पुलिस के खिलाफ बढ़ रही हैं उत्पीड़न की शिकायतें
नई दिल्ली। जिस पुलिस के जिम्मे आपकी सुरक्षा का जिम्मा है, उसके खिलाफ शिकायतें दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं। यह हम नहीं बल्कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस केजी बालाकृष्णन ने आयोग के नये भवन के उदद्यघाटन समारोह में कही। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी चिंता का विषय है, जिसे हल करना ही होगा अन्यथा कानून व्यवस्था में सुधार और मुश्किल हो जायेगा।
बालाकृष्णन ने कहा कि पिछले पांच साल में पुलिसकर्मियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा शिकायतें आयोग को मिल रही हैं। लिहाजा आयोग केंद्र एवं राज्य सरकारों से निवेदन करेगा कि थाने व चौके स्तर पर पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण एवं काउंसिलिंग दी जाये, ताकि थानों में मानवाधिकारों का हनन होने से रोका जा सके।

बालाकृष्णन ने बताया कि आयोग को अब तक कुल 12 लाख 80 हजार शिकायतें मिली हैं, जिनमें सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक व कानूनी पृष्ठभूमियों पर मानवाधिकारों का हनन हुआ है। खास बात यह है कि उनमें से 12 लाख 50 हजार शिकायातें का निपटारा किया जा चुका है। निबटारा तो अच्छी बात है, लेकिन शिकायतों का बढ़ना समाज के हित में नहीं है। पिछले कुछ सालों में महिलाओं के खिलाफ अपराध एवं यौन उत्पीड़न की शिकायतों में भी जबर्दस्त इजाफा हुआ है।
बालाकृष्णन ने कहा कि मानवाधिकारों के हनन के मामले में मीडिया सक्रिय भूमिका निभा रहा है, लेकिन बेहतर होगा यदि मीडिया शिक्षण संस्थान मानवाधिकार को विषय के रूप में समाहित करें। हालांकि आयोग जल्द ही अपनी ओर से एक पहल करेगा।
बालाकृष्णन ने अपने भाषण में देश की जेलों के बुरे हाल पर प्रकाश डालते हुए बताया कि देश भर की जेलों में बंद कुल कैदियों में 65.7 प्रतिशत तो ऐसे हैं, जिनके खिलाफ मामला कोर्ट में चल रहा है, आये दिन पेशी पर जाना होता है। जेलों में भीड़ बढ़ती जा रही है। इसे रोकने के लिये या तो मामलों का निबटारा तेजी से किया जाना चाहिये या फिर छोटे-मोटे अपराध करने वालों के लिये कोई अलग व्यवस्था की जानी चाहिये।
इसके अलावा आयोग के अध्यक्ष ने नरेगा, आईसीडीएस, मिड डे मील, आदि तमाम सरकारी योजनाओं में खामियों पर प्रकाश डाला और सरकार को सचेत किया कि बड़ी योजनाओं से जुड़े मामलों में गंभीरता जरूरी है।












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