पहले स्वदेशी एयरक्राफ्ट की व्यावसायिक उड़ान पर मोदी सरकार का दावा कितना सच?- फ़ैक्ट चेक
पिछले सप्ताह भारत के नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट करके स्वदेशी डोर्नियर एयरक्राफ्ट की पहली व्यावसायिक उड़ान सेवा शुरू करने की जानकारी दी.
सिंधिया के ट्वीट से एक दिन पहले उनके मंत्रालय ने प्रेस नोट जारी करके बताया, 'मेड इन इंडिया डोर्नियर एयरक्राफ्ट एचएएल डोर्नियर डीओ-228 की पहली उड़ान सेवा असम के डिब्रूगढ़ से अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट के बीच शुरू होगी.'

इस नोट में यह भी कहा गया कि एलांयस एयर भारत की पहली व्यावसायिक उड़ान है जो नागरिक ऑपरेशन के लिए भारत में निर्मित विमानों का इस्तेमाल कर रही है.
सिंधिया के अलावा केंद्र और राज्य सरकार के दूसरे मंत्रियों ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिये इसकी जानकारी दी. भारत सरकार के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री जी किशन रेड्डी ने पोस्ट किया, "उड़ान के तहत मेड इन इंडिया डोर्नियर विमान 228 अब सेवा में हैं. इस स्वदेशी विमान ने अपनी पहली उड़ान भरी."
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भारत के क़ानून एवं न्याय मंत्री किरण रिजिजू ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "कुछ लोग मेक इन इंडिया को ख़ारिज करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी जी के आत्म निर्भर भारत विजन पर सवाल उठाते हैं. मेड इन इंडिया डोर्नियर एयरक्राफ्ट नए भारत की क्षमता को प्रदर्शित कर रहा है."
कई मीडिया प्रकाशनों से इस नैरेटिव के साथ इस ख़बर को प्रकाशित और प्रसारित किया है.
लेकिन क्या सरकार का दावा सही है? इसका जवाब है नहीं.
इस दावे की सच्चाई को जानने के लिए हमने दो बातों का पता लगाया - भारत में यात्रियों के लिए पहला स्वनिर्मित विमान कौन सा था और डोर्नियर एयरक्राफ्ट से जुड़े तथ्य क्या हैं?
भारत सरकार के अपने रिकॉर्ड के मुताबिक, देश में बना और नागरिकों को एक जगह से दूसरे जगह लेने जाना वाला विमान डोर्नियर नहीं था, यह एवरो विमान था.
25 जून, 1967 को जारी सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, "28 जून को कानपुर में आयोजित एक समारोह में रक्षा मंत्री सरदार स्वर्ण सिंह, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री डॉ. कर्ण सिंह को देश में निर्मित 14 एवरो विमान में से पहला विमान सौंपेंगे जिसे इंडियन एयरलाइंस की उड़ानों में लगाया जाएगा. मौजूदा समय में देश में एवरो इकलौता यात्री विमान है जिसका निर्माण देश में हो रहा है. प्रत्येक विमान की लागत 82.53 लाख रुपये है."
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इस विमान के वास्तविक निर्माता बीएई सिस्टम्स ने इस विमान के बारे में जो कहा था, "कुल 381 विमान बनाए गए हैं, जिसमें 89 का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने किया है. भारत में निर्मित पहले विमान ने एक नवंबर, 1961 को उड़ान भरी था. एचएएल के बनाए विमान का इस्तेमाल इंडियन एयरलाइंस ने भी किया था."
लगातार कोशिशों के बाद भी एचएएल ने हमारे किसी सवाल का जवाब नहीं दिया है, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, भारत के रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है.
लेकिन एक सरकारी अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, "इंडियन एयरलाइंस तब बड़ी उड़ान सेवा हुआ करती थी और वह भारत में निर्मित विमानों का इस्तेमाल भी करती थी."
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इसके बारे में बीबीसी ने कुछ स्वतंत्र विशेषज्ञों से भी बात की. नागरिक उड्डयन मामलों के एक्सपर्ट कैप्टन मोहन रंगनाथन ने बीबीसी को बताया कि इंडियन एयरलाइंस के साथ रहते हुए वे खुद एवरो विमान उड़ा चुके हैं. उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्री के दावे को 'झूठा' बताया.
फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन पायलेट्स के फाउंडर प्रेसीडेंट कैप्टन मीनू वाडिया ने कहा, "सरकार का यह दावा भ्रामक है."
सरकार ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया था कि एलायंस एयर, नागरिक सेवा के लिए भारत में निर्मित विमानों का इस्तेमाल करने वाली पहली व्यावसायिक एयरलाइन है.
इस दलील को ख़ारिज करते हुए मीनू वाडिया बताते हैं, "कोई भी विमान जो नागरिक विमान के तौर पर पंजीकृत हो और टिकट के बदले यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाता हो, उसे व्यावसायिक उड़ान कहते हैं. यात्रियों को ढोने वाले विमान और व्यावसायिक उड़ान वाले विमान में कोई अंतर नहीं है. भारत में निर्मित विमान का इस्तेमाल एयरलाइन पहले भी कर चुके हैं."
अब भारत में निर्मित डोर्नियर विमान को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, उसकी सत्यता को आंकते हैं.
बीबीसी के पास मौजूद आंकड़े तस्दीक करते हैं कि डोर्नियर विमान (नागरिकों को ढोने वाले विमान सहित) का निर्माण देश में पहले भी हो चुका है. सरकारी उपक्रम हिंदुस्तान एयोरनॉटिक्स लिमिटेड इस विमान को 1980 के दशक से बना रहा है और इनमें से कुछ घरेलू उड़ान सेवा इंडियन एयरलाइंस के बेड़े में शामिल थे.
भारतीय नौसेना के आधिकारिक इतिहास में वाइस एडमिरल जीएम हीरानंदानी (रिटायर्ड) ने लिखा है, "1980 के शुरुआती सालों में वायुसेना, नौ सेना, कोस्ट गार्ड और इंडियन एयरलाइंस की फीडर सेवा वायुदूत की ज़रूरतों को देखते हुए हल्के परिवहन योग्य विमान के स्वदेशी उत्पादन पर विचार किया गया था. तब चार विमानों का आकलन किया गया था, ब्रिटिश आइलैंडर, जर्मन डोर्नियर, इतालवी कासा और अमेरिकी ट्वीन ओटर. नौसेना, कोस्ट गार्ड और वायुदूत ने ज़रूरतों के हिसाब से डोर्नियर को सबसे बेहतर पाया था. तब एचएएल कानपुर में उत्पादन के लिए डोर्नियर का चुनाव किया गया था."
बीबीसी के पास पुरानी डिफेंस मैग़जीन, वायु एयरोस्पेस और डिफेंस रिव्यू के पुराने अंक के प्रति मौजूद हैं. अप्रैल, 1986 में पत्रिका के अंक भारत में निर्मित विमान डोर्नियर के इंडियन एयरलाइंस से जुड़ी सहयोगी व्यवासायिक उड़ान सेवा वायुदूत में शामिल होने की रिपोर्ट प्रकाशित है.
इस रिपोर्ट में कहा गया है, "हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की कानपुर डिविजन में 22 मार्च, 1986 की सुबह चकेरी एयरफ़ील्ड में एचएएल निर्मित पांच डोर्नियर 228 लाइट ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट में से पहले विमान को वायूदूत को सौंपा गया था."
आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन से जुड़े अंगद सिंह बताते हैं, "एचएएल निर्मित डोर्नियर (डीओ 228) को वायुदूत को 1986 में सौंपा गया और इसका इस्तेमाल नवंबर, 1984 के बाद शुरू हो गया था."
अंगद सिंह ने यह भी कहा, "12 अप्रैल, 2002 को जो विमान उड़ा है, वह एक तरह से ओरिजनल डोर्नियर 228 विमान का अपग्रेडेड वर्जन है हालांकि ढांचा एक जैसा ही है. डोर्नियर 228 एक पहली रेवेन्यू फ़्लाइट थी."
वायुदूत की शुरुआत 26 जनवरी, 1981 को छोटे छोटे इलाकों को जोड़ने के लिए हुआ था. मार्च, 1982 में वायुदूत को उत्तर पूर्वी सहित 23 जगहों से अभियान शुरू करने की अनुमति मिल चुकी थी. बाद में यह इंडियन एयरलाइंस में शामिल हो गया और इसके विमानों का इस्तेमाल भी कुछ समय के लिए किया गया.
साफ़ है कि भारत में दशकों पहले वैसे स्वनिर्मित विमान बना जा चुके थे जिनका व्यावसायिक उड़ानों के लिए इस्तेमाल किया गया था. बीबीसी ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से भी कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनकी तरफ़ से हमें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.
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