भारतीय बैंकों में दाऊद इब्राहिम ने कैसे जमा किए 5900 करोड़ रुपये
नयी दिल्ली। काले धन के खिलाफ चल रही लड़ाई के दो पहलू हैं। एक जो हम जानते हैं और दूसरा जिसे नहीं जानते। एक तरफ जहां भारत सरकार दुनिया भर के बैंकों में रखे काले धन को वापस लाने का प्रयास कर रही है वहीं दूसरी तरफ यह भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए कभी ना खत्म होने वाली चुनौती बनती जा रही है।
आईबी और ईडी के संयुक्त छानबीन में जो बाते सामने आई हैं उसके मुताबिक लगभग 5 हजार 9 सौ करोड़ रुपये भारत के अलग-अलग बैंकों के 1600 ब्रांचों में जमा हैं जो पाकिस्तान और अन्य देशों से चलाए जा रहे अंडरवर्ल्ड के हैं।

बैंक में कैसे जमा होता है धन
इस मामले पर गंभीरता से छानबीन कर रही ईडी ने वनइंडिया को जानकारी दी है कि ज्यादातर पैसे राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा किए गये हैं। ईडी के मुताबिक 1600 ब्रांचों में 900 ब्रांच राष्ट्रीयकृत बैंकों के हैं।
जरूरतमंद लोगों को किया जाता है टारगेट
छानबीन में ये बात सामने आई है कि काला धन बैंक में जमा करने के लिए जरूरत मंद लोगों को टारगेट किया जाता है। उनके नाम से बैंक में अकाउंट खुलवाए जाते हैं और उसके एवज में उन्हें कुछ पैसा दे दिया जाता है।
उसके बाद उन्हें पैसा दिया जाता है कि वो बैंक अकाउंट में जमा कर दें। हर एक लाख के ट्रांजेक्शन पर खाता धारक को 5 हजार रुपये दिए जाते हैं। इस खाते का एटीएम एजेंट अपने पास रखता है ताकि जरूरत पर पैसा निकाल सके।
भारत में हैं 300 एजेंट जो जमा करते हैं दाऊद का पैसा
छानबीन में ये बात सामने आई है कि भारत में ऐसे एजेंट सक्रिय हैं जो डी कंपनी के लिए काम करते हैं। छानबीन में पाया गया है कि लगभग 300 एजेंट देश के कोने-कोने में फैले हैं जो दाऊद के पैसे जमा करते हैं।
बीते चार और पांच सालों में आईबी और रॉ ने लगभग 1000 हजार नंबरों को ट्रैक किया है जिसपर कराची से फोन कर पैसा जमा करने का आदेश दिया जाता था। इन एजेंटों को भोले-भाले लोगों को फंसाने का काम दिया जाता है और फिर उनके गांव जाकर किसी नेशनल बैंक में उनके अकाउंट खुलवा दिए जाते हैं। खास बात ये है कि ये एजेंट उन्हीं बैंकों को टारगेट करते हैं जो सुरक्षा के लहजे में थोड़ा कम हो।












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