Thai Princess Death: रहस्यमयी ढंग से हुई बेहोश और फिर थम गईं सासें, खूबसूरत थाई प्रिंसेस की कैसे हुई मौत?
Thai Princess Death: थाईलैंड के राजा वजिरालांगकोर्न की सबसे बड़ी बेटी और राजकुमारी बज्रकीतियभा नरेंदिरा देब्यावती की मौत हो गई। वह 47 साल की थीं और पिछले कई सालों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। इसकी जानकारी खुद थाईलैंड के शाही परिवार ने दी, जिसके बाद पूरे थाईलैंड में शोक की लहर फैल गई।
शाही महल द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, राजकुमारी ने गुरुवार शाम 7:48 बजे बैंकॉक के किंग चुलालांगकोर्न मेमोरियल अस्पताल में अंतिम सांस ली। डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका।

थाई सिंहासन की संभावित उत्तराधिकारी मानी जाती थीं
राजकुमारी बज्रकीतियभा को लंबे समय से राजा वजिरालांगकोर्न की संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा था। कई राजशाही समर्थकों का मानना था कि भविष्य में वही थाईलैंड का सिंहासन संभाल सकती थीं। उनकी मृत्यु ने शाही परिवार में उत्तराधिकार को लेकर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। राजनीतिक और शाही हलकों में अब इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि भविष्य में राजगद्दी किसे सौंपी जाएगी।
अमेरिका से PhD, ऑस्ट्रिया में रहीं एंबेसडर
राजकुमारी सिर्फ शाही परिवार की सदस्य नहीं थीं, बल्कि एक बेहद पढ़ी-लिखी और प्रभावशाली महिला भी थीं। उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित कॉर्नेल विश्वविद्यालय से कानून में पीएचडी की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रिया में थाईलैंड की राजदूत के रूप में भी सेवाएं दीं। उनकी कूटनीतिक भूमिका की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना हुई थी।

मरने से पहले कई बड़े काम कर गईं राजकुमारी
साल 2012 में उन्हें रॉयल सिक्योरिटी कमांड का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया गया था। यह पद राजा की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण दायित्व माना जाता है। इसके अलावा उन्होंने न्यायिक सुधारों और कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी काम किया। वह संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC) के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया में कानून व्यवस्था दूत के रूप में भी कार्य कर चुकी थीं।
साल 2013 में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था, "अगर समाज में अन्याय और अस्थिरता होगी तो विकास संभव नहीं है। कानून का शासन, बेहतर न्याय व्यवस्था और मानवाधिकार किसी भी देश की प्रगति की बुनियाद होते हैं।"
कुत्ते को घुमाते-घुमाते हुईं बेहोश, फिर कभी नहीं उठीं
राजकुमारी का पूरा नाम "हर रॉयल हाईनेस प्रिंसेस बज्रकीतियभा नरेंदिरा देब्यावती" था। उनके साथ जो हुआ वो किसी रहस्य से कम नहीं है। वह दिसंबर 2022 से कोमा में थीं। उस समय वह अपने पालतू कुत्तों को टहला रही थीं, तभी अचानक बेहोश होकर गिर गईं। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह पिछले लगभग चार साल से इलाज करा रही थीं। देशभर में उन्हें प्यार से "प्रिंसेस भा" कहा जाता था। वह थाई शाही परिवार की सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली सदस्य मानी जाती थीं। उनकी मौत जितने रहस्यमयी ढंग से हुई उस पर कोई भी भरोसा नहीं कर पा रहा है।

उत्तराधिकार को लेकर बढ़ी नई चिंता
राजकुमारी की बीमारी के बाद से ही थाई शाही परिवार में उत्तराधिकार को लेकर सवाल उठ रहे थे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें राजा के बाद सबसे सटीक उत्तराधिकारी माना जाता था। हालांकि थाईलैंड के सख्त "लेस मैजेस्टी" कानून के तहत राजशाही से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक चर्चा करना बेहद सीमित है। यही कारण है कि इस मुद्दे पर खुलकर बहस नहीं हो पा रही।
वर्तमान में 73 वर्षीय राजा वजिरालांगकोर्न की चार शादियों से कुल सात संतानें हैं। लेकिन उनके चार बड़े बेटे 1996 में अपनी मां के साथ देश छोड़कर चले गए थे और आज भी विदेश में रहते हैं।
अब शाही परिवार में कौन बचा?
राजकुमारी बज्रकीतियभा के निधन के बाद राजा के पास केवल दो ऐसे बच्चे बचे हैं जिन्हें पूर्ण शाही दर्जा प्राप्त है। इनमें 38 साल की राजकुमारी सिरिवन्नावरी और 20 साल के राजकुमार दिपांगकोर्न शामिल हैं। इस वजह से भविष्य में उत्तराधिकार के विकल्प और भी सीमित हो गए हैं, जिससे शाही परिवार के भीतर राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
शाही महल ने बताया है कि राजा वजिरालांगकोर्न ने राजकुमारी के अंतिम संस्कार को पूरे राजकीय सम्मान और परंपराओं के साथ आयोजित करने का आदेश दिया है। राजकुमारी के पार्थिव शरीर को ग्रैंड पैलेस परिसर स्थित पीमन रत्तया सिंहासन हॉल में रखा जाएगा, जहां जनता भी उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेगी। इस दौरान राजा वजिरालांगकोर्न और उनकी मां राजकुमारी सोमसवाली भी मौजूद रहेंगी। राजकुमारी बज्रकीतियभा का निधन थाईलैंड के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। कानून, न्याय और कूटनीति के क्षेत्र में उनका योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
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