US Attack On Venezuela: कौन था नीनो गुरेरो? जिसे नहीं पकड़ पाए 11 हजार सैनिक, ट्रंप ने कराया काम तमाम

US Attack On Venezuela: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने एक सटीक हवाई हमले में वेनेजुएला के कुख्यात गैंग "ट्रेन दे अरागुआ" (Tren de Aragua) के सरगना नीनो गुरेरो को मार गिराया है। ट्रंप ने इस ऑपरेशन का वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें एक हरे रंग की इमारत और उसके पास बने शेड को विस्फोट में तबाह होते देखा जा सकता है। यह कार्रवाई लैटिन अमेरिका में फैले संगठित अपराध और ड्रग नेटवर्क के खिलाफ अमेरिका के बड़े अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।

ट्रंप ने क्या कहा?

इस ऑपरेशन की जानकारी देते हुए ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा-

"मेरे निर्देश पर यूनाइटेड स्टेट्स सदर्न कमांड ने नीनो गुरेरो को सफलतापूर्वक खत्म करने के लिए एक तेज और घातक काइनेटिक स्ट्राइक को अंजाम दिया।"
US Attack On Venezuela

ट्रंप ने इसे अमेरिका की सुरक्षा के लिए बड़ी सफलता बताया और कहा कि यह ऑपरेशन लंबे समय से चल रही निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर किया गया। साथ ही ट्रंप ने गुरेरो की हत्या पर खुशी जाहिर की।

कौन था नीनो गुरेरो?

मारे गए गैंग लीडर का पूरा नाम हेक्टर रुथिनफोर्ड गुरेरो फ्लोरेस था। वह लंबे समय से "ट्रेन दे अरागुआ" गिरोह की कमान संभाल रहा था। ट्रंप प्रशासन पहले ही इस संगठन को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका था। अमेरिकी सरकार का आरोप था कि यह गिरोह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ "अनियमित युद्ध" (Irregular Warfare) जैसी गतिविधियों में शामिल था। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक गुरेरो केवल एक गैंगस्टर नहीं, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिकी आपराधिक नेटवर्क का सबसे बड़ा चेहरा बन चुका था।

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वेनेजुएला के साथ मिलकर हुआ ऑपरेशन

ट्रंप ने दावा किया कि यह पूरी कार्रवाई वेनेजुएला के अधिकारियों के साथ मिलकर की गई। उनके मुताबिक अमेरिका और वेनेजुएला इस समय पहले की तुलना में कहीं बेहतर तरीके से सहयोग कर रहे हैं। वेनेजुएला के अधिकारियों ने भी पुष्टि की कि यह एक ज्वॉइंट ऑपरेशन था। विश्लेषकों का मानना है कि यह ऑपरेशन केवल सुरक्षा कार्रवाई नहीं, बल्कि दोनों देशों के बदलते रिश्तों का भी संकेत है।

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदली तस्वीर

अमेरिका और वेनेजुएला के संबंधों में बदलाव तब तेज हुआ जब इसी साल जनवरी में अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को एक नाटकीय रात के ऑपरेशन में गिरफ्तार कर लिया था। अमेरिका ने उन पर "ट्रेन दे अरागुआ" गिरोह से कथित संबंध रखने का आरोप लगाया था।

मादुरो के सत्ता से हटने के बाद अमेरिका ने उनकी उत्तराधिकारी डेल्सी रोड्रिगेज के साथ संबंध बेहतर बनाने की कोशिश शुरू की। इसी क्रम में वाशिंगटन ने रोड्रिगेज पर लगे प्रतिबंध भी हटा दिए ताकि दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल वेनेजुएला के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाया जा सके।

कैसे बना लैटिन अमेरिका का सबसे खतरनाक गैंग?

नीनो गुरेरो के नेतृत्व में "ट्रेन दे अरागुआ" ने सिर्फ वेनेजुएला ही नहीं, बल्कि कोलंबिया, इक्वाडोर, पेरू और चिली जैसे देशों तक अपना नेटवर्क फैला लिया था। शुरुआत में यह गिरोह प्रवासियों से रंगदारी वसूलता था, लेकिन बाद में यह मानव तस्करी, अपहरण, सुपारी हत्या और अंतरराष्ट्रीय अपराधों में शामिल हो गया। कुछ ही सालों में यह लैटिन अमेरिका के सबसे ताकतवर अपराध सिंडिकेट्स में गिना जाने लगा।

जेल से चलाता था अपराध साम्राज्य

अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक यह संगठन मूल रूप से एक जेल गैंग था, जिसे गुरेरो ने बहुराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क में बदल दिया। अमेरिका ने उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना के लिए लाखों डॉलर का इनाम घोषित किया था। गुरेरो का अधिकांश जीवन जेल के अंदर और बाहर बीता। वह कई बार गिरफ्तार हुआ और कई बार फरार भी हुआ।

रिश्वत देकर भागा, फिर जेल को बना दिया लग्जरी रिसॉर्ट

साल 2012 में गुरेरो एक जेल गार्ड को रिश्वत देकर भाग निकला था। हालांकि 2013 में उसे फिर गिरफ्तार कर लिया गया। जेल लौटने के बाद उसने उत्तरी वेनेजुएला के अरागुआ राज्य स्थित कुख्यात टोकोरॉन जेल को लगभग एक निजी साम्राज्य में बदल दिया। रिपोर्टों के मुताबिक जेल के अंदर चिड़ियाघर, शानदार रेस्तरां, नाइट क्लब, सट्टेबाजी केंद्र और स्विमिंग पूल तक मौजूद थे। यानी जेल कम और लग्जरी रिसॉर्ट ज्यादा दिखाई देता था।

11 हजार सैनिक भी नहीं पकड़ पाए

सितंबर 2023 में वेनेजुएला सरकार ने टोकोरॉन जेल पर दोबारा नियंत्रण पाने के लिए करीब 11,000 सैनिकों को तैनात किया था। लेकिन कार्रवाई शुरू होने से पहले ही गुरेरो वहां से भागने में सफल रहा। इसके बाद भी उसने सोने की खदानों, ड्रग तस्करी मार्गों और अवैध सीमा चौकियों पर अपना प्रभाव बनाए रखा। 2014 के आर्थिक संकट के बाद उसका नेटवर्क कुल आठ देशों तक फैल गया।

अमेरिकी कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

हालांकि ट्रंप प्रशासन की इस आक्रामक रणनीति को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सितंबर से अब तक ऐसे सैन्य हमलों में 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

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आगे क्या होगा?

नीनो गुरेरो की मौत को अमेरिका बड़ी जीत के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक सरगना के मारे जाने से पूरे नेटवर्क का अंत नहीं होता। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या "ट्रेन दे अरागुआ" का नेटवर्क टूट जाएगा या फिर कोई नया नेता इसकी कमान संभाल लेगा। फिलहाल लैटिन अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियां इस संगठन की अगली गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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