राहुल चले मोदी की चाल, बने अपनी ही पार्टी में बागी

आडवाणी और मनमोहन की एक दशा
इसके पहले भी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के मामले में भाजपा नेताओं ने अपने सबसे शीर्ष नेता लाल कृष्ण आडवाणी को दरकिनार कर दिया, वहीं राहुल गांधी के अध्यादेश संबंधी बयान के बाद मनमोहन सिंह भी इस मुद्दे पर अकेले पड़ गये हैं, मामले को टालने के अंदाज में उन्होने कहा कि वह अपनी अमेरिका यात्रा के बाद इस मुद्दे पर बात करेंगे।
यह पहला मौका है जब राहुल ने यूपीए के किसी फैसले पर असहमति जताई है। हालांकि इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्यसभा में भाजपा के विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने कहा है कि कांग्रेस की तरफ से यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि पार्टी तो गलती कर सकती है पर इसका प्रथम परिवार ( गांधी परिवार) कभी गलती नहीं करता है, वह सिर्फ सुधारता है।
दोनों ही पार्टियों के ऐसे माहौल के बाद अब कहा जा सकता है कि आने वाले वक्त में राहुल, मोदी का सामना आने वाले लोकसभा चुनाव में करेंगे।












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