथी
AN-32 को खास तौर पर हाई-एल्टीट्यूड और कठिन मौसम में ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया गया था। लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, सियाचिन और पूर्वोत्तर के कई इलाकों में बड़े विमान आसानी से नहीं पहुंच सकते। ऐसे में AN-32 छोटे रनवे और खराब मौसम में भी उड़ान भर सकता है। यही वजह है कि दशकों से यह भारतीय वायुसेना के लिए सबसे भरोसेमंद सप्लाई विमान बना हुआ है और सीमावर्ती इलाकों में सैनिकों तक जरूरी सामान पहुंचाता है।
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सैनिकों से लेकर हथियार तक, सब कुछ पहुंचाने की क्षमता
AN-32 सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट नहीं है बल्कि सेना की लॉजिस्टिक लाइफलाइन है। यह एक बार में 6.7 टन तक सामान ले जा सकता है। इसके अलावा 40 से ज्यादा सैनिकों को भी एक साथ ले जाने की क्षमता रखता है। हथियार, गोला-बारूद, सैन्य उपकरण और राहत सामग्री पहुंचाने में इसका बड़ा योगदान रहा है। आपदा राहत मिशनों में भी इस विमान ने कई बार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हादसे ज्यादा, लेकिन मिशन भी हजारों
AN-32 के साथ 22 दुर्घटनाएं जरूर हुई हैं, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा कारण इसका भारी इस्तेमाल भी है। पिछले चार दशकों में इस विमान ने लाखों उड़ान घंटे पूरे किए हैं और हजारों मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सैन्य विमान की विश्वसनीयता सिर्फ दुर्घटनाओं से नहीं, बल्कि उसके कुल ऑपरेशनल रिकॉर्ड से भी आंकी जाती है। इसी रिकॉर्ड की वजह से वायुसेना आज भी इसे अपने अहम बेड़े का हिस्सा मानती है।
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कई बार हुआ अपग्रेड, फिर भी उम्र बन रही चुनौती
समय के साथ AN-32 में कई बड़े अपग्रेड किए गए हैं। इसमें मॉडर्न एवियोनिक्स, बेहतर नेविगेशन सिस्टम और नई सुरक्षा तकनीकें जोड़ी गई हैं। हालांकि विमान का बेसिक डिजाइन काफी पुराना है और कई विमान 30-40 साल से सेवा में हैं। बढ़ती उम्र के कारण मेंटेनेंस की चुनौती भी बढ़ रही है। यही वजह है कि वायुसेना धीरे-धीरे नए ट्रांसपोर्ट विमानों को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है।
अभी विकल्प नहीं, इसलिए AN-32 की जरूरत बरकरार
हालांकि भविष्य में AN-32 को नए प्लेटफॉर्म से रिप्लेस किया जाना है, लेकिन फिलहाल इसका कोई पूरी तरह तैयार विकल्प मौजूद नहीं है। खासकर पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्रों में इसकी परफॉर्मेंस आज भी बेहद अहम मानी जाती है। जब तक नए विमान पूरी संख्या में शामिल नहीं हो जाते, तब तक AN-32 भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा। यही वजह है कि दुर्घटनाओं के बावजूद यह विमान आज भी वायुसेना की पहली पसंद में शामिल है।
AN-32 की कीतनी है कीमत?
AN-32 की कीमत उसके वेरिएंट और अपग्रेड के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। रक्षा उद्योग और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, इसके आधुनिक (Modernised) वर्जन की अनुमानित कीमत करीब 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 125 करोड़ रुपये आंकी गई है। हालांकि भारतीय वायुसेना के कई AN-32 विमानों को समय-समय पर अपग्रेड किया गया है, जिससे उनकी वास्तविक लागत और बढ़ जाती है। यह विमान अपनी मजबूत क्षमता, कठिन इलाकों में ऑपरेशन और सैन्य लॉजिस्टिक्स में अहम भूमिका के कारण आज भी वायुसेना के लिए बेहद मूल्यवान माना जाता है।












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