तीन देशों से आने वाले मुस्लिम क्या अब नहीं बन सकते भारत के नागरिक, गृह मंत्रालय ने अपने FAQ में किया स्पष्ट

नई दिल्‍ली। गृह मंत्रालय की तरफ से साफ कर दिया गया है कि नए नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) की वजह से मुसलमानों समेत किसी भी भारतीय नागरिक पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मंत्रालय की तरफ से यह भी कहा गया है कि इस कानून के बाद हर नागरिक के मौलिक अधिकार सुरक्षित रह सकेंगे। मंगलवार को गृह मंत्रालय ने इस पूरे मुद्दे पर जारी भ्रम को दूर करने के लिए एक एफएक्‍यू रिलीज किया है। इससे यह बात भी सरकार की तरफ से स्‍पष्‍ट कर दी गई है कि इस नए कानून का किसी भी विदेशी को भारत में डिपोर्ट करने के मसले से कोई लेना-देना नहीं है।

प्रदर्शन के बीच मंत्रालय ने दिए जवाब

प्रदर्शन के बीच मंत्रालय ने दिए जवाब

गृह मंत्रालय ने इस नए कानून पर जारी बवाल के बीच ही फ्रिक्‍वेंट्ली आस्‍क्‍ड क्‍यूश्‍चेंस यानी एफएक्‍यू जारी किया है। पिछले कुछ दिनों से इस नए कानून पर देश के अलग-अलग हिस्‍से में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि यह नया कानून सिर्फ पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान और बांग्‍लादेश से आने वाले उन हिंदू, सिख, जैन, पारसी और क्रिश्चियन समुदाय के लोगों के लिए जो 31 दिसंबर 2014 तक देश में आए हैं। ऐसे लोग जिन्‍हें अपने देश में धर्म के आधार पर अत्‍याचार झेलने को मजबूर होना पड़ा था। सीएए का किसी भी विदेशी के भारत में डिपोर्ट किए जाने से कोई लेना-देना नहीं है।

किसी कानून में कोई बदलाव नहीं

किसी कानून में कोई बदलाव नहीं

मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि किसी भी विदेशी नागरिक की डिर्पोटेशन प्रक्रिया फॉरेनर्स एक्‍ट 1946 या फिर पासपोर्ट एक्‍ट 1920 के तहत ही होगी। गृह मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि ये दोनों ही कानून भारत में विदे‍शियों की एंट्री, यहां रुकने और यहां पर होने वाली गतिविधियों के अलावा यहां से जाने को तय करते हैं। मंत्रालय ने यह बात उस सवाल के जवाब में कही है जिसमें पूछा गया था कि क्‍या इन तीन देशों से आए मुसलमान प्रवासियों को सीएए के तहत भारत से निकाल दिया जाएगा?

प्रक्रिया के तहत निकाले जाएंगे विदेशी नागरिक

प्रक्रिया के तहत निकाले जाएंगे विदेशी नागरिक

मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि किसी भी विदेशी नागरिक का देश निकाला एक पूरी न्‍यायिक प्रक्रिया होती है जो स्‍थानीय पुलिस या फिर प्रशासन की तरफ से की गई एक उचित इन्‍क्‍वॉयरी पर ही आधारित है। इन अथॉरिटीज पर जिम्‍मा होता है कि वेगैर-कानूनी तरीके से बसे विदेशियों की पहचान करे। इसके बाद अथॉरिटीज सुनिश्चित करती हैं कि ऐसे गैर-कानूनी विदेशी नागरिकों को उनके देश के दूतावास की तरफ से एक सही डॉक्‍यूमेंट दिया जाए ताकि वह अपने देश वापस लौट सकें। मंत्रालय ने यह भी बताया है कि असम में फॉरेनर एक्‍ट 1946 के तहत ही किसी भी व्‍यक्ति को विदेशी मानकर उसे उसके देख वापस भेजा जा रहा है।

मुसलमानों को मिलेगी भारत की नागरिकता

मुसलमानों को मिलेगी भारत की नागरिकता

गृह मंत्रालय ने बताया है कि कानून के तहत ही वह व्‍यक्ति डिपोर्टेशन के लिए जिम्‍मेदार होगा। ऐसे में इस प्रक्रिया में कुछ भी ऑटोमैटिक, मैकेनिकल या फिर भेदभाव पर आधारित नहीं है। राज्‍य सरकारें और उनके जिलों की अथॉरिटीज केंद्र सरकार की तरफ से फॉरेनर्स एक्‍ट के सेक्‍शन तीन और पासपोर्ट एक्‍ट के सेक्‍शन पांच के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकती हैं। उन्‍हें किसी भी गैर-कानूनी विदेशी का पता लगाने, उसे हिरासत में लेने और उसे वापस भेजने का अधिकार है। मंत्रालय से यह सवाल भी किया गया था कि क्‍या पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश और अफगानिस्‍तान से आने वाले मुसलमानों को कभी भी भारतीय नागरिकता नहीं मिल सकती है? मंत्रालय ने इसके जवाब में कहा, 'नहीं।'

साल 2014 में मुसलमानों को मिली थी सिटीजनशिप

साल 2014 में मुसलमानों को मिली थी सिटीजनशिप

मंत्रालय ने बताया है कि वर्तमान में किसी भी विदेशी नागरिक की तरफ से कानूनी तौर पर भारतीय नागरिकता हासिल करने का माध्‍यम नागरिकता कानून के सेक्‍शन छह नैचुरलाइजेशन यानी देशीकरण या फिर कानून के सेक्‍शन पांच जो रजिस्‍ट्रेशन से जुड़ा है, बरकरार है। सीएए में इस सेक्‍शन में कोई बदलाव नहीं किया गया है न ही इसके तरीके को बदला गया है। मंत्रालय ने बताया है कि इन तीन देशों से पिछले कुछ वर्षों में सैंकड़ों मुसलमान आए हैं और उन्‍हें भारत की नागरिकता मिली है। मंत्रालय ने जानकारी दी है कि साल 2014 में जब भारत-बांग्‍लादेश विवाद हल हुआ तो 14,864 बांग्‍लादेशी नागरिकों को भारत की नागरिकता दी गई थी। इनमें से हजारों मुसलमान थे। इन तीनों देशों से आने वाला कोई भी व्‍यक्ति भले वह मुसलमान हो, नागरिकता संशोधन कानून के बाद भी सिटीजनशिप एक्‍ट 1955 के तहत नागरिकता के लिए अप्‍लाई कर सकता है।

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