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J&K: इंटरनेट बंद होने के बावजूद अलगाववादी गिलानी ने Email भेज कर कैसे बुलाई प्रेस कान्फ्रेंस ?

नई दिल्ली- करीब एक महीने बाद कश्मीर के अलगावादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का टेंशन फिर से बढ़ा दिया है। एक महीने पहले वह इंटरनेट ठप होने के बावजूद ट्वीट करते हुए पकड़ा गया था। अब उसने नजरबंदी में रहते हुए ईमेल के जरिए प्रेस कान्फ्रेंस के लिए मीडिया वालों को बुलाकर सिक्योरिटी एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। आलम ऐसा हो गया कि जब उसके बुलावे पर मीडिया वालों का उसके श्रीनगर स्थित उसके घर पर जमावड़ा लगना शुरू हो गया, तब जाकर पुलिस को इसकी भनक लगी और उसने उसकी नजरबंदी और धारा-144 का हवाला देकर वहां से मीडिया वालों को विदा किया। अगर पुलिस ने कुछ देर और देरी की होती तो अलगाववादी गिलानी अपने मकसद में कामयाब हो जाता। अब पुलिस और सिक्योरिटी एजेंसियां इस बात की तहकीकात में लगी हैं कि आखिर बुजुर्ग गिलानी ने प्रेस कान्फ्रेंस के लिए ईमेल भेजा कैसे?

गिलानी ने ईमेल भेजकर बुलाई प्रेस कान्फ्रेंस

गिलानी ने ईमेल भेजकर बुलाई प्रेस कान्फ्रेंस

पिछले 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से वहां इंटरनेट सेवाएं बंद रखी गई हैं। इसके बावजूद बुजुर्ग अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी मंगलवार की शाम को कश्मीर के कुछ मीडिया कर्मियों को ईमल भेजने में कामयाब हो गया। ईमेल के जरिए उसने कश्मीरी मीडियाकर्मियों को बुधवार सुबह 11 बजे श्रीनगर के हैदरपुरा स्थित अपने घर पर एक प्रेस कान्फ्रेंस के लिए बुलाया था। तय वक्त के मुताबिक बुधवार सुबह उसके घर के बाहर मीडिया वाले जुटने भी शुरू हो गए। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उसे उसके घर में ही नजरबंद कर रखा है। पत्रकारों ने उसके ईमेल को इसलिए गंभीरता से लिया, क्योंकि 5 अगस्त के बाद से किसी कश्मीरी अलगाववादी ने प्रेस कान्फ्रेंस नहीं बुलाई है। इस वक्त ज्यादातर अलगवावादी जेलों में बंद हैं या उन्हें उनके घरों में ही नजरबंद रखा गया है। इतने दिनों में सिर्फ नेशनल कान्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला एक बार किसी तरह से मीडिया वालों से बात कर पाए थे, उसके बाद वे भी पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट के तहत अपने घर में ही नजरबंद हैं।

पुलिस ने प्रेस कान्फ्रेंस से रोक दिया

पुलिस ने प्रेस कान्फ्रेंस से रोक दिया

जब गिलानी के घर के बाहर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने पत्रकारों को पहुंचते देखा तो उनके कान खड़े हो गए। जब पत्रकारों से उन्हें ये पता चला कि उन्हें तो गिलानी ने ईमेल भेजकर बुलाया है तब तो उनके होश काफूर ही हो गए। उनके दिमाग में सिर्फ एक ही सवाल था कि इंटरनेट बंद होने के बावजूद इस गिलानी ने आखिर मीडिया तक अपना ईमेल भेजा कैसे? अलबत्ता, उन सुरक्षाकर्मियों ने पत्रकारों को गिलानी के घर के अंदर जाने से रोक दिया। वहां मौजूद पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों की सूचना पर वरिष्ठ अधिकारी भी वहां पहुंच गए। एसएचओ रफी शाह ने कहा कि इलाके में धारा-144 लगीहुई है, इसलिए उनका इस तरह से जुटना गैर-कानूनी है और वे यहां से चले जाएं। पत्रकारों से पुलिस वालों ने ये भी पूछा कि वे उस ईमेल का पता बताएं जिससे उन्हें प्रेस कान्फ्रेंस का मेल आया है। पुलिस की ओर से कहा गया है आवश्यकता पड़ने पर वे पत्रकारों से और जानकारी ले सकती है।

पाबंदी लागू होने के 4 दिन बाद तक ट्वीट कर रहा था गिलानी

पाबंदी लागू होने के 4 दिन बाद तक ट्वीट कर रहा था गिलानी

एक महीने पहले जब ये खुलासा हुआ था कि हुर्रियत का हार्डलाइनर सैयद अली शाह गिलानी ने ठप इंटरनेट सेवाओं के बावजूद 8 अगस्त तक धड़ल्ले से ट्वीट किया तो सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया था। ट्वीट की खबर सुनकर अधिकारियों के कान खड़े हो गए और आनन-फानन में जांच के आदेश दिए गए और गिलानी का कनेक्शन तुरंत बंद कर दिया गया। शुरुआती जांच में बीएसएनएल को दो बड़े अफसरों को दोषी पाया गया, जिन्हें तत्काल सस्पेंड कर दिया गया था। बता दें कि जब तक गिलानी का अनवेरिफाइड ट्विटर अकाउंट चालू रहा, उसने धड़ल्ले से कई देश विरोध ट्वीट कर डाले थे।

बीएसएनएल ने तब क्या बताया था?

बीएसएनएल ने तब क्या बताया था?

तब बताया गया था कि 4 अगस्त को जब पूरे जम्मू-कश्मीर में संचार सेवाएं बंद की गई थीं, तब श्रीनगर स्थित टेक्निकल एयरपोर्ट और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कनेक्शन आपात सेवा के तहत जारी रखा गया था। संयोग की बात है कि सैयद अली शाह गिलानी का घर भी एयरपोर्ट के पास ही है। इसलिए बीएसएनएल की ओर से यह आशंका जताई गई कि एयरपोर्ट वाले टेलिफोन एक्सचेंज से जुड़े होने के चलते ही शायद गिलानी का कनेक्शन भी चालू रह गया होगा! बता दें कि गिलानी को कुछ महीने छोड़कर पिछले 2010 से ही उसके घर में ही नजरबंद रखा गया है।

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