I-PAC डायरेक्टर Vinesh Chandel 10 दिन की ED कस्टडी में, ‘हवाला फंडिंग’ से ₹50 करोड़ तक के खेल का आरोप
I-PAC Director Vinesh Chandel: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच देश की सबसे बड़ी राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC (इंडियन पीएसी) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की एक अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला लेनदेन के गंभीर आरोपों में घिरे I-PAC के को-फाउंडर और डायरेक्टर विनेश चंदेल को 10 दिनों की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में भेज दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब I-PAC बंगाल में ममता बनर्जी की TMC और तमिलनाडु में एमके स्टालिन की DMK के लिए चुनावी रणनीति तैयार कर रही है।
विनेश चंदेल की गिरफ्तारी सोमवार शाम करीब 7:45 बजे लंबी पूछताछ के बाद हुई। मामला इतना संवेदनशील था कि उन्हें रात करीब 11:55 बजे एडिशनल सेशंस जज शेफाली बरनाला टंडन के आवास पर पेश किया गया। कोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद तड़के 3:30 बजे अपना फैसला सुनाया और चंदेल को 10 दिनों की रिमांड पर भेज दिया। चंदेल I-PAC के अहम रणनीतिकार होने के साथ-साथ कंपनी में 33 फीसदी के हिस्सेदार भी हैं।

'हवाला मॉडल' और फंडिंग का खेल (Hawala & Money Trail)
- जांच एजेंसी का दावा है कि चंदेल के नेतृत्व में I-PAC ने एक खास तरीका अपनाया, जिसमें फंड को दो हिस्सों में बांटा जाता था-एक बैंकिंग चैनल के जरिए दिखाया गया पैसा और दूसरा कैश के रूप में छिपाया गया पैसा।
- ED के मुताबिक, यह पूरा सिस्टम अवैध धन को वैध दिखाने के लिए तैयार किया गया था। आरोप है कि करीब ₹3.50 करोड़ की 'शाम' फंडिंग को बिना ब्याज वाले लोन के रूप में कंपनी में दाखिल किया गया। साथ ही कुल ₹50 करोड़ तक की मनी लॉन्ड्रिंग की भी आशंका जताई गई है। एजेंसी का कहना है कि इन पैसों का इस्तेमाल चुनावी खर्च और जनमत को प्रभावित करने जैसे कामों में किया गया।
- ED ने इस पूरे मामले को पश्चिम बंगाल के चर्चित कोयला घोटाले से जुड़ा बताया है। इससे पहले 2 अप्रैल को दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में कई ठिकानों पर छापेमारी भी की गई थी। इनमें चंदेल के दिल्ली स्थित आवास, ऋषिराज सिंह के बेंगलुरु ठिकाने और विजय नायर के मुंबई स्थित स्थान शामिल थे।
- ED का आरोप है कि जनवरी में कोलकाता में हुई कार्रवाई के बाद चंदेल ने कर्मचारियों को ईमेल और संवेदनशील डेटा हटाने के निर्देश दिए, जिससे जांच में बाधा पहुंचाने की कोशिश हुई।
क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप? (I-PAC Director Vinesh ChandelCase)
ED की यह कार्रवाई 28 मार्च 2026 को दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक FIR पर आधारित है। चंदेल और I-PAC के अन्य निदेशकों-प्रतीक जैन और ऋषि राज सिंह-पर खातों में हेराफेरी और बेहिसाब धन के लेन-देन का आरोप है। ED के अनुसार, यह मामला पश्चिम बंगाल के चर्चित कोयला घोटाले से भी जुड़ा हुआ है।
एजेंसी का दावा है कि विनेश चंदेल के इशारे पर I-PAC ने फंड जुटाने का एक खास तरीका (Modus Operandi) अपनाया था। इसमें पैसों को दो हिस्सों में बांटा जाता था-एक हिस्सा बैंकिंग चैनल (Accounted) के जरिए आता था और दूसरा हिस्सा कैश (Unaccounted) के रूप में लिया जाता था। आरोप है कि इस 'काले धन' को वैध दिखाने के लिए फर्जी असुरक्षित लोन और हवाला रास्तों का इस्तेमाल किया गया। ED के मुताबिक, करीब 50 करोड़ रुपये के 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' की लॉन्ड्रिंग की गई है।
सबूत मिटाने और जांच में बाधा डालने का दावा
ED ने कोर्ट में एक चौंकाने वाला दावा भी किया। एजेंसी के मुताबिक, जब 8 जनवरी को कोलकाता में I-PAC के दफ्तरों पर छापेमारी की गई थी, तब विनेश चंदेल ने कर्मचारियों को ईमेल और संवेदनशील डेटा डिलीट करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने भी अपने आदेश में कहा कि चंदेल हवाला चैनलों और बेहिसाब नकदी के इस्तेमाल में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं, जिससे जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
चंदेल के वकील ने कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल को इस केस की जानकारी तक नहीं थी और यह कार्रवाई उनके अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने इसे राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया और कहा कि चुनाव से पहले जानबूझकर दबाव बनाया जा रहा है।
हालांकि, कोर्ट ने ED की दलीलों को गंभीर मानते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मानने के पर्याप्त आधार हैं कि चंदेल कथित रूप से अवैध फंडिंग, हवाला ट्रांजैक्शन और आपराधिक आय के इस्तेमाल में शामिल रहे हैं।
चुनावी माहौल में सियासी उबाल?
यह कार्रवाई ऐसे वक्त हुई है जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। I-PAC इन दोनों राज्यों में TMC और DMK को चुनावी रणनीति में मदद दे रही है। इस गिरफ्तारी के बाद सियासत गरमा गई है। TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर इस कदम की आलोचना करते हुए इसे चुनावी मैदान को असमान बनाने की कोशिश करार दिया है। वहीं, चंदेल की कानूनी टीम का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और चुनावों को प्रभावित करने के लिए की गई है।
याद दिला दें कि जनवरी में जब ED ने कोलकाता में छापेमारी की थी, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वहां पहुंच गई थीं। ED का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डाली और कुछ जरूरी दस्तावेज व गैजेट्स अपने साथ ले गईं, जबकि TMC का कहना है कि ED चुनाव से जुड़ी गोपनीय रणनीतियों को चुराना चाहती थी।
क्या बड़ा खुलासा बाकी है?
I-PAC जैसी बड़ी चुनावी कंसल्टेंसी फर्म के डायरेक्टर की गिरफ्तारी ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि चुनावी फंडिंग और रणनीति के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है।
आने वाले दिनों में ED की पूछताछ से और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जो चुनावी राजनीति और फंडिंग के तरीके पर बड़ा असर डाल सकते हैं। फिलहाल नजरें इस बात पर हैं कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और इसका असर चुनावी मैदान पर कितना पड़ता है।
FAQs
1. विनेश चंदेल कौन हैं?
विनेश चंदेल I-PAC (Indian PAC Consulting Pvt Ltd) के सह-संस्थापक और निदेशक हैं। वे कंपनी के प्रमुख निर्णयकर्ताओं में से एक हैं और उनकी 33% हिस्सेदारी है।
2. I-PAC पर मुख्य आरोप क्या हैं?
I-PAC पर राजनीतिक दलों से मिलने वाले फंड को कैश और बैंकिंग चैनल में बांटने, खातों में हेराफेरी करने और हवाला के जरिए काले धन को सफेद करने के आरोप हैं।
3. क्या यह गिरफ्तारी चुनावों को प्रभावित करेगी?
चूंकि I-PAC पश्चिम बंगाल में TMC और तमिलनाडु में DMK के लिए मुख्य चुनावी रणनीतिकार है, इसलिए उनके प्रमुख डायरेक्टर की गिरफ्तारी से इन पार्टियों के चुनावी मैनेजमेंट पर असर पड़ सकता है।
4. क्या यह मामला कोयला घोटाले से जुड़ा है?
हां, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुताबिक यह जांच पश्चिम बंगाल के कोयला घोटाला जांच की कड़ियों से जुड़ी हुई है।














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