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RBI Monetary Policy: ओमिक्रॉन संकट से ब्याज दरों पर कैसे पड़ेगा असर ? जानिए विशेषज्ञों की राय

मुंबई, 7 दिसंबर: भारतीय रिजर्व बैंक अपने ब्याज दरों को अपनी लगातार नौंवीं बैठक में रिकॉर्ड निचले स्तर पर ही रखने का फैसला ले सकता है। कोरोना के नए ओमिक्रॉन वेरिएंट से मौद्रिक नीति को सामान्य की तरफ वापसी की कोशिशें फिलहाल लटकती नजर आ रही हैं। भारतीय अर्थव्यस्था को समझने वाले ज्यादातर विशेषज्ञों की यही राय है कि बुधवार को 6 सदस्यीय मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी रिजर्व बैंक के रेपो रेट को नहीं छूने वाली है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास बुधवार को मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी के फैसले की घोषणा करने वाले हैं।

ब्याज दरों में बदलाव के आसार नहीं- एक्सपर्ट

ब्याज दरों में बदलाव के आसार नहीं- एक्सपर्ट

ब्लूमबर्ग ने 28 अर्थशास्त्रियों के सर्वे के आधार पर बताया है कि बुधवार को मौद्रिक नीति समिति रेपो रेट के 4% में बदलाव नहीं करने वाली। यहां तक की रिवर्स रेपो रेट को लेकर भी इसी तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इसकी वजह से केंद्रीय बैंक को कीमतों को नियंत्रण में रखने के साथ ही,आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने में भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने कहा है, 'महामारी के समय से आरबीआई ने यह संतुलन बनाकर रखा है और महामारी अभी भी खत्म नहीं हुई है।' उनके मुताबिक, 'इन परिस्थितियों में, मौजूदा समय में स्थिति को सामान्य करने के उपायों में देरी करना समझदारी है।' रेपो रेट वह है, जिस दर पर आरबीआई दूसरे वाणज्यिकि बैंकों को उनकी तात्कालिक आवश्यकताओं के लिए कैश उपलब्ध करवाता है। वहीं रिवर्स रेपो रेट पर वह एक दिन के लिए बैंकों से कैश लेता है।

रिवर्स रेपो को लेकर बंटी है राय

रिवर्स रेपो को लेकर बंटी है राय

सर्वे में शामिल 24 अर्थशास्त्रियों में से 7 को छोड़कर कोई भी रिवर्स रेपो रेट में भी किसी तरह के बदलाव की संभावना नहीं देख रहे हैं। जबकि, बाकी दो चरणों में इजाफे की अटकलें लगा रहे हैं। मसलन, आईसीसीआई सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप लिमिटेड के ट्रेडिंग हेड और वाइस प्रेसिडेंट नवीन सिंह का कहना है, 'यह देखते हुए कि आरबीआई पहले ही वीआरआरआर के जरिए प्रॉक्सी नॉर्मलाइजेशन कर चुका है, चाहे ओमिक्रॉन का संक्रमण कुछ भी हो, यह रिवर्स रेपो रेट बढ़ाने के लिए एक तार्किक कदम है।' रिवर्स रेपो इस समय 3.35% है।

मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं

मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं

मुद्रास्फीति एक और बड़ी परेशानी की वजह है, जिसे आरबीआई गवर्नर बार-बार अस्थाई कहते रहे हैं, जो 2% से 6% के रेंज में ऊंचाई की ओर अग्रसर है। जिस तरह से सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं, खासकर के टमाटर के दाम बढ़ रहे हैं, ऐसे में चालू वित्त वर्ष के आखिर तक के इसके 5.3% के उच्चतम स्तर के अनुमान को झटका लगने का डर सता रहा है। जाहिर है कि ब्याज दर तय करते समय महंगाई एक बहुत बड़ी चिंता रहने वाली है। मौद्रिक नीति समिति के 6 में से पांच सदस्य अक्टूबर की तरह अभी भी मौद्रिक नीति को वैश्विक जोखिमों को देखते हुए उदार रखने के पक्ष में हैं। ऐसे में ओमिक्रॉन जितनी तेजी से फैल रहा है आरबीआई को ठोस स्टैंड लने की जरूरत पड़ सकती है।

9.5% विकास दर की उम्मीद कैसे रहे बरकरार ?

9.5% विकास दर की उम्मीद कैसे रहे बरकरार ?

बेंगलुरु में सोसिटे जेनरल्स जीएससी प्राइवेट के एक अर्थशास्त्री कुणाल कुंडु का कहना है, 'ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ मौजूदा वैक्सीन का असर और उसके प्रभाव को समझने के लिए दुनिया और ज्यादा आंकड़ों का इंतजार कर रही है।' 'अगर आरबीआई भी इसे शुरुआती खतरे के तौर पर देखता है तो यह नीति सामान्यीकरण की योजना को रोकना चाह सकता है।' लेकिन, रिजर्व बैंक अगले साल मार्च तक खत्म हो रहे इस वित्त वर्ष में विकास दर को अनुमानित 9.5% पर भी बरकरार रखना चाहता है और इसी वजह से वह जो भी फैसला लेगा, उसमें सभी पहलुओं का ध्यान रखना लाजिमी होगा।

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