'2022 में नहीं बनने देंगे योगी को सीएम', कहने वाले ओवैसी हैं कितनी प्रॉपर्टी के मालिक, जानिए
असदुद्दीन ओवैसी की बड़ी बेटी कुदसिया की शादी हैदराबाद के नवाब रहे शाह आलम खान के पोते बरकत आलम से हुई है।
नई दिल्ली, 5 जुलाई: उत्तर भारत में जहां इन दिनों गर्मी का पारा चढ़ा हुआ, तो वहीं देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में भी सियासी गर्मी अपने पूरे शबाब पर है। दरअसल, 403 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो गई है और एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने ऐलान कर दिया है कि वो यूपी की 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेंगे और 2022 में योगी आदित्यनाथ को सीएम नहीं बनने देंगे। यूपी में करीब 19.5 फीसदी मुस्लिम आबादी है, जिसे देखते हुए ओवैसी के ऐलान ने कई राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि यूपी में अपने इस बयान से सियासी हलचल मचाने वाले असदुद्दीन ओवैसी कितनी प्रॉपर्टी के मालिक हैं?

कितनी प्रॉपर्टी के मालिक हैं ओवैसी?
तेलंगाना के साथ-साथ देश की राजनीति में भी एक अहम कद रखने वाले एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी हैदराबाद लोकसभा सीट से लगातार चौथी बार सांसद चुने गए हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में इलेक्शन कमीशन को दिए गए उनके शपथ-पत्र के मुताबिक, असदुद्दीन ओवैसी करीब 17 करोड़ 90 लाख रुपए की संपत्ति के मालिक हैं। हालांकि उन्होंने अपने ऊपर करीब 12 करोड़ रुपए की देनदारी भी बताई है। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में ओवैसी ने अपनी संपत्ति करीब 4 करोड़ रुपए बताई थी।

ओवैसी के पास एनपी बोर .22 पिस्टल और एक राइफल
असदुद्दीन ओवैसी के पास एक एनपी बोर .22 पिस्टल और एक एनपी बोर राइफल भी है, जिनकी कीमत लगभग 2 लाख रुपए है। शपथ-पत्र में ओवैसी ने बताया कि उनके पास कोई गाड़ी नहीं है। वहीं, अचल संपत्ति के तौर पर असदुद्दीन ओवैसी के पास तीन और उनकी पत्नी के नाम पर एक आवासीय बिल्डिंग है, जिनकी कीमत करीब 15 करोड़ रुपए है।

फास्ट बॉलर रह चुके हैं ओवैसी
हैदराबाद के एक बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले असदुद्दीन ओवैसी के पिता सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी 1984 में पहली बार हैदराबाद लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे। 2008 में अपने पिता के निधन के बाद ओवैसी इस सीट से चुनाव लड़े और इसके बाद लगातार यहां से जीत दर्ज करते हुए आ रहे हैं। हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट ओवैसी क्रिकेट खिलाड़ी भी रहे हैं और 1994 में विज्जी ट्रॉफी के लिए साउथ जोन इंटर-यूनिवर्सिटी अंडर-25 टीम में फास्ट बॉलर के तौर पर खेल चुके हैं। इसके बाद उनका सेलेक्शन साउथ जोन यूनिवर्सिटी की क्रिकेट टीम में भी हुआ।

नवाब शाह आलम के पोते की दुल्हन हैं ओवैसी की बेटी
असदुद्दीन ओवैसी की बड़ी बेटी कुदसिया की शादी हैदराबाद के नवाब रहे शाह आलम खान के पोते बरकत आलम से हुई है। बरकत आलम का नाम हैदराबाद के शीर्ष उद्योगपतियों में गिना जाता है। मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट करने के बाद बरकत आलम अब अपने परिवार का बिजनेस संभाल रहे हैं, जिनमें डेरी व्यवसाय और गुलाब की खेती शामिल है। इसके अलावा बरकत आलम के परिवार के कुछ लोग राजनीति में भी सक्रिय हैं।

यूपी चुनाव को लेकर क्या है ओवैसी की प्लानिंग
हाल ही में मीडिया में खबर चली कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी और मायावती की बीएसपी गठबंधन के तहत चुनाव लड़ेंगी। हालांकि अगले ही दिन मायावती ने इन खबरों का खंडन कर दिया। इसके बाद ओवैसी ने भी ट्वीट करते हुए यूपी चुनाव के लिए अपनी रणनीति का खुलासा किया। ओवैसी ने लिखा, 'हमने फैसला लिया है कि हम 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेंगे। हम ओमप्रकाश राजभर के 'भागीदारी संकल्प मोर्चा' के साथ हैं और हमारी किसी पार्टी से चुनाव या गठबंधन के सिलसिले में कोई बात नहीं हुई है।' माना जा रहा है कि ओवैसी यूपी की मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर अपनी पार्टी के उम्मीदवार खड़े करेंगे।

बंगाल में ओवैसी के कितने कैंडिडेट जीते
यूपी चुनाव से पहले हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी असदुद्दीन ओवैसी ने हुंकार भरी और अपनी पार्टी के 7 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे। हालांकि बंगाल की जनता ने उन्हें नकार दिया और सभी 7 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई। इसके अलावा तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में ओवैसी ने 3 उम्मीदवारों को अपनी पार्टी के टिकट दिए, लेकिन यहां भी उन्हें कामयाबी नहीं मिली। फिलहाल ओवैसी की निगाहें यूपी चुनाव पर टिकी हैं।

अब कहां-कहां हैं ओवैसी की पार्टी के विधायक
असदुद्दीन ओवैसी अब तेलंगाना से बाहर भी अपनी पार्टी की जड़ें मजबूत करने में जुटे हैं। पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी पार्टी एआईएमआईएम के प्रत्याशी खड़े किए, जिनमें से 5 को जीत मिली। इसके अलावा महाराष्ट्र में भी एआईएमआईएम के दो विधायक जीतकर आए हैं। हालांकि ओवैसी पर आरोप लगते रहे हैं कि वो भारतीय जनता पार्टी को जिताने के लिए अपने उम्मीदवार खड़े करते हैं, लेकिन उनकी पार्टी के नेताओं का कहना है कि इस समय संसद से लेकर सड़क तक मुसलमानों की आवाज केवल ओवैसी ही उठाते हैं।












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