12 साल की बहन को है ब्रेन कैंसर, 10 साल का भाई यूं जुटा रहा है इलाज के पैसे
हैदराबाद, 6 अगस्त: 10 साल के एक बच्चे से अपने माता-पिता की मजबूरी नहीं देखी गई। दो साल बड़ी बहन जानलेवा बीमारी से पीड़ित है और परिवार पाई-पाई को मोहताज। पिता घरों में पेंटिंग करके मुश्किल से इतना जुटा लेते हैं कि किसी तरह से दोनों वक्त की रोटी मिल पाती है। इस कमाई में ब्रेन कैंसर के इलाज का खर्चा कहां से जुटाया जा सकता है। लाचार मां ने पक्षियों का दाना बेचना शुरू किया। कुछ पैसे आने लगे, जिससे थोड़ा-बहुत काम निकलने लगा। तब बच्चे ने फैसला किया कि वह भी मां के साथ पक्षियों का दाना बेचने जाएगा। बड़ी बात ये है कि उसने यह सब पढ़ाई की कीमत पर शुरू नहीं किया। वह अपना काम करने के बाद पढ़ाई का भी वक्त निकाल लेता है।

12 साल की सकीना को ब्रेन कैंसर है
दो साल पहले पता चला था कि 12 साल की सकीना को ब्रेन कैंसर है। सकीना की मां बिलकिस बेगम ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया है कि 'जब डॉक्टरों ने उसके स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में बताया तो हमलोग घबरा गए थे। डॉक्टरों ने सकीना को बचाने के लिए रेडियोथेरेपी करवाने की सलाही दी थी।' उन्होंने कहा कि 'दो साल पहले जबसे सकीना की जांच में ब्रेन कैंसर का पता चला, तब से पूरा परिवार उसके इलाज के लिए मुश्किलों की दौर से गुजर रहा है।' परिवार को तेलंगाना सरकार से भी मदद मिली है, लेकिन वह रकम कम पड़ चुकी है। बिलकिस ने कहा है, 'हमें तेलंगाना सरकार से फंड मिले थे और पूरा का पूरा रकम उसकी रेडियोथेरेपी पर ही खर्च हो गया और इलाज को लेकर हम पैसों की उसी किल्लत की स्थिति में आ चुके हैं...'

परिवार की मदद के लिए आगे आया 10 साल का बच्चा
माता-पिता की लाचारी देखने के बाद 10 साल का सैयद अजीज अपनी बहन के इलाज के लिए पैसे जुटाने के लिए आगे आया है। उसने पक्षियों का खाना बेचकर फंड जुटाने शुरू किए हैं, ताकि सकीना बेगम का इलाज हो सके। हालांकि, अजीज पक्षियों के दाने बेचता है, लेकिन उसने पढ़ाई नहीं छोड़ी है और हैदराबाद के एक मदरसे में पढ़ता भी है। छोटा सा यह भाई बहन को बचाने के लिए ये सब कैसे कर लेता है, इसपर उसने बताया कि 'मैं सुबह 6 बजे तक पक्षियों का दाना बेचता हूं और 8 बजे के बाद से 5 बजे शाम तक मैं मदरसे की क्लास में शामिल होता हूं।' अजीज के हौसले के बारे में मां बिलकिस कहती हैं, 'परिवार की हालत देखकर सैयद मदद के लिए आगे आया है। जब मेरे बेटे ने हमारी मदद करने का फैसला किया तो उसने कहा कि वह मेरे साथ ही पक्षियों का दाना बेचेगा और रोड पर पक्षियों के दाने बेचने के लिए अलग से बेंच लगा लिया। '

लोगों से मदद की अपील
अजीज की मां ने बताया कि दोनों मां-बेटे दाना बेचकर सिर्फ इतना कमा लेते हैं कि सकीना की दवाइयों और एमआरआई, एक्स-रे के अलावा ब्लड टेस का खर्चा निकल जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि उनकी बेटी को बचाने के लिए आगे आएं और उनकी सहायता करें। शकीना और अजीज के पिता सैयद लतीफ घरों में पेंटिंग का काम करके घर खर्च का जुगाड़ करते हैं। पूरे परिवार की कहना है कि उनकी बच्ची को बचाने के लिए लोग मदद का हाथ बढ़ाएं।












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